रायपुर : सशक्त एमसीबी-सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में जनसेवा, संवेदनशीलता और जरूरतमंदों तक सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर पहल की जा रही है। इसी क्रम में गांधी जयंती के अवसर पर जिले के प्रभारी एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मनेन्द्रगढ़ स्थित एमसीबी जिला नेत्रहीन, विकलांग शिक्षण-प्रशिक्षण विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और दिव्यांग बच्चों से आत्मीय संवाद कर उनकी पढ़ाई, भोजन, आवासीय सुविधाओं एवं उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली।
बच्चों की प्रतिभा,
आत्मविश्वास और उत्साह से प्रभावित होकर प्रभारी मंत्री ने संस्था
के संचालन एवं आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए एक लाख रुपये की सहायता देने की
घोषणा की। साथ ही बच्चों के लिए साउंड सिस्टम बॉक्स तथा फल-फूल भी भेंट किए। इस
दौरान उन्होंने संस्था की आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने के निर्देश भी
दिए।
इस अवसर पर नगर पालिका परिषद
मनेन्द्रगढ़ की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा यादव, उपाध्यक्ष
धर्मेन्द्र पटवा, कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े, पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह, जिला पंचायत सीईओ अंकिता
सोम, पूर्व संसदीय सचिव श्रीमती चंपादेवी पावले, एसडीएम लिंगराज सिदार, तहसीलदार श्रुति धुर्वे,
जिला संगठन प्रभारी एमसीबी बाबूलाल अग्रवाल, संस्कार
अग्रवाल, प्राचार्य संतोष चढ़ोकर, शिक्षक
राकेश गुप्ता, गोपाल तिवारी, रामनाथ,
रामनारायण सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वागत गीत और सुंदरकांड
की चौपाई से भावुक हुए अतिथि
विद्यालय पहुंचने पर नेत्रहीन बच्चों
ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर प्रभारी मंत्री सहित सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।
बच्चों ने संगीत के साथ रामायण का पाठ प्रस्तुत किया और सुंदरकांड की चौपाई सुना
कर सभी का मन मोह लिया। इसके साथ ही बच्चों ने जीव-जंतुओं की अलग-अलग आवाजें
निकालकर अपनी विशेष प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की प्रस्तुति में
आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिभा देखकर
उपस्थित अतिथियों ने उनकी सराहना की।
बच्चों की प्रतिभा से प्रभावित
प्रभारी मंत्री ने कहा कि उनके लिए यह अवसर बेहद भावुक और यादगार है। बच्चों के
बीच आकर उनसे मिलने, बैठने और चर्चा करने
का अवसर मिलना उनके लिए आत्मीय खुशी का क्षण है। उन्होंने कहा कि बच्चों के अंदर
प्रतिभा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का जो जज्बा है, वह किसी से कम नहीं है।
प्राचार्य ने संस्था की समस्याओं
से मंत्री को कराया अवगत
विद्यालय के प्राचार्य संतोष चढ़ोकर
ने संस्था की वर्तमान आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी प्रभारी मंत्री को दी।
उन्होंने बताया कि संस्था के संचालन में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा
है। उन्होंने तकनीकी कारणों से उत्पन्न आर्थिक समस्या का उल्लेख करते हुए संस्था
में कार्यरत शिक्षकों के वेतन में वृद्धि किए जाने की अपील की।
प्राचार्य ने बताया कि संस्था को
बच्चों के भरण-पोषण के लिए वर्तमान में केवल 600 रुपये की राशि प्राप्त होती है, जिससे भरण-पोषण की
व्यवस्था में कठिनाई आती है। उन्होंने इस राशि को बढ़ाने का भी आग्रह किया।
बच्चों की पढ़ाई,
भोजन और ब्रेल लिपि की ली जानकारी
प्रभारी मंत्री ने विद्यालय में
अध्ययनरत बच्चों की संख्या और उनके संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने
पूछा कि किन-किन जिलों के बच्चे यहां अध्ययन कर रहे हैं और उन्हें किस प्रकार की
शिक्षा एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बच्चों से भोजन व्यवस्था की
जानकारी सीधे ली और शिक्षकों से उनकी पढ़ाई के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।
शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को
