रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के सेवा संकल्प और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचने से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। सरगुजा जिले के जनपद पंचायत उदयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत केशमा (वन केशमा) में पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए पीएम जनमन योजना के तहत निर्मित पक्के आवास इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रहे हैं। वर्षों से कच्चे मकान और मौसम की कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन यापन कर रहे परिवारों को अब सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिला है।
वर्षों पुराना सपना हुआ साकार
ग्राम के पहाड़ी कोरवा परिवारों में
हुडकू राम/बिरझु और रतन साय/छन्दू का परिवार लंबे समय से पक्के और सुरक्षित घर की
उम्मीद लगाए हुए था। पीएम जनमन योजना के माध्यम से दोनों परिवारों को पक्का आवास
मिलने से उनकी वर्षों पुरानी चिंता दूर हुई है। घर मिलने के बाद परिवारों में खुशी
का माहौल है और अब वे सुरक्षित वातावरण में अपने दैनिक जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं।
बारिश, ठंड
और तेज हवाओं से मिली राहत
पहाड़ी क्षेत्रों में कच्चे मकानों
में रहने वाले परिवारों को बारिश, तेज हवा
और ठंड के दौरान अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पक्का आवास मिलने से इन
परिवारों को छत टपकने, दीवारों के कमजोर होने और मौसम की
प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाली परेशानियों से राहत मिली है। सुरक्षित घर
बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए बेहतर
और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करा रहा है।
पक्का घर बना स्थिरता और सम्मान का
आधार
इन परिवारों के लिए पक्का मकान केवल
चार दीवारों का निर्माण नहीं, बल्कि
सुरक्षा, स्थायित्व और सम्मान से जुड़ा आशियाना है। अब
परिवारों को घर की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता नहीं रहेगी। सुरक्षित आवास मिलने से
वे बच्चों की पढ़ाई, आजीविका और दैनिक जीवन की अन्य जरूरतों
पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
पीव्हीटीजी परिवारों तक पहुंच रही
बुनियादी सुविधाएं
पीएम जनमन योजना का उद्देश्य विशेष
रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीव्हीटीजी) के परिवारों तक आवास सहित आवश्यक
बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। पक्के आवास जैसी मूलभूत सुविधा
मिलने से इन परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की नींव मजबूत हो रही है।
हुडकू राम और रतन साय के परिवारों के
लिए पक्का आवास सुरक्षित जीवन और बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कभी कच्चे घर और मौसम की चिंता के बीच गुजरने वाले दिन अब सुरक्षित छत के नीचे
सुकून और स्थायित्व के साथ बीत रहे हैं।