स्वतंत्रता दिवस- 2021 : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का स्वतंत्रता दिवस पर जनता के नाम संदेश

०० भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों का अभिवादनअभिनंदन करता हूं।

०० सुराजी तिहार के पावन बेरा म हमर जम्मो सियानदाई-दीदीसंगवारी अउ नोनी-बाबू मन ल गाड़ा-गाड़ा बधाई।

15 अगस्त 1947 को हमें आजादी मिली थी और आज के दिन हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। यह हम सबके लिए बहुत सौभाग्य की बात है। भारत ने दो शताब्दी से अधिक समय तक अंग्रेजों की प्रताड़ना और उनका शासन सहा है। गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए भारत माता के हजारों-हजार सपूतों और सुपुत्रियों ने अपना सर्वस्व त्याग किया। हंसते-हंसते बलि-वेदी पर चढ़ गए। उन वीरों को याद करते ही हमारी नसों में अपने महान पुरखों का खून उबलने लगता है और उन सबके त्याग के बारे में सोचकर आंखें नम हो जाती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ ही एक के बाद एक हजारों चेहरे नजरों के सामने आने लगते हैं। अमर शहीद गैंदसिंहवीर नारायण सिंहमंगल पाण्डेभगत सिंहचन्द्रशेखर आजादरामप्रसाद बिस्मिलअशफाक उल्ला खांरानी दुर्गावतीरानी लक्ष्मी बाईवीरांगना अवंति बाई लोधीलाल-बाल-पालडॉ. राजेन्द्र प्रसादडॉ. भीमराव अम्बेडकरलाल बहादुर शास्त्रीनेताजी सुभाष चन्द्र बोससरदार वल्लभ भाई पटेलमौलाना अबुुल कलाम आजाद जैसे नामों का एक कारवां बनता चला जाता है।

हमारे छत्तीसगढ़ के वीर गुण्डाधूरपं. रविशंकर शुक्लठाकुर प्यारेलाल सिंहबाबू छोटेलाल श्रीवास्तवडॉ. खूबचंद बघेलपं. सुंदरलाल शर्माडॉ. ई.राघवेन्द्र रावक्रांतिकुमारबैरिस्टर छेदीलाललोचन प्रसाद पाण्डेययतियतन लालमिनीमाताडॉ. राधाबाईपं. वामनराव लाखेमहंत लक्ष्मीनारायण दासअनंतराम बर्छिहामौलाना अब्दुल रऊफ खानहनुमान सिंहरोहिणी बाई परगनिहाकेकती बाई बघेलश्रीमती बेला बाई जैसे अनेक क्रांतिवीरों और मनीषियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज मैं एक बार फिर इन सभी को सादर नमन करता हूं। भारत में सामाजिक सौहार्द्रनागरिकों के बीच एकता और देश की अखण्डता को बचाए रखने के लिए भी अनेक सपूतों ने कुर्बानी दी। उत्तरप्रदेश में गणेश शंकर विद्यार्थी शहीद हुए थेउन्हीं मूल्यों और सिद्धांतों के लिए महात्मा गांधीश्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी शहीद हुए। शहादत की यह परंपरा इतनी विस्तृत है कि हर प्रदेश मेंऐसी हस्तियों की यादें समाई हुई हैंजिन्हें सिर्फ आज के दिन ही नहीं बल्कि हर दिन याद करने और उनके बताए रास्ते पर चलने की जरूरत है। देश की सीमाओं की चौकसी करने वाले सैनिकों और देश के भीतर सुरक्षा बलों में काम कर रहे लाखों जवानों को भी मैं नमन करता हूंमोर्चों पर जिनकी मौजूदगी से हम सुरक्षित महसूस करते हैं।

75वां स्वतंत्रता दिवस एक ऐसा पड़ाव हैजहां पर खड़े होकर हमें अपनी विरासत पर गर्व भी होता है और जिसके आगे नवा भारत’ गढ़ने की जिम्मेदारी भी हमें उठानी है। मुझे खुशी है कि अपनी धरोहर का सम्मान करते हुए हमने नवा छत्तीसगढ़’ गढ़ने का जो अभियान पौने तीन वर्ष पहले शुरू किया थाउसका असर न सिर्फ हमारे प्रदेश में दिख रहा हैबल्कि नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने के हमारे प्रयासों ने पूरे देश में भी एक नई उम्मीद जगाई है। मुझे यह कहते हुए भी बहुत खुशी हो रही है कि विकास का छत्तीसगढ़ मॉडल’ वास्तव में आजादी के दीवानों के सपनों को साकार कर रहा है। विकास की हमारी समझउन मानवीय मूल्यों से प्रेरित हैजो आजादी के आंदोलन की बुनियाद थे। आइएएक बार फिर याद करें हमारे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अमर वचन। सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने कहा था-हिंसक तरीकों से हमेशा हिंसक आजादी ही मिलेगी और यह भारत तथा दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करेगी। शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा था- हमारे व्यक्तियों को कुचलकर वे हमारे विचारों को नहीं मार सकते। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था- हमारे बलिदान और मेहनत से जो स्वतंत्रता मिलती हैउसे हम अपनी सामर्थ्य से बचाकर रख सकते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था-हमें मानवता को उन नैतिक जड़ों तक वापस ले जाना चाहिएजहां से अनुशासन और स्वतंत्रता दोनों का जन्म होता है। लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था- आजादी की रक्षा करना केवल सैनिकों का ही काम नहीं बल्कि पूरे देश को मजबूत होना होगा। और प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने पहले भाषण में कहा था-जब तक लोगों की आंखों में आंसू हैं तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा। मैं कहना चाहता हूं कि हमारे पुरखों और महान नेताओं के संदेश में इतनी ताकत थी कि उनसे हमारे देश के संस्कार गढ़े गए। उन्हीं संस्कारों की बदौलत हम नवा छत्तीसगढ़’ गढ़ रहे हैं। सत्यअहिंसाशांतिकरुणासंवेदनशीलतागरीबों के आंसू पांेछना और कमजोर तबकों को शक्ति देना ही हमारी पहली प्राथमिकता है। भाइयों और बहनोंछत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह सुअवसर मिला था कि राज्य के हर हिस्से में विकास के असंतुलन को समाप्त कर दिया जाएलेकिन विडम्बना है कि इस दिशा में सही सोच के साथ सही प्रयास नहीं किए गए। हमने देखा कि ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से इन अंचलों में तेजी से विकास किया जा सकता हैजिससे गांवों और शहरों के बीच बन गई गहरी खाई को पाटा जा सके। यह भी एक विडम्बना ही रही कि वन अधिकार अधिमान्यता पत्र वितरण से आदिवासी और परंपरागत वन निवासी समुदायों को जमीन का जो अधिकार मिल सकता थावह भी सही ढंग से नहीं  दिया गया। हमने न्याय की शुरुआत इसी मुद्दे से की थी। आज मुझे यह कहते हुए खुशी है कि हमने मात्र पौने तीन वर्षों में एक ओर जहां निरस्त दावों की समीक्षा करके बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र दिएवहीं दूसरी ओर 44 हजार से अधिक सामुदायिक और हजार 500 से अधिक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र दिए हैं। इतना ही नहींनगरीय क्षेत्रों में भी वन अधिकार पत्र देने वाला अग्रणी राज्य हमारा छत्तीसगढ़ बन गया है। लोहंडीगुड़ा के बाद स्थानीय लोगों को अपनी जमीन का हक दिलाने की यह एक बड़ी मिसाल है। इतना ही नहींअब वन अधिकार की जमीनों पर धान उपजाने या वृक्ष लगाने वाले लोगों को भी राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ और मुख्यमंत्री वृ़़क्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ से जोड़ा गया है। आदिवासी और वन आश्रित परिवारों के जीवनयापन का सबसे बड़ा सहारा वनोपज हैलेकिन पहले तेन्दूपत्ता संग्राहकों को मात्र हजार 500 रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक दिया जाता थाजिसे हमने बढ़ाकर हजार रुपए किया। पहले मात्र लघु वन उपजों को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता था। हमने 52 लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की है। इनमें से 17 उपजों की दरें हमने बढ़ाई। इस तरह से 500 करोड़ रुपए से अधिक सालाना अतिरिक्त आमदनी हमारे आदिवासी एवं वन आश्रित परिवारों को प्राप्त हो रही है। भारत सरकार द्वारा की गई विस्तृत समीक्षा के हवाले से मैं सिर्फ एक उदाहरण देना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ ने बीते दो वर्षों में हजार 173 करोड़ रुपए की लघु वनोपज खरीदी हैजो कि देश में कुल