रायपुर : डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी कर 25 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज लंबे समय से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि प्रत्येक बार खांसने पर लगभग 50 से 70 एमएल तक खून निकल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी।
अस्पताल के हार्ट,
चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने
बताया कि अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर
सर्जरी विभाग में छाती एवं फेफड़ों के अधिकांश ऑपरेशन उन्नत तकनीक से की जा रही
है। अभनपुर के पास चटौद निवासी 25 वर्षीय युवक को पिछले लगभग
10 वर्षों से खांसी के साथ बलगम में खून आने की शिकायत थी।
प्रारंभ में यह समस्या कम थी, लेकिन पिछले एक माह से लगातार
बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई तथा हर बार खांसने पर
अत्यधिक मात्रा में खून आने लगा।
मरीज ने पूर्व में टीबी की दवाइयों
का सेवन भी किया था तथा उपचार के लिए कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया,
लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जांच के दौरान मरीज का सीटी स्कैन कराया
गया, जिसमें दाएं फेफड़े के निचले हिस्से (लोअर लोब) में
बड़ी कैविटी बनने एवं उसमें एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण होने की पुष्टि हुई। यह
बीमारी सामान्यतः टीबी से पीड़ित मरीजों में देखने को मिलती है।
सीटी स्कैन रिपोर्ट का परीक्षण करने
के बाद डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक था।
इस सर्जिकल प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी (लोअर लोब ऑफ राइट लंग) कहा
जाता है, जिसमें फेफड़े के
संक्रमित हिस्से को काटकर निकाला जाता है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क
सर्जरी की श्रेणी में आता है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान
फेफड़ों की प्रमुख रक्त वाहिनियों- पल्मोनरी आर्टरी एवं पल्मोनरी वेन, को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है।
परिजनों की सहमति मिलने के बाद मरीज
का अगले ही दिन आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक लंग
स्टेपलर गन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे
ऑपरेशन के बाद एयर लीक जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो सके। सफल सर्जरी के बाद मरीज
की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर
अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह संपूर्ण उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत
निशुल्क किया गया।
डॉ. साहू ने बताया कि खांसी के साथ
खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमोप्टाइसिस कहा जाता है। इसके प्रमुख
कारणों में फेफड़ों की टीबी, फेफड़ों
का कैंसर, पल्मोनरी एवी मालफॉर्मेशन, ब्रोंकाइटिस
तथा अन्य गंभीर फेफड़ा संबंधी रोग शामिल हैं।
पंडित नेहरू चिकित्सा
महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने समन्वित प्रयास
करते हुए समय पर सफल सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। भविष्य में भी हमारा
संस्थान इसी प्रकार मरीजों को बेहतर, सुलभ एवं उन्नत
स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
अम्बेडकर अस्पताल के
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन का निरंतर यह
प्रयास रहा है कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय एवं
निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए और इस दिशा में हमें सफलता भी मिल रही है। वर्तमान
में इस योजना से कई मरीज लाभांवित भी हो रहे हैं।