रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बहतराई स्टेडियम में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व तीजा तिहार के अवसर पर आयोजित भव्य तीजा मिलन समारोह में शामिल हुए। आयोजन स्थल छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया। बड़ी संख्या में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं माताओं-बहनों के साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे स्टेडियम में उल्लास और उमंग का माहौल रहा। महिलाओं के लिए आकर्षक झूलों, मेहंदी और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की गई थी। माताओं-बहनों के लिए भोजन और उपहार की भी विशेष व्यवस्था की गई, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया। बच्चों ने भी विभिन्न गतिविधियों का आनंद लिया। कार्यक्रम में विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, श्रीमती भावना बोहरा, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पांडे, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, श्री दीपक सिंह, श्री मोहित जायसवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने तीजा पर्व को माताओं और बहनों की
आस्था, प्रेम और पारिवारिक समर्पण का पर्व बताते हुए कहा कि
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में तीजा का विशेष स्थान है। हमारी माताएं अपने
पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक व्रत
रखती हैं। हमारी सनातन संस्कृति में नारी को सदैव सम्मान का स्थान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान,
सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
घर-घर शौचालय का निर्माण, महिलाओं के नाम राशन कार्ड तथा
महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक
माताओं-बहनों को अब तक 31 किश्तों की राशि का भुगतान महिलाओं
को सम्मान और आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल
योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की भागीदार और
आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। प्रदेश में 13 लाख 85
हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। ड्रोन दीदियां आधुनिक
तकनीक के माध्यम से स्वरोजगार से जुड़कर प्रतिदिन 6 से 7
हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। हमारी दीदियां सेंटरिंग
प्लेट, ई-रिक्शा सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही
हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उद्योगों से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने
के लिए उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है तथा 50 प्रतिशत तक
सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। बस्तर से बिलासपुर तक माताएं और बहनें
आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सरकार का प्रयास है कि विकास की सुविधाएं
गांव और घर के नजदीक पहुंचें। वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़
के निर्माण के संकल्प का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज और वन संपदा
से समृद्ध छत्तीसगढ़ में विकास की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ प्रदेश
के हर वर्ग तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री की
महत्वपूर्ण घोषणाएं -
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में बिल्हा
विकासखंड के चोरहादेवरी गांव का नाम बदलकर ‘रामदेवरी’
किए जाने की घोषणा की। साथ ही माघी पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले
बेलतरा महोत्सव के आयोजन के लिए 30 लाख रुपए की राशि प्रदान
करने की घोषणा भी की। घोषणाओं का उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध
संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह माताओं और बहनों की आस्था,
प्रेम और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कमल सखी परिवार
के आयोजन को संस्कृति और परंपराओं को सहेजने तथा समाज में आत्मीयता बढ़ाने वाला
आयोजन बताया। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीजा
तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का
प्रतीक है। यह पर्व महिलाओं के जीवन में विशेष महत्व रखता है। राज्य सरकार महिलाओं
के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर
कार्य कर रही है। तीजा जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को
सहेजने का संदेश देते हैं। बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने कहा कि तीजा
छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति से जुड़ा पर्व है। इसमें माताओं और बहनों की आस्था,
त्याग और पारिवारिक प्रेम की सुंदर झलक दिखाई देती है। उन्होंने
आयोजन को हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया।
इस अवसर पर संभागायुक्त श्री सुनील जैन, कलेक्टर
श्री संजय अग्रवाल, एसएसपी श्री रजनेश सिंह, नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला
पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल उपस्थित थे। तीजा तिहार के इस भव्य आयोजन में झूले,
मेहंदी, भोजन और उपहार विशेष आकर्षण का केंद्र
रहे। माताओं-बहनों के साथ बच्चों ने भी उत्साह से विभिन्न गतिविधियों का आनंद
लिया। गीत-संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और उत्सवी माहौल ने
बहतराई स्टेडियम को छत्तीसगढ़ी संस्कृति और तीजा की खुशियों से सराबोर कर दिया।