ब्रेल लिपि के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जा रही है। मंत्री ने बच्चों से बातचीत
कर उनकी पढ़ाई और रुचियों को समझा तथा विद्यालय की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
उन्होंने जिला पंचायत सीईओ अंकिता
सोम को विद्यालय का नियमित रूप से निरीक्षण करने और व्यवस्थाओं की सतत निगरानी
रखने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों की आवश्यकताओं
का समय पर निराकरण हो सके।
आप किसी से भी पीछे नहीं
हैं, अपनी प्रतिभा को
बड़े मंच तक लेकर जाएं
प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने
बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित किया
है कि वे किसी से भी पीछे नहीं हैं। पढ़ाई, संस्कृति,
संगीत, रामायण और महाभारत के ज्ञान सहित
विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि संगीत के साथ जिस
सुंदर अंदाज में बच्चों ने रामायण का पाठ प्रस्तुत किया,
उससे वे और उपस्थित सभी लोग बेहद प्रभावित हुए हैं। बच्चों की
प्रस्तुति में प्रतिभा के साथ आत्मविश्वास और सीखने की अद्भुत इच्छा दिखाई देती
है।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते
हुए कहा कि सभी बच्चे स्वस्थ और खुश रहें तथा जीवन में जिन ऊंचाइयों को छूना चाहते
हैं, उन ऊंचाइयों तक पहुंचें। उनके सपने
बड़े हों और उन्हें पूरा करने के लिए उनका हौसला हमेशा मजबूत बना रहे।
मूलभूत सुविधाओं को
बेहतर करने के निर्देश
प्रभारी मंत्री ने संस्था की
समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाते हुए कहा कि संस्था में जो भी मूलभूत
आवश्यकताएं हैं, उन्हें बेहतर किया जाएगा।
उन्होंने शौचालय, पेयजल, बिस्तर सहित
अन्य जरूरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही संस्था के आवश्यक
संसाधनों और व्यवस्थाओं को बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि सशक्त एमसीबी-सेवा
संकल्प अभियान का उद्देश्य सेवा और संवेदनशीलता के साथ जरूरतमंदों तक सुविधाओं को
पहुंचाना है। दिव्यांग बच्चों की आवश्यकताओं को समझना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध
कराना भी इसी सेवा भावना का हिस्सा है।
’आपकी कला और आवाज
बड़े मंच तक पहुंच सकती है..मंत्री’
प्रभारी मंत्री ने बच्चों की संगीत
प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा केवल संस्था तक सीमित नहीं रहनी
चाहिए। बच्चों के पास संगीत और गायन की विशेष कला है। इसके लिए एक अच्छी कार्यक्रम
टीम तैयार की जा सकती है, जिसके
माध्यम से वे बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों की कला और
आवाज में इतनी क्षमता है कि वे आगे चलकर बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों की इसी प्रतिभा को उनकी ताकत बनाकर आगे बढ़ाने की जरूरत
है। उनके अंदर जो जज्बा, जुनून और कुछ कर
गुजरने की इच्छा है, उसे मिलकर आगे लेकर जाना है।
’संस्था के लिए एक लाख
रुपये की सहायता की घोषणा’
प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने
संस्था की गतिविधियों, संचालन और आवश्यक
व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए एक लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने
कहा कि इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग करना नहीं है, बल्कि
बच्चों के अंदर मौजूद प्रतिभा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की
भावना को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के अंदर बहुत
कुछ करने की क्षमता है। जरूरत केवल उनकी प्रतिभा को सही मंच और अवसर देने की है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बच्चे अपनी मेहनत,
लगन और प्रतिभा से नई ऊंचाइयों को हासिल करेंगे।
प्रभारी मंत्री ने सभी बच्चों के
उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे स्वस्थ रहें,
खुश रहें, निरंतर आगे बढ़ें और अपने परिवार,
संस्था तथा पूरे जिले का नाम रोशन करें। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री
ने बच्चों को साउंड सिस्टम बॉक्स एवं फल-फूल भेंट किए। बच्चों के साथ आत्मीय संवाद
और उनकी प्रतिभाओं की प्रस्तुति से विद्यालय में उत्साह और खुशी का वातावरण रहा।