पर्यावरण शिक्षा में शिक्षकों की भूूमिका पर राष्ट्रीय ई-सम्मेलन आयोजित

रायपुर/दांतेवाड़ा| राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर पर विश्व पर्यावरण परिषद भारत द्वारा “पर्यावरण शिक्षा में शिक्षकों की भूूमिका” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनर का आयोजि किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न हिस्सों जैसे छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के पयाािरणविदों, शिक्षकों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विजय कुमार साहा, पद्मश्री श्याम संदुर पालीवाल और छत्तीसगढ़ प्राइवेट युनिवर्सिटी रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन डॉ शिव वरण शुक्ला जी के द्वारा शुभारंभ किया गया, जिसमें वे अपने अमूल्य विचार शिक्षा व पर्यावरण के सहसंबंध पर व्यक्त किए। वेबिनार के वक्ता सीआईईटी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद दिल्ली से डॉ यश पाल शर्मा, विश्व पर्यावरण परिषद अध्यक्ष प्रो गणेश चन्ना, छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा से आस्था विद्या मंदिर के शिक्षक अमुजुरी विश्वनाथ, बागबहरा से ग्रीन केयर सोसायटी इंडिया अध्यक्ष डॉ विश्वनाथ पाणिग्रही, आगरा से डॉ श्रीकांत कुलश्रेष्ठ, अमरोहा से डॉ राजन लाल, सचिव डॉ श्रीकान्त मेर्गु व अनमोल शर्मा अपने विचार व्यक्त करते हुए बोले की समाज में सुपरिवर्तन लाने में शिक्षकों की योगदान अद्वितीय व महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण व शिक्षा मौलिक अधिकार को मद्दे नजर रखते हुए शिक्षाविद् अमुजुरी विश्वनाथ ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्कूल शिक्षा व उच्च शिक्षा में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने की विचार रखे। देश को विकास और समाज सुधार के हिस्सों में शिक्षकों और शिक्षानुष्ठानों का विचारशक्ति तथा कार्यशैली मूल रूप है। भारतीय संस्कृति के परंपरा गुरु-शिष्य व शिक्षण ज्ञान से भारत को विश्व गुरु बनाने में कामयाब लाने की प्रयास करें।

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