दोषी पुरुष को बचाने की बजाए सजा दिलाने आगे आए महिलाए : डॉ किरणमयी नायक  

00 महिला आयोग में आज 20 प्रकरणों की सुनवाई
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बिना शादी के रहने पर कोई कानूनी अधिकार नहीं मिलते : डॉ. नायक
रायपुर। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने आयोग कार्यालय में आज 20 प्रकरणों पर सुनवाई की। इसमे 5 प्रकरणों को नस्तीबद्ध करते हुए बचे प्रकरणों को आगामी सुनवाई में रखा गया है।
आज सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में उभयपक्षो को सुना गया जिसमें अनावेदिका के पति को लेकर आवेदिका पर शक करती है, इस कारण से दोनो के मध्य विवाद है। अनावेदिका ने स्वीकार किया कि उसके पति की गलती है तथा उसने माफी भी मांगी और यह कहा कि वह अपने पति को नही छोड़ सकती। दोनो को समझाइश दी गई कि एक दूसरे के जीवन मे दखलंदाजी न करें। भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति होती है तो आवेदिका थाना में रिपोर्ट दर्ज कराए। दोषी पुरुष को सबक सिखाने की जगह अगर महिलाएं एक दूसरे से लड़ेगी तो इसका फायदा हमेशा पुरूष ही उठाते है। दोनो पक्षो को समझाइश के बाद इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। मानसिक प्रताड़ना के एक प्रकरण में सास आवेदिका है और बहू को अपने साथ रखने के लिए माह जुलाई में आयोग में आवेदन प्रस्तुत किया था। अनावेदिका बहु ने अपने पति और सास के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज करा चुकी है जिसपर धारा 155 के तहत न्यायालय जाने की सलाह दी गई। यह प्रकरण न्यायालय में प्रक्रियाधीन होने के कारण नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका और अनावेदक ने आपस मे विवाह नही किया है। उनका 13 साल का पुत्र है जो कि पहले आवेदिका के साथ रह रहा है। बच्चे के हित में इस प्रकरण में अनावेदक के खिलाफ कोई कार्यवाही किये जाने से बच्चे के भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा। आवेदिका स्वयं अपनी स्थिति का आंकलन कर चुकी है और वह जानती है कि बिना शादी के दोनो साथ रह रहे थे। इसलिए तलाक और भरण पोषण का कोई औचित्य नही है। दोनों को समझाइश दी गई कि एक दूसरे की जिंदगी में दखलंदाजी नही करेंगे और यदि कोई दुर्व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। इस तरह प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में आयोग द्वारा उभयपक्षो को समझाइश दिए जाने पर यह पता चला कि आवेदिका अनावेदक की बुजुर्ग मां के साथ मारपीट की है, जबकि आवेदिका का कथन है कि अनावेदक शराब पीकर अपनी मां को मारपीट कर रहा था। जिसे बचाने का प्रयास मेरे द्वारा किया गया। आयोग ने अनावेदक को आगामी सुनवाई में अपने माँ को लेकर उपस्थित होने कहा है। इसके साथ ही आयोग की समझाइश पर अनावेदक आवेदिका और बच्चे के भरण पोषण के लिए चार हजार रुपये प्रतिमाह देगा। इस प्रकरण के निराकरण के लिए आगामी सुनवाई में अनावेदक अपने माँ और आवेदिका अपने गवाह के साथ उपस्थित होंगे। एक अन्य प्रकरण में उभयपक्ष साथ रहने तैयार नहीं है। आवेदिका का शैक्षणिक दस्तावेज ससुराल में है जिसे लाने के लिए अनावेदक ने समय की मांग की है। इस तरह इस प्रकरण को अगली सुनवाई में रखा जाकर निराकृत किया जायेगा।एक अन्य प्रकरण में मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण नस्तीबद्ध किया गया है साथ ही आवेदिका ने आयोग के समक्ष यह स्वीकार किया कि वह दूसरी शादी कर ली है।

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