Wednesday, October 23, 2019
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छत्तीसगढ़ के उत्पादों को मिला अंतर्राष्ट्रीय मंच और बाजार

०० अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में छत्तीसगढिया़ उत्पादों की लगी प्रदर्शनी 

रायपुर| अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में लगी राज्य के कृषि उत्पादों और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी से स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय मंच के साथ बाजार भी मिला है। यहां किसानों और हस्तशिल्पियों के द्वारा जैविक कृृषि उत्पाद, बेल मेंटल और हाथकरघा वस्त्रों के प्रदर्शनी लगाई गई। यहां जिर्राफूल से बने शर्बत से लेकर ब्लैक राईस, जैविक उत्पादों और गोबर से बनी कलाकृतियों को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला। प्रदर्शनी में आए लोगों ने छत्तीसगढि़या उत्पादों की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि उत्पादों में उन्हें छत्तीसगढ़ की समृृद्ध विविधता और नया पन देखने को मिला। खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण और संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत के साथ मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी और कृषि, ग्रामोद्योग विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती मनिन्दर कौर द्विवेदी ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
राजनांदगांव से आई डेन्टिस्ट डॉ.प्राची अग्रवाल ने कुम्हारी के ‘चेंज मेंकर‘ समूह द्वारा गोबर से बनाए दिये, हवन कुंड, धूप, गणेश प्रतिमा की खरीदारी करते हुए कहा कि यह नया और अच्छा कॉन्सेप्ट है और पर्यावरण के अनुकूल है। जैविक कृषि उत्पाद आज की स्वस्थ दैनिक जीवन शैली के लिए बहुत उपयोगी हैं। ‘चेंज मेंकर‘समूह के श्री सुनील शर्मा ने बताया कि शासन की महत्वाकांक्षी ग्राम सुराजी योजना के तहत गरवा संरक्षण की तर्ज पर समूह द्वारा गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाए हैं,इनकी खरीदारी से 40 प्रतिशत हिस्सा गायों के संरक्षण को दिया जाता है। भाटापारा के चांडक इंडस्ट्री के राइस मिलर श्री मनोज चांडक ने कहा कि प्रदर्शनी में पूरे छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादों की बहुत सी कस्में देखने को मिली। सरकार का यह अच्छा प्रयास है। इससे किसानों को सीधे स्थानीय बाजार के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार भी मिलेगा। उन्होंने किसानों से कृषि उत्पादों के विक्रय के संबंध में बात भी की।  कबीरधाम जिले के आत्मा योजना के डिप्टीप्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री सुशील कुमार ने बताया कि विकासखण्ड बोडला के जयगणेश कृृषक समूह के किसानों द्वारा यहां जैविक कोदो, कुटकी, रागी, सावा, लाल चावल का स्टॉल लगाया गया है। सभी जैविक उत्पाद एण्टी एजिंग और शुगर फ्री हैं। जैविक उत्पाद मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है। स्टॉल में किसानों ने बताया कि कबीरघाम और बस्तर केे किसानों द्वारा क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में ओमान और यूएसए से 25-25 टन कोदो और कुटकी के विक्रय का एमओयू किया गया है।  धमतरी जिले के किसान और ओजस्वी कृषक उत्पादक समिति के सदस्य श्री भोलाराम साहू और श्री शत्रुध्न साहू ने खुश होकर बताया कि अब तक वे स्थानीय बाजार में अपने उत्पाद की बिक्री करते थे। यहां आकर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय बाजार मिला है। वे जैविक चना, ब्लैक राइस, जवाफूल और विष्णुभोग का उत्पादन करते हैं। यहां लोग उत्पादों को देखकर उनकी खूबियां जान पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर प्रोक्योरमेण्ट प्रोसेसिंग एण्ड रिलेटिंग कोऑपरेटिव्स ने उन्हें 50 हजार रूपये का चेक देकर ब्लैक राइस खरीदने के लिए अनुबंध किया है। यहां किसानों को नया बाजार मिला है और उनकी तरक्की के नए रास्ते खुले हैं। खैरागढ़, डोंगरगढ़, बालोद, धमतरी के किसानों नेे भी जापान से एक मीट्रिक टन अलसी और हैदराबाद से आए क्रेताओं से एक मीट्रिक टन अलसी और अलसी तेल का अनुबंध किया। डोंगरगढ़ के किसान श्री शिवेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि उन्हें पहली बार ऐसा मंच मिला है, जिसमें कोई बिचौलियां नहीं हैं, वह सीधे क्रेताओं से बात कर सकते हैं। किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार का मंच उपलब्ध कराने का प्रयास सराहनीय है, ऐसे आयोजन आगे भी किया जाना चाहिए। इसी तरह बस्तर ग्रामोत्थान सेवा समिति, बकावण्ड के अध्यक्ष श्री सत्यानंद द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने जापान से 750 रूपये किलो की दर से 6 टन काजू के विक्रय का अनुबंध किया गया है। वे बस्तर में उद्यानिकी विभाग की मदद से स्थानीय बाजार में बिक्री करते थे। अब उनका उत्पाद विदेशों में भी जाएगा इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।