खरीदी का 74 प्रतिशत है। भारत सरकार ने वन-धन तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की तो पाया कि छत्तीसगढ़ 10 मापदण्डों में देश में अग्रणी है। इतना ही नहीं 15 महिला स्वसहायता समूहों को भी वनोपज के कामकाज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया गया है। हम जिस बदलाव की बात करते थेउसकी तस्दीक अब राष्ट्रीय स्तर पर हो रही हैजिसके लिए मैं वन क्षेत्रों में रहने वाले सभी भाइयों-बहनोंस्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाओं और युवा साथियों को बधाई देता हूं कि स्वावलम्बन की दिशा में उन्होंने बड़ी मजबूती से अपने कदम आगे बढ़ाए हैं। स्थानीय संसाधनों और परंपरागत कौशल को निखारकर जनता के आर्थिक-सामाजिक सशक्तीकरण के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैंजिसके तहत अब रजककार विकास बोर्ड’, ‘लौह शिल्पकार विकास बोर्ड’, ‘तेलघानी विकास बोर्ड’, ‘चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड’ जैसी संस्थाओं का गठन किया जा रहा है। जब हम विषमताएं मिटाने की बात करते हैं तो किसान और ग्रामीण जन-जीवन से जुड़ी आजीविका के साधन पर हमारा ध्यान सबसे पहले जाता है। हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के माध्यम से जो शुरुआत की थीउसे अब न्याय देने की दीर्घकालीन व्यवस्था में बदल दिया है। यहां तक कि धान तथा धान के बदले अन्य निर्धारित फसलें और वृक्ष लगाने पर भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा। इस पहल के बाद गांव-गांव से विविध फसलें तथा वृक्षारोपण की खबरें आनी शुरू हो गई हैंजो वन और ग्रामीण अंचलों में आर्थिक मजबूती का शुभ संकेत है। मैं बार-बार कहूंगा कि छत्तीसगढ़ के किसानों की जान धान में बसती हैइसलिए हमने धान खरीदी को भी न्याय का मुद्दा बनाया। विगत एक वर्ष में 263 नए धान खरीदी केन्द्र खोले गए और 20 लाख 53 हजार किसानों से 92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर की गई। इस तरह से किसानों को समर्थन मूल्य के हिसाब से 17 हजार 240 करोड़ रुपए का भुगतान किया गयाजो छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक सबसे बड़ा कीर्तिमान है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के तहत पहले वर्ष में हजार 628 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि समर्थन मूल्य पर धान सहित विभिन्न फसलें बेचने वाले किसानों को दी गई है। योजना के दूसरे वर्ष में भी पहली किस्त के रूप में 1500 करोड़ रुपए से अधिक राशि दी जा चुकी हैऔर मेरा वादा है कि इस वर्ष भी हजार 703 करोड़ रुपए की राशि चार किस्तों में दी जाएगी। किसानों को न्याय दिलाने के रास्ते पर आने वाली हर बाधा काहम न केवल सामना करेंगे बल्कि जीतेंगे भीयह मेरा परम विश्वास है। पहले हमने नवम्बर 2018 की स्थिति में 17 लाख से अधिक किसानों की लंबित सिंचाई जलकर राशि 244 करोड़ रुपए माफ किए थे और अब एक बार फिर 30 जून 2020 तक लंबित सिंचाई जलकर की राशि लगभग 80 करोड़ रुपए माफ करने का निर्णय लिया है। सुराजी गांव योजना’ के माध्यम से नरवा-गरुवा-घुरुवा-बारी’ के संरक्षण और विकास में मिल रही सफलता मील का पत्थर है। इसके विस्तार में गोधन न्याय योजना’ से गौवंश के संरक्षणगौठान की गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला है। जब गोबर के कामकाज से बरसने वाला धनसवा सौ करोड़ रुपए के पार हो गया है तो आज मैं यह कहना चाहता हूं कि हमने गोबर को गोधन बनाकर दिखा दिया है। मैं दावे के साथ कहता हूं कि गोधन ग्रामीण व शहरी जरूरतमंद तबकों के लिए वरदान साबित होगा। वर्मी कम्पोस्टसुपर कम्पोस्टसुपर कम्पोस्ट प्लस जैसे नए उत्पाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि के सूत्रधार बन रहे हैं। इस सफलता से यह