रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जनभागीदारी आधारित प्रयासों को नई गति दी जा रही है। टीबी उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने, बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आज जिले में ‘जोश टीम’ का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से इस पहल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर गौरेला स्थित एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन के
क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले ग्राम पंचायतों के सरपंचों,
माय भारत वॉलंटियर्स और एनसीसी कैडेट्स को सम्मानित किया गया। साथ
ही जिले की सभी 163 ग्राम पंचायतों और 224 ग्रामों को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। अभियान के अंतर्गत
ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के लक्षणों की पहचान, समय पर
जांच, नियमित उपचार तथा जनजागरूकता को विशेष प्राथमिकता दी
जाएगी।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली
पहचान से बढ़ा उत्साह, अब
संपूर्ण जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए
कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने
के लिए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
जिले में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों के टीबी मुक्त होने की उपलब्धि को
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना गौरव का विषय है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग,
पंचायत प्रतिनिधियों, मैदानी अमले और ग्रामीण
समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि अब इस उपलब्धि को
आगे बढ़ाते हुए संपूर्ण जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास
किए जाएंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास,
शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित अन्य
विभागों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय
भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
कलेक्टर ने बताया कि सतत विकास
लक्ष्यों के अंतर्गत वर्ष 2030 तक
टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जिले के मरवाही विकासखंड को
सर्वप्रथम टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद जिले की
सभी 163 ग्राम पंचायतों और 224 ग्रामों
को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में अभियान को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
समय पर जांच और नियमित
उपचार से टीबी पर नियंत्रण संभव
कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने कहा
कि टीबी एक ऐसी बीमारी है, जिसका
समय पर पता लगने और निर्धारित अवधि तक नियमित उपचार कराने से सफलतापूर्वक इलाज
संभव है। इसके लिए आवश्यक है कि आम नागरिक बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानें
और बिना देरी किए स्वास्थ्य संस्थानों में जांच कराएं।
उन्होंने बताया कि लगातार खांसी,
बुखार, वजन में कमी, कमजोरी
और रात में पसीना आने जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने
पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श एवं जांच करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीमारी को छिपाने अथवा उपचार में लापरवाही बरतने के बजाय समय पर
स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना आवश्यक है।
कलेक्टर ने ग्राम सभाओं में टीबी के
लक्षण, संक्रमण से बचाव, जांच एवं उपचार की जानकारी देने तथा प्रत्येक गांव में जनजागरूकता
गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए
केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि
प्रत्येक नागरिक को जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
52 ग्राम पंचायतों की
उपलब्धि बनी प्रेरणा, 19 सरपंचों को किया गया सम्मानित
गत वर्ष गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले
की 52 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित
किया गया था। इस उपलब्धि ने जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को नई दिशा प्रदान की
है। ग्रामीण स्तर पर जनजागरूकता, संभावित मरीजों की पहचान
तथा उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही
है।
इसी क्रम में मरवाही विकासखंड की 19
ग्राम पंचायतों के सरपंचों को टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट
कार्य करने के लिए शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। सरपंचों के प्रयासों
की सराहना करते हुए अन्य ग्राम पंचायतों को भी टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय
भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
युवाओं की ऊर्जा से
मजबूत होगा अभियान, 30 वॉलंटियर्स
और कैडेट्स सम्मानित
टीबी मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन
का स्वरूप देने में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी उद्देश्य से
जनजागरूकता गतिविधियों में सराहनीय योगदान देने वाले माय भारत के 15
वॉलंटियर्स तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के 15 कैडेट्स को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
युवाओं की सहभागिता से गांवों और
समुदायों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बीमारी
से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा संभावित मरीजों को जांच एवं उपचार के लिए
प्रेरित करने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। जोश टीम के माध्यम से सामुदायिक
सहभागिता बढ़ाकर टीबी उन्मूलन के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर
दिया गया।
जनप्रतिनिधियों ने किया
सामूहिक प्रयासों का आह्वान
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष
श्री राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, जनपद
पंचायत गौरेला के अध्यक्ष श्री शिवनाथ बघेल तथा जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्री
बृजलाल राठौर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त समाज के
निर्माण के लिए गांव-गांव में जनजागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। ग्राम पंचायतों,
सामाजिक संगठनों, युवाओं और स्वास्थ्य
कार्यकर्ताओं के सहयोग से संभावित मरीजों की समय पर पहचान तथा उन्हें उपचार के लिए
प्रेरित करने में मदद मिलेगी। जनप्रतिनिधियों ने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी
वर्गों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के संकल्प के साथ ली शपथ
कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. एवं
जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों,
सरपंचों, युवाओं और अन्य प्रतिभागियों को टीबी
उन्मूलन के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने की शपथ दिलाई। सभी ने ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के
संकल्प के साथ टीबी के प्रति जनजागरूकता फैलाने, संभावित
मरीजों को जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने तथा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को
टीबी मुक्त बनाने के अभियान में योगदान देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य
कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, मुख्य
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, जिला
कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री विभा टोप्पो सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी,
विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, माय भारत वॉलंटियर्स,
एनसीसी कैडेट्स तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित थे। टीबी मुक्त भारत
अभियान के अंतर्गत जोश टीम की शुरुआत और जनप्रतिनिधियों एवं युवाओं की सक्रिय
सहभागिता से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को नई गति
मिलने की उम्मीद है। जिले की 52 ग्राम पंचायतों की पूर्व
उपलब्धि को आधार बनाते हुए अब सभी 163 ग्राम पंचायतों और 224
ग्रामों को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास किए
जाएंगे।