रायपुर : पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में वार्षिक उत्सव ‘इम्पेटस-2026’ का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की 63 वर्षों की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा को समर्पित इस उत्सव में विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक, खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्सव के अंतर्गत गीत-संगीत पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘यूफोरिया-2026’ का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने संगीत की विभिन्न विधाओं में मनमोहक प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बुधवार
शाम महाविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़
शासन के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में चिकित्सा
शिक्षा आयुक्त श्री रितेश अग्रवाल तथा महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. चंद्र कुमार
शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित रहे।
चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ.
विवेक चौधरी ने मुख्य अतिथि के समक्ष वार्षिक प्रतिवेदन 2025–2026
प्रस्तुत करते हुए कहा कि पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ.
भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर ने शैक्षणिक सत्र
2025–26 में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान,
मरीजों के उपचार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय
उपलब्धियाँ हासिल की हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) से एमबीबीएस (MBBS) की सीटें 230 से बढ़ाकर 250 करने की स्वीकृति प्राप्त हुई।
इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी
पाठ्यक्रमों में नई सीटों की मंजूरी, विदेशी
चिकित्सा स्नातकों की इंटर्नशिप सीटों में 17 से बढ़ाकर 64
तक विस्तार तथा स्नातकोत्तर और एलाइड हेल्थ साइंस पाठ्यक्रमों के
विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। प्रदेश के 10 शासकीय
चिकित्सा महाविद्यालयों को जोड़ने वाली टेली-शिक्षा व्यवस्था, टेलीरेडियोलॉजी नेटवर्क, संकाय सदस्यों का प्रशिक्षण
और राष्ट्रीय नियामक संस्थाओं से प्रमाणन जैसी पहलें संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता
एवं प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने में सहायक रही हैं।
चिकित्सालय के विभिन्न विभागों ने
लाखों मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हुए जटिल सर्जरी,
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कैंसर उपचार,
नेत्र चिकित्सा, अस्थि रोग, आपातकालीन चिकित्सा और रक्त सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज कीं।
अनुसंधान एवं निदान सुविधाओं के विस्तार के साथ 1.40 करोड़
रुपए के सिविल निर्माण कार्य, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की
खरीदी, केंद्रीय पुस्तकालय का नवीनीकरण, छात्रावास सुविधाओं में सुधार, स्मार्ट क्लासरूम,
चिल्ड्रन पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया गया। ये
उपलब्धियाँ संस्थान के समर्पित चिकित्सकों, शिक्षकों,
रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों,
कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों और छत्तीसगढ़
शासन के सहयोग का परिणाम हैं।
मुख्य
सचिव श्री विकासशील ने विद्यार्थियों को दिया संवेदनशील चिकित्सक बनने का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री
विकासशील ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस चिकित्सा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने जिस समर्पण और उत्साह के साथ
इस कार्यक्रम का आयोजन किया है, वह वास्तव में सराहनीय है।
चिकित्सा विद्यार्थियों के जीवन में तीन प्रमुख चुनौतियाँ होती हैं:- पढ़ाई,
परीक्षाएँ और पर्याप्त नींद। अक्सर इन तीनों में से केवल दो के बीच
ही संतुलन बना पाता है। नीट (NEET) की परीक्षा उत्तीर्ण करने
के बाद बहुत से विद्यार्थियों को लगता है कि जीवन की सबसे कठिन चुनौती समाप्त हो
गई है, लेकिन चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश लेने के बाद
उन्हें एहसास होता है कि नीट (NEET) तो परीक्षाओं की एक लंबी
श्रृंखला की शुरुआत भर थी।
मैं आपसे तीन महत्वपूर्ण बातें साझा
करना चाहता हूँ। पहली बात, चिकित्सा
विज्ञान है, लेकिन इसके साथ यह एक कला भी है। तकनीक और
कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं,
लेकिन वे मानवीय संवेदना, करुणा और बीमारी से
भयभीत मरीज को भरोसा दिलाने की क्षमता का स्थान नहीं ले सकतीं। एक अच्छा डॉक्टर
बनने के लिए ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ मरीज की भावनाओं को समझना भी आवश्यक
है। दूसरी बात, महत्वाकांक्षी बनिए, लेकिन
स्वयं को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से मत लीजिए। जीवन केवल अच्छे अंक प्राप्त करने,
रैंक हासिल करने और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने तक सीमित
नहीं है। वास्तविक सफलता अच्छे संबंध बनाने, समाज के लिए
योगदान देने और एक बेहतर इंसान बनने में भी निहित है। जीवन में हर लक्ष्य तुरंत
प्राप्त नहीं होता। असफलताओं और अप्रत्याशित परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखिए
तथा अपने प्रयास जारी रखिए।
तीसरी बात,
अपने जीवन की खुशियों को भविष्य के लिए टालते मत रहिए। चिकित्सा
शिक्षा के दौरान आप जो मित्रताएँ बनाएँगे, छात्रावास में
बिताए गए पल, देर रात तक होने वाली बातचीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य
और खेलकूद; ये सभी आपके जीवन की अनमोल स्मृतियाँ बनेंगे।
संभव है कि भविष्य में आपको शरीर रचना विज्ञान या विकृति विज्ञान में प्राप्त
अंकों की याद न रहे, लेकिन अपने मित्रों और साथ बिताए गए
खुशनुमा पलों को आप हमेशा याद रखेंगे। इसलिए पढ़ाई और पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ
अपने जीवन में आनंद और संतुलन बनाए रखिए। अंततः, चिकित्सा को
केवल एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के अवसर
के रूप में देखिए। एक सफल डॉक्टर वह नहीं है जो केवल बीमारियों का उपचार करता है,
बल्कि वह है जो मरीज की बात ध्यान से सुनता है, उसकी समस्याओं को समझता है और उसे विश्वास एवं सम्मान के साथ उपचार प्रदान
करता है। मेरी शुभकामना है कि आप सभी ज्ञानवान, संवेदनशील और
करुणाशील चिकित्सक बनें तथा जीवनभर सीखने, प्रश्न पूछने और
अपने अनुभवों से स्वयं को बेहतर बनाने की भावना बनाए रखें।
पंथी
नृत्य ने बाँधा समां
चिकित्सा छात्रों द्वारा बाबा गुरु
घासीदास जी के जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं
पर आधारित पंथी नृत्य की प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया। इसी प्रकार 2025 बैच की श्रुति सिंह ने बॉलीवुड के मिक्स गीतों पर सोलो डांस की प्रस्तुति
दी। दिव्या मिंज ने तेनु काला चश्मा..., बावन गज़ का दामन...,
जियाना कुरैशी ने जिया जले..., हर्षिता साहू
ने प्रेम की लीला... तथा अर्णव बिसेन ने कीबोर्ड प्ले करके सांस्कृतिक
प्रस्तुतियों को यादगार बनाया।
अनारकली की मीनार...नामक प्रहसन ने
मासिक धर्म से जुड़े मिथकों से पर्दा उठाया। प्रहसन में विभिन्न भूमिका अदा कर रहे
चिकित्सा छात्रों ने बताया कि मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़ी कई सामाजिक
भ्रांतियां और मिथक हैं, जिनका वास्तविकता से
कोई लेना-देना नहीं है। यह महिलाओं के शरीर की एक सामान्य और प्राकृतिक जैविक
प्रक्रिया है।