विश्वास हो गया है कि हम छत्तीसगढ़ की माटी को जहरीले रसायनों से आजादी दिलाने में भी सफल होंगे और अच्छे पोषणयुक्त खाद्यान्नों के उत्पादन में भी नया मुकाम हासिल करेंगे। मैं बहुत विनम्रता और भरे हुए दिल से कहना चाहता हूं कि भूमिहीन कृषि मजदूरों की व्यथा को नहीं समझा जाना अमानवीयता की श्रेणी में आएगा। मुझे संतोष है कि देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सालभर होने वाले कार्यक्रमों में जब देश राष्ट्रीय पर्व का उल्लास मनाएगा तो उसमें हमारे छत्तीसगढ़ के वे मजदूर भी शरीक होंगेजिन्हें राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना’ का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत लगभग 10 लाख मजदूर भाई-बहनों को हजार रुपए सालाना अनुदान सहायता दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर निवासरत लोगों को उनकी काबिज जमीन का हक दिलाने के लिए स्वामित्व योजना’ प्रारंभ की जाएगी। भूमि स्वामित्व का अभिलेख मिलने पर बड़ी संख्या में लोग बैंकों से आवासीय ऋण तथा अन्य सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे। हर वर्ग के लोगों का अपनी जमीनअपना मकान और अपने सिर पर छांव का सपना जल्दी पूरा करने के लिए हमारी सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। छोटे भू-खण्डों की खरीदी-बिक्री और पंजीयन पर पूर्व में लगाई गई रोक एक तरह का अन्याय ही थाजिसे दूर करने के लिए हमने जनवरी 2019 को निर्णय लिया था। आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि इस फैसले से मध्यम और कमजोर तबकों के अनेक सपने साकार हुए हैं। इसके कारण लाख 28 हजार भू-खण्डों का पंजीयन कराया जा चुका है। जमीन की गाइडलाइन दरों में 30 प्रतिशत कमी को आगामी एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। आवासीय भवनों के क्रय पर पंजीयन शुल्क में प्रतिशत की छूट तथा महिलाओं के पक्ष में पंजीयन कराए जाने पर स्टाम्प शुल्क में प्रतिशत की अतिरिक्त छूट को भी जारी रखा गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के माध्यम से राजीव नगर आवास योजना’ लागू की गई है। विभिन्न आवासीय योजनाओं के हितग्राहियों को आर्थिक रियायतें दी गई हैं। राजस्व संबंधी कामकाज की जटिलता से जनता को राहत दिलाने के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं। आज मैं घोषणा करता हूं कि नामांतरण की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाएगा। हमने जो सार्वभौम पीडीएस का वादा किया थाउसे भी  प्राथमिकता से पूरा किया गया हैजिसके कारण अब प्रदेश में करोड़ 52 लाख लोगों को रियायती दर पर राशन सामग्री दी जा रही है और पीडीएस का कवरेज बढ़कर 99 प्रतिशत हो गया हैजो अपने आप में हर तबके को न्याय दिलाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता की मिसाल है। सुचारू वितरण के लिए विगत एक वर्ष में 737 नई उचित मूल्य दुकानें स्थापित की गई हैं तथा लाख नए सदस्यों के नाम राशन कार्डों में जोड़े गए हैं। कोरोना के कारण लॉकडाउन के दौरान जिन 58 लाख राशन कार्डधारियों को निःशुल्क चावल देना शुरू किया गया थायह क्रम नवम्बर 2021 तक जारी रहेगा। मेरा मानना है कि कुपोषित पीढ़ियों का निर्माण करना और उन्हें बीमारी व आर्थिक तंगी के भंवर जाल में छोड़ देनाहमारी बहनों और नवजात शिशुओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय था। मैं ईश्वर और प्रदेश की जनता को धन्यवाद देता हूं कि उनके आशीर्वाद से हमारी सरकार बनी और कुपोषण तथा एनीमिया से मुक्ति दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई। आज मुझे यह कहते हुए खुशी है कि मुख्यमंत्री सुपोषण योजना’ के कारण प्रदेश में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 प्रतिशत तक की कमी आ गई