September 28, 2026


सेवा संकल्प अभियान : खुले में शौच से मुक्ति के बाद कचरा प्रबंधन की ओर बढ़ा बारगांव, स्वच्छता बनी गांव की सामूहिक जिम्मेदारी

436 शौचालयों के निर्माण से बदली आदतें, अब घर से निकलने वाले कचरे के पृथक्करण पर जोर

रायपुर : स्वच्छता की शुरुआत शौचालय निर्माण से हुई और अब यह यात्रा व्यवस्थित कचरा प्रबंधन तक पहुंच गई है। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत बारगांव ने जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को गांव की सामूहिक जिम्मेदारी बनाते हुए बदलाव की नई तस्वीर पेश की है। कभी खुले में शौच की समस्या से जूझने वाले इस गांव में आज 436 शौचालयों का निर्माण हो चुका है और उनके नियमित उपयोग के बाद अब ग्रामीण घर से निकलने वाले कचरे के पृथक्करण और उचित प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई बारगांव की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्वच्छता के लिए बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के साथ लोगों की आदतों और व्यवहार में बदलाव भी महत्वपूर्ण है। गांव में लगातार जागरूकता और महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, स्कूली बच्चों तथा ग्रामीणों की भागीदारी से शौचालय का नियमित उपयोग ग्रामीण जीवन का हिस्सा बना है।

शौचालय से आगे बढ़ी स्वच्छता की मुहिम, कचरा प्रबंधन पर फोकस

बारगांव में स्वच्छता को केवल घर और शौचालय तक सीमित नहीं रखा गया। गांव से निकलने वाले कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। जैविक कचरे के प्रबंधन के लिए वर्मी कम्पोस्ट और नाडेप टैंक तैयार किए गए हैं, जबकि सूखे कचरे के लिए सेग्रिगेशन शेड की व्यवस्था की गई है।

गांव से निकलने वाले सूखे कचरे के संग्रहण की जिम्मेदारी स्व-सहायता समूह को दी गई है। इससे गांव की स्वच्छता व्यवस्था में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ने के साथ उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का भी अवसर मिला है।

अब घर से ही अलग-अलग होगा कचरा

ग्राम पंचायत अब कचरा प्रबंधन को और व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एसडब्ल्यूएम रूल्स 2026 के तहत स्वच्छाग्रही दीदियां और मिशन का अमला घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को चार प्रकार के कचरे के पृथक्करण, निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संग्रहण तथा उसके उचित प्रबंधन के संबंध में जागरूक कर रहे हैं। इसका उद्देश्य कचरे को उसके स्रोत यानी घर से ही अलग-अलग रखने की आदत विकसित करना और अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

जनभागीदारी से स्वच्छता बनी व्यवहार का हिस्सा

खुले में शौच की समस्या से मुक्ति, 436 शौचालयों का निर्माण एवं नियमित उपयोग और अब कचरे के पृथक्करण एवं प्रबंधन की पहल बारगांव में स्वच्छता को लेकर आए बदलाव को दर्शाती है। सेवा संकल्प अभियान में सामने आई यह कहानी बताती है कि शासन की सुविधाओं के साथ जब समुदाय की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे लोगों की दिनचर्या और व्यवहार का हिस्सा बन जाती है।


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