मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. भारतीदासन ने किया बस्तर में पपीते की सामूहिक खेती का मुआयना

00 पपीता उत्पादक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मिले और उनकी मेहनत को सराहा
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टन पपीते के उत्पादन एवं विक्रय से समूह को 5 लाख का मुनाफा
रायपुर। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. एस. भारतीदासन आज बस्तर दौरे के दौरान तीरथगढ़ पहुंचकर वहां महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा आधुनिक तरीके से की जा रही पपीते की सामूहिक खेती का मुआयना किया। समूहों की महिलाओं से मुलाकात की। पपीते की सफल खेती के लिए उनकी लगन और मेहनत को सराहा। डॉ. भारतीदासन ने स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि आप सबने सामूहिक खेती की मिसाल कायम की है। महिला स्व-सहायता समूह की सचिव श्रीमती हेमा और सदस्य फूलाबाई ने चर्चा के दौरान कहा कि शासन-प्रशासन से उन्हें पपीते की सामूहिक खेती के लिए न सिर्फ मार्गदर्शन मिला, बल्कि हर संभव मदद मिली है। शासन द्वारा तीरथगढ़ में 10 एकड़ शासकीय भूमि 8 महिला स्व-सहायता समूहों को पपीते की सामूहिक खेती के लिए उपलब्ध कराई गई। विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। जिला प्रशासन ने फेंसिंग एवं पौधों के रोपण से लेकर सिंचाई तक इंतजाम किया। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि हम महिला समूहों को आगे बढ़ने के लिए एक नई राह मिली है। समूह से जुड़ी महिलाओं के आग्रह पर विशेष सचिव ने इस मौके पर उनके द्वारा उत्पादित पपीते का स्वाद चखा और सराहना की।
समूह की महिलाओं ने बताया कि वे पहले दूसरों के यहां रोजी-मजदूरी किया करती थीं, किन्तु अब वे यहां स्वयं के लिए कार्य कर रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास जगा है। महिला समूह की सचिव श्रीमती हेमा ने बताया कि पपीते की सामूहिक खेती 8 महिला स्व-सहायता समूह मिलकर कर रहे है। समूहों से 42 महिलाएं जुड़ी हुई है। जनवरी 2021 में 10 एकड़ भूमि में पपीते के कुल 5500 पौधों का रोपण किया गया था। छह महीने बाद जुलाई 2021 में पपीते की तुड़ाई शुरू हो गई थी। अब तक 52 टन पपीते की तोड़ाई एवं विक्रय किया जा चुका है। इससे समूह को लगभग 5 लाख रूपए का मुनाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि समूह के द्वारा उत्पादित पपीता दिल्ली भी बिकने के लिए जाने लगा है। दिल्ली में पपीते का सर्वाधिक रेट उन्हें 45 रूपए प्रति किलो की दर से मिला है। स्थानीय बाजार में अभी पपीता 22-23 रूपए किलो में बिक रहा है। बस्तर किसान कल्याण संघ द्वारा पपीते के विक्रय एवं परिवहन के लिए वाहन भी उपलब्ध कराया गया है। जिला प्रशासन द्वारा पपीते की पौधों की सुरक्षा के लिए चारों ओर फेंसिंग कराए जाने के साथ ही सिंचाई के लिए चार बोर कराकर ड्रिप सिस्टम लगाया गया है। सचिव डॉ. भारतीदासन ने बस्तर जिले के अत्यंत पिछड़े और दुर्गम क्षेत्र की महिलाओं द्वारा अत्याधुनिक तरीके से की जा रही पपीते की खेती और इसके जरिए रोजगार और मुनाफा अर्जित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाएं पपीते के उत्पादन और मार्केटिंग में पारंगत हो गई है, यह खुशी की बात है। उन्होंने बस्तर जिले में सामूहिक खेती को बढ़ावा मिले, इसके लिए समूहों एवं किसानों को प्रेरित और प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ऋचा चौधरी अन्य अधिकारी उपस्थित थे। उद्यानिकी विभाग के अधिकारी कुशवाहा ने खेती की तकनीक, अमीना प्रजाति के पपीते की उत्पादकता और आटोमेशन मशीन के माध्यम से फसल की देखरेख की जानकारी दी।

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