है। लॉकडाउन के दौरान इस अभियान को जारी रखना बहुत बड़ी चुनौती थीलेकिन अपने काम के प्रति समर्पित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने 51 हजार 583 केन्द्रों में दर्ज 26 लाख 27 हजार हितग्राहियों को घर पहुंच रेडी-टू-ईट’ सामग्री प्रदाय की और इस तरह संकट की घड़ी में भी अभियान को जारी रखा। मैं उन सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साधुवाद देता हूंजिन्होंने कोरोना संक्रमण के तूफान के बीच मुख्यमंत्री सुपोषण योजना’ का दीया बुझने नहीं दिया। हमने शुरूआत से ही मातृशक्ति को अधिकार और सुविधा सम्पन्न बनाने की रणनीति अपनाई हैजिसके तहत अनेक कदम उठाए गए हैं। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए मैं घोषणा करता हूं कि समस्त जिला मुख्यालयों एवं नगर-निगमों में एक उद्यान सिर्फ महिलाओं के लिए विकसित किया जाएगाजो मिनीमाता उद्यान’ के नाम से जाना जाएगा। नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन विभिन्न क्षेत्रों में न्याय की खुशखबरी लेकर आता है। पहले भी हमने नये अनुविभाग और 29  तहसीलें बनाई हैं। 25 तहसीलों के गठन का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा और आज मैं 18 नई तहसीलों के गठन की घोषणा करता हूं। प्रशासन की सुविधाओं को जनता के अधिक से अधिक निकट लाना हमारा प्रमुख लक्ष्य हैइसलिए मैंने मुख्यमंत्री बनने के माह के भीतर 15 अगस्त 2019 को गौरेला- पेण्ड्रा-मरवाही’ जिला बनाने की घोषणा की थी। नए जिले का शुभारम्भ भी माह के भीतर कर दिया गया था। आज मैं विकेन्द्रीयकरण के सिलसिले को और आगे बढ़ाते हुए जिलों का पुनर्गठन करते हुए चार नए जिलों मोहला-मानपुर’, ‘सक्ती’, ‘सारंगढ़-बिलाईगढ़’ तथा मनेन्द्रगढ़’ के गठन की घोषणा करता हंू। पूरी दुनिया में कोरोना महामारी के कारण जिन क्षेत्रों में कामकाज सर्वाधिक प्रभावित हुआ उनमें शिक्षा का क्षेत्र प्रमुख है। लेकिन छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को अनेक नवाचारों के जरिए निरंतर जारी रखा गया। कोरोना से शैक्षणिक सत्र को अवरुद्ध नहीं होने दिया गया। ऑनलाइन कक्षाएंपारा-मोहल्लों में कक्षाएं लगाकर पढ़ाई कराई गई। इतना ही नहीं शिक्षा की गुणवत्ता को शाला स्तर से बढ़ाने हेतु स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना’ के तहत 171 सरकारी स्कूलों का उन्नयन कर इन्हें सर्वसुविधायुक्त बनाया गया है। मुझे खुशी है कि हमारे प्रदेश के बच्चों ने अंग्रेजी मीडियम में शिक्षा की जोरदार ललक दिखाई है। इन स्कूलों में कुल लाख 36 हजार 500 बच्चों ने प्रवेश लिया हैजिसमें से 70 हजार बच्चे अंग्रेजी माध्यम के हैं तथा 66 हजार 500 बच्चे हिन्दी माध्यम के हैं। इस तरह शाला में अधोसंरचना उन्नयन का लाभ अंग्रेजी तथा हिन्दी दोनों माध्यमों के बच्चों को मिल रहा है। हम इस योजना को विकासखण्ड स्तर तक ले जाना चाहते हैं। हमने शिक्षकों का अभाव दूर करने के लिए भी ठोस प्रयास किए हैंजिसके रास्ते में आई बाधाओं को दूर करते हुए शासकीय स्कूलों में 14 हजार 580 शिक्षक-शिक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र देने का काम पूरा किया जा रहा है। वहीं महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकग्रंथपालक्रीड़ा अधिकारी आदि के हजार 440 पदों पर भी नियुक्ति देने का काम शीघ्र पूरा होगा। इस तरह हम शिक्षा जगत को अनिश्चय तथा आशंकाओं से मुक्ति दिलाते हुए प्रदेश में उद्देश्यपरक सार्थक शिक्षा का वातावरण बना रहे हैं। प्रचलित व्यवस्था के अनुसार प्रदेश के महाविद्यालयांे मेंस्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयु-सीमा का बंधन है। आज मैं उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने वाले युवाओं के हित में आयु-सीमा के इस बंधन को समाप्त