रायपुर : आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI), नवा रायपुर द्वारा 13–14 मार्च 2026 को आयोजित आदि परब–2026 कार्यक्रम “From Tradition to Identity” थीम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और वन आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न
जिलों से आए प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं,
अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में आगंतुकों ने भाग लिया। इस आयोजन में
जशपुर जिले के ब्रांड जशप्योर द्वारा भी स्टॉल लगाया
गया, जिसे आगंतुकों, अधिकारियों और
विशेषज्ञों से व्यापक सराहना प्राप्त हुई। स्टॉल पर प्रदर्शित उत्पादों की उच्च
गुणवत्ता, पारंपरिक प्रसंस्करण पद्धति और प्रीमियम पैकेजिंग
को लेकर लोगों ने विशेष रुचि दिखाई।
स्टॉल का मुख्य आकर्षण महुआ आधारित
उत्पाद रहे। बड़ी संख्या में आगंतुकों ने महुआ के पारंपरिक उपयोगों के साथ-साथ उसे
पोषण से भरपूर एक प्राकृतिक सुपरफूड के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की सराहना
की। जय जंगल द्वारा महुआ को केवल
पारंपरिक मद्य से जोड़कर देखने की धारणा से बाहर निकालते हुए उसे स्वास्थ्य,
पोषण और पारंपरिक खाद्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने का प्रयास
लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता दिखाई दिया।
जशप्योर,
जशपुर जिले से शुरू हुई एक पहल है, जिसका
उद्देश्य जंगल और जनजातीय समुदायों से जुड़े पारंपरिक खाद्य संसाधनों को
सम्मानपूर्वक मुख्यधारा तक पहुँचाना है। यह पहल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु
देव साय की दूरदर्शी सोच से प्रेरित है जिसमें महुआ को
केवल शराब तक सीमित न रखकर उसे पोषण, स्वास्थ्य और जनजातीय
आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।
आदि परब–2026
में जशप्योर का प्रतिनिधित्व अनिश्वरी भगत एवं प्रभा साय द्वारा
किया गया, जिन्होंने आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं,
पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों तथा महुआ के पोषण महत्व के बारे में
जानकारी दी। स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों के बारे में विस्तार से
जानकारी ली और जशपुर से जुड़ी इस पहल की सराहना की।
जशप्योर के माध्यम से महुआ,
मिलेट्स और पारंपरिक रूप से संसाधित चावल जैसे उत्पादों को आधुनिक
उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें
जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पहल न केवल पारंपरिक खाद्य
प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को
भी सशक्त बना रही है।