नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में रेलवे विफल रहा, स्टेशनों का आधुनिकीकरण नहीं होने से रेलवे एक बार फिर निर्धारित लक्ष्य से पिछड़ गया है।
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा दिए गए संपत्ति मुद्रीकरण लक्ष्य को हासिल करने में रेलवे लगातार दूसरी बार विफल होता दिख रहा है। केंद्र ने रेलवे के लिए 57,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, लेकिन रेलवे केवल 30,000 करोड़ रुपये ही हासिल कर पाया।
जानकारी के मुताबिक रेलवे अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पा रहा है क्योंकि वह प्राइवेट सेक्टर के लिए ट्रेनें नहीं चला पा रहा है या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए स्टेशनों का आधुनिकीकरण नहीं कर पाया है।
पिछले साल केंद्र सरकार ने राष्ट्रव्यापी संपत्ति मुद्रीकरण के लिए 6 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, जिसमें से रेलवे को 17,810 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था। पिछले साल रेलवे केवल 800 करोड़ रुपये ही कमा सका।हालांकि, संयुक्त लक्ष्य प्राप्त करने के मामले में भारत सरकार के लिए परिणाम अच्छे रहे, क्योंकि इसने 88000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था और 96,000 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया था।
केंद्र ने इस साल के लिए 1.6 लाख करोड़ रुपये के मुद्रीकरण का लक्ष्य रखा है। केंद्र को खनन क्षेत्र से बहुत उम्मीदें हैं, जो अतिरिक्त संपत्ति मुद्रीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। केंद्र सरकार ने कोयला और खदान लक्ष्य को साढ़े पांच गुना बढ़ाकर 6,000 करोड़ रुपये से 33,281 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शहर के बुनियादी ढांचे और आतिथ्य क्षेत्र के लिए अभी तक कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, हालांकि रिज़ॉर्ट अशोक जैसी संपत्तियों के पुनर्विकास के प्रस्तावों पर सरकार द्वारा काम किया जा रहा है।
वित्त मंत्रालय और कैबिनेट सचिवालय दोनों लगातार रेलवे को लक्ष्य की याद दिलाते रहे हैं, लेकिन रेलवे ने जिस तरह से प्रदर्शन किया है, उससे दोनों विभाग हैरान हैं। रेलवे को जिस तरह से निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी पर काम करना चाहिए था, वह नहीं हो रहा है। रेलवे स्टेशनों के विकास को लेकर वर्षों से चर्चा चल रही है, लेकिन इस मोर्चे पर अभी तक कुछ ठोस नहीं किया जा रहा है।
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