रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं और विभागीय सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ मछली पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।
जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला
विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को अपनी आजीविका का आधार
बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। शासकीय तालाबों के
दीर्घकालीन पट्टे, विभागीय तकनीकी
मार्गदर्शन और समूह की महिलाओं की मेहनत ने मछली पालन को उनके लिए आय का मजबूत
जरिया बना दिया है।
भभरी
में तालाब बना समृद्धि का माध्यम
जशपुर जिले के विकासखंड मनोरा के
ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से ग्राम
पंचायत के 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल
वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के माध्यम से मछली
पालन कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और विभागीय मार्गदर्शन से
मछली पालन को सफल आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित किया है।
समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3
क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे
करीब 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इस
आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे घरेलू जरूरतों
के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों
को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।
सिमड़ा
की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा
में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800
हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं।
समूह ने संगठित प्रयासों और निरंतर मेहनत से इस गतिविधि को आय के प्रभावी साधन में
बदल दिया है।
समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3.30
क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे
लगभग 6.93 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है।
इससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना
में अधिक मजबूत हुई हैं।
शासकीय
योजनाओं ने खोले आत्मनिर्भरता के नए रास्ते
महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय
तालाबों का पट्टा उपलब्ध कराने, तकनीकी
मार्गदर्शन देने और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए
आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। मछली पालन से प्राप्त आय ने महिलाओं को परिवार
की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर दिया है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले
आय के सीमित साधनों के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। मछली पालन शुरू
करने के बाद नियमित आय का माध्यम मिला और अब वे स्वयं अपनी आजीविका गतिविधियों का
संचालन करने के साथ आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
अन्य
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
कमल महिला स्व-सहायता समूह और दीप
महिला स्व-सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी
लाभ, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन
मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज इन समूहों की
महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की स्थानीय
अर्थव्यवस्था को गति देने में भी योगदान दे रही हैं।