भारतीय संस्कृति का इतना बड़ा स्वरूप है कि उसे किसी बाहरी प्रचारक की आवश्यकता नहीं : स्वामी विवेकानंद

०० संस्कृति भवन में शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन के अवसर पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन

०० शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन कार्यक्रम का संचालन गौरी शंकर श्रीवास ने किया

रायपुर| स्वामी विवेकानंद स्टडी सर्कल के तत्वावधान ने संस्कृति भवन में शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन के अवसर पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया था जिसमें बतौर वक्ता संतोष तिवारी हिंदू विचारक (साउथ अफ़्रीका ) डाक्टर प्रोफ़ेसर अजय चंद्राकर जी ,हरजोत सैलानी मो फ़ैज़ खान शरीक हुए। व्याख्यान के दौरान संतोष तिवारी ने कहा कि आज देश के सामने आज बड़ी बड़ी चुनौतिया है और भारत वर्ष विश्व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अपने मूल सिद्धांत के चलते आज विश्व में अपना ध्वज लहरा रहा है देश विरोधी ताकते लगातार सर उठाने के लिए आतुर है लेकिन स्वामी जी के सिद्धांत और सनातन धर्म की बहुलता के चलते सारी योजनाएँ विफल हो रही है।

दुर्गा कालेज के प्रोफ़ेसर डॉक्टर अजय चंद्राकर ने अपने उद्बोधन में विश्व की राजनीति और स्वामी विवेकानंद के विश्व बंधुत्व के उद्बोधन पर प्रकाश ड़ाला कार्यक्रम को सिख समाज से हरजोत सैलानी एवं फ़ैज़ खान ने सम्बोधित किया इस अवसर पर कुणाल शर्मा रमेश पटेल दलविंदर बेदी उदय कोटेचा अरशद खान  ,अमित राय चौधरी,हरविंदर सिंह ,अरिहंत जैन, आकाश कश्यप, ऋषभ दत्त दुबे, अभिषेक शुक्ला ,सिध्दहांतशर्मा अजय अटपट्टू ,सचिंदर पासवान ,समेत युवा छात्र शरीक हुए कार्यक्रम का संचालन गौरी शंकर श्रीवास ने किया आभार करुणानिधि यादव ने प्रकट किया।

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