रायपुर : संपत्ति की रजिस्ट्री में आर्थिक बचत और नामांतरण की आसान प्रक्रिया ने दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी पाल को दोहरी राहत दी है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उनका रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ है। वहीं, नामांतरण की प्रक्रिया में हुए सुधारों से संपत्ति संबंधी कार्यों को पूरा करना भी पहले की तुलना में आसान हो गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में श्रीमती पाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले नामांतरण से जुड़े कार्यों में परेशानी होती थी, लेकिन अब प्रक्रिया अधिक सहज और सुविधाजनक हुई है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के
विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के
विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में
प्रदेश की पंजीयन व्यवस्था में नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न सुधार किए गए
हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसी पहल से
नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ अनावश्यक कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिल
रही है।
*महिलाओं के लिए आधा
हुआ पंजीयन शुल्क, चंचल को मिला आर्थिक लाभ*
श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने बताया कि
महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50
प्रतिशत की रियायत का उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इससे संपत्ति
पंजीयन पर होने वाला खर्च कम हुआ और उन्हें आर्थिक राहत मिली।
राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष
में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4
प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस
निर्णय से महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में अधिक
किफायती हुआ है।
श्रीमती पाल ने इस पहल को महिलाओं के
लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि पंजीयन शुल्क में कमी से आर्थिक बोझ घटा है। यह
सुविधा महिलाओं को अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराने के लिए प्रोत्साहित करने में
भी सहायक है।
*पहले नामांतरण में
होती थी परेशानी, अब प्रक्रिया हुई सरल*
श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने पंजीयन
व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से मिली सुविधा का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने
बताया कि पहले संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण से संबंधित कार्यों में
परेशानी होती थी और प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था। अब नामांतरण की
प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हुई है।
पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन
व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे
बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों
के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।
श्रीमती पाल ने बताया कि नामांतरण की
प्रक्रिया आसान होने से संपत्ति संबंधी कार्यों को पूरा करने में सुविधा मिली है।
उनके लिए यह बदलाव पंजीयन शुल्क में आर्थिक राहत के साथ एक अतिरिक्त लाभ के रूप
में सामने आया है।
*संपत्ति में महिलाओं
की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर
शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत का
उद्देश्य पंजीयन का आर्थिक भार कम करने के साथ संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी को
प्रोत्साहित करना है।
अपने नाम संपत्ति का स्वामित्व
महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण आधार है।
पंजीयन शुल्क में कमी से महिलाओं और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल
रहा है।
दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी
पाल का अनुभव दर्शाता है कि शुल्क में रियायत और पंजीयन सेवाओं में सुधार से
महिलाओं को आर्थिक एवं प्रक्रियागत दोनों स्तरों पर राहत मिल रही है।
*मुख्यमंत्री और वित्त
एवं पंजीयन मंत्री के प्रति जताया आभार*
श्रीमती चंचल कुमारी पाल ने महिलाओं
के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत
की छूट और नामांतरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री
विष्णु देव साय तथा वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार
व्यक्त किया। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और नागरिक सेवाओं को सरल बनाने
की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
सेवा संकल्प अभियान से
सामने आ रही बदलाव की कहानियां
‘सेवा संकल्प अभियान’
के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन
सेवाओं में किए गए सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव
संकलित कर रहा है।
दंतेवाड़ा की श्रीमती चंचल कुमारी
पाल की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। उनके लिए पंजीयन शुल्क में 50
प्रतिशत की छूट केवल आर्थिक बचत नहीं, बल्कि
अपने नाम संपत्ति पंजीयन कराने में मिली महत्वपूर्ण सुविधा है। वहीं, नामांतरण की सरल प्रक्रिया ने संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सहज बनाया
है। इस तरह पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधार महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ
नागरिक सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रहे हैं।