रायपुर : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तीकरण का प्रतीक है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से महिला शक्ति, सामाजिक एकता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां ग्रामीण महिलाओं ने अपने सामूहिक प्रयास से न केवल कुपोषण के खिलाफ लड़ाई छेड़ी है, बल्कि समाज में सहयोग, समर्पण और आत्मनिर्भरता का एक नया उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।
समूहों ने उठाया स्वस्थ
शिशु का जिम्मा
बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में
ज्योति महिला स्व-सहायता समूह और माँ शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘कोरिया मोदक’ नामक पौष्टिक लड्डू तैयार कर रही हैं,
जिन्हें गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस अभिनव पहल से जिले में कम वजन वाले शिशुओं के जन्म की समस्या को कम करने में
उल्लेखनीय सफलता मिली है।
सामाजिक सदभाव की मिठास
इस पहल की एक और खास बात यह है कि
इसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय
की महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं। अलग-अलग धर्म, जाति और
समुदाय से आने वाली महिलाएं जब एक साथ बैठकर इन पौष्टिक लड्डुओं का निर्माण करती
हैं, तो वह केवल पोषण नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे
का संदेश भी समाज तक पहुंचाती हैं।
समस्या से समाधान तक का
सफर
कोरिया जिले में लंबे समय से कम वजन
वाले नवजात शिशुओं के जन्म की समस्या चिंता का विषय रही है। गर्भावस्था के दौरान
पर्याप्त और संतुलित पोषण न मिलने के कारण माताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
पड़ता था और नवजात शिशुओं का जन्म वजन भी कम होता था।
कम समय में असरदार व
सकारात्मक परिणाम
इसी चुनौती से निपटने के लिए फरवरी 2025 में ‘कोरिया मोदक’ पहल की शुरुआत की गई। राज्य के
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार कुपोषण उन्मूलन की दिशा में जिला
प्रशासन ने विशेष प्रयास किए। जिले की कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी के
मार्गदर्शन में जिला खनिज न्यास निधि के माध्यम से इस अभिनव योजना को लागू किया
गया। यह पहल स्थानीय संसाधनों और महिलाओं की भागीदारी पर आधारित एक ऐसा मॉडल बनकर
उभरी है, जिसने कम समय में ही सकारात्मक परिणाम देना शुरू कर
दिया है।
मातृ पोषण को मिला नया
आधार
इस योजना के अंतर्गत गर्भावस्था के
पांचवें माह से लेकर प्रसव तक गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन दो पौष्टिक ‘कोरिया मोदक’ लड्डू दिए जाते हैं। इन लड्डुओं को
मौसम और उपलब्धता के आधार पर रागी, सत्तू, गुड़, मूंगफली, तिल, चना, जौ और घी जैसी पौष्टिक सामग्री से तैयार किया
जाता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध इन खाद्य पदार्थों के उपयोग से तैयार यह लड्डू
स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आयरन, प्रोटीन और ऊर्जा का समृद्ध
स्रोत बन गया है।
समन्वय व संवेदनशीलता
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं,
पोषण संगवारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के सहयोग से यह
सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला को नियमित रूप से इन
लड्डुओं का लाभ मिल सके। इसके साथ ही घर-घर जाकर महिलाओं को इनके सेवन के लिए
प्रेरित भी किया जा रहा है, जिससे मातृ पोषण के प्रति
जागरूकता भी बढ़ रही है।
सकारात्मक परिणामों ने
बढ़ाया भरोसा
‘कोरिया मोदक’ पहल के प्रभाव से जिले में मातृ और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय
सुधार देखने को मिला है। इस पहल के परिणामस्वरूप कम जन्म वजन वाले शिशुओं के
मामलों में लगभग 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं 95.9
प्रतिशत नवजात शिशुओं का जन्म वजन 2.5 किलोग्राम
से अधिक पाया गया है, जो बेहतर मातृ पोषण का स्पष्ट संकेत
है। इसके अलावा 100 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का प्रारंभिक
एएनसी पंजीयन और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया गया है। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक कम वजन वाली गर्भवती महिलाओं में संतोषजनक वजन वृद्धि
दर्ज की गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि यदि स्थानीय
स्तर पर सही रणनीति और सामुदायिक भागीदारी के साथ प्रयास किए जाएं,
तो कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा
सकता है।
महिलाओं को मिला आर्थिक
सशक्तीकरण
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी
है कि इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तीकरण का अवसर मिला है। ज्योति और माँ
शारदा स्व-सहायता समूह की लगभग 22 महिलाएं
प्रतिदिन 5,000 से 6,000 ‘कोरिया मोदक’
लड्डू तैयार कर रही हैं। अब तक 18 लाख से अधिक
लड्डू वितरित किए जा चुके हैं। इस कार्य से प्रत्येक महिला को प्रतिमाह लगभग 10
से 12 हजार रुपये की आय हो रही है। यानी एक
वर्ष में उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इससे महिलाओं को
आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सम्मानजनक आजीविका का अवसर भी मिला है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली
पहचान
‘कोरिया मोदक’ पहल की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। इस अभिनव मॉडल की
प्रशंसा नीति आयोग ने भी की है। आयरन और प्रोटीन से भरपूर ये लड्डू गर्भवती
महिलाओं में एनीमिया कम करने और नवजात शिशुओं के कम वजन की समस्या को दूर करने में
प्रभावी साबित हो रहे हैं। इस पहल को नीति आयोग की ‘स्पेरियेशनल
टाइम्स’ न्यूज़लेटर में स्थान मिला है और इसे आकांक्षी जिला
एवं ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत एक स्केलेबल बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में भी सराहा
गया है।
स्वस्थ भविष्य की ओर
बढ़ता एक प्रेरक कदम
कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी के
अनुसार, प्रदेश के मुख्यमंत्री
विष्णु देव साय की मंशानुसार जिले की गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध
कराने के लिए यह नवाचार शुरू किया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और मजबूत बन
सके। ग्राम आनी में हर धर्म, वर्ग और समुदाय की महिलाएं
मिलकर ‘कोरिया मोदक’ तैयार कर रही हैं।
समूह से जुड़ी महिलाओं यास्मीन, सविता सिंह, नेहा तिर्की और प्रभा का कहना है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वे आने
वाली पीढ़ी को जन्म से पहले ही स्वस्थ और मजबूत बनाने में योगदान दे रही हैं।
निस्संदेह,
‘कोरिया मोदक’ केवल एक लड्डू ही नहीं बल्कि
पोषण, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक एकता की मजबूत नींव बन
चुका है। कोरिया जिले की यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी
एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।