करने की घोषणा करता हूं। इसी तरह डेढ़ दशकों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव दूर करनेउसे जरूरतमंद जनता तक पहुंचाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने को लेकर भी तदर्थवाद चल रहा था। हमने स्पष्ट प्राथमिकताएं तय कीं। तत्काल भवन बनाकर सुविधाएं जुटाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव होता हैलेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि सरकार पीड़ित जनता को अपने हाल पर छोड़ दे। इसलिए हमने गांवोंकस्बोंबसाहटोंपारा-मोहल्लों तक सुसज्जित चलित अस्पताल व शिविरों की सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था की। मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना’, ‘मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना’, ‘दाई-दीदी क्लीनिक’ जैसे नवाचारों का लाभ लाखों लोगों को मिला है। डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना’ तथा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ देश की सबसे बड़ी आर्थिक मददगार योजना सिद्ध हुई है। पौने तीन साल पहले तक बस्तर में मलेरिया का प्रकोप बहुत अधिक था। हमने मलेरियामुक्त बस्तर अभियान’ चलाया तो बीजापुर जिले में 71 प्रतिशत तथा दंतेवाड़ा जिले में 54 प्रतिशत मामले विगत एक वर्ष में कम हो गए। समूचे बस्तर में 45 प्रतिशत और समूचे सरगुजा संभाग में 60 प्रतिशत तक की कमी आई। इस तरह हमने अब मलेरियामुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ का शंखनाद किया है। मेरा विश्वास है कि हमारे समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों की बदौलत यह अभियान भी सफल होगा। हमने डॉक्टरों तथा अन्य सुविधाओं की कमी दूर करने हेतु प्राथमिकता से कदम उठाए हैंजिसके कारण ढाई वर्षों के अल्प समय में ही स्नातक चिकित्सकोंविशेषज्ञ चिकित्सकों तथा दंत चिकित्सकों की संख्या हजार 378 से बढ़कर हजार 358 पहुंच गई। इसी प्रकार विभिन्न स्तरों के मेडिकल स्टाफ की संख्या लगभग 18 हजार से बढ़कर 22 हजार हो गई। अस्पतालों में आईसीयू बिस्तरों की संख्या 279 से बढ़कर 729, एचडीयू बिस्तरों की संख्या शून्य थीजो अब बढ़कर 515 हो गईऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों की संख्या हजार 242 से बढ़कर हजार एक सौसामान्य बिस्तरों की संख्या 15 हजार से बढ़कर लगभग 30 हजारवेंटिलेटर्स की संख्या 204 से बढ़कर 723 हो गई। ऑक्सीजन सिलेण्डर और कन्सेंट्रेटर की संख्या तीन गुने से अधिक बढ़ गई है। प्रदेश की जनता को रियायती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री सस्ती दवा योजना’ नगरीय क्षेत्रों में लागू है। अब यह श्री धन्वन्तरी योजना’ के नाम से जानी जाएगी। हमारी संवेदनशीलता के साथ तत्काल निर्णय लेने की प्रक्रिया के चलते छत्तीसगढ़, ‘कोरोना’ से अन्य राज्यों की तुलना में कम प्रभावित हुआ। हम लगातार काम कर रहे हैं ताकि संभावित तीसरी लहर में भी छत्तीसगढ़ के लोगों को अधिक क्षति न पहुंचे। मैं आप लोगों से यह अपील करना चाहता हूं कि कोरोना’ को हल्के में न लें। कोरोना प्रोटोकॉल का हर स्तर पर पालन करें। भीड़ में न जाएंसही ढंग से मास्क पहनेंसाबुन से हाथ धोते रहें और टीके के दोनों डोज समय पर लगवाएं। किसी भी प्रकार की असावधानी नुकसानदेह होती है। संक्रमण से बचने का सबसे सुरक्षित उपाय सावधानी’ ही है। कोरोना’ से लड़ने वाले फ्रंट लाइन वारियर्स को मैं सलाम करता हूंवहीं कोरोना से प्रदेश के जिन लोगों की मृत्यु हुई हैउन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुएसमस्त शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। भाइयों और बहनोंहमने हर तरह की अधोसंरचना को व्यापक जनहित के नजरिए से देखा है कि अधूरे काम तेजी से पूरे हों और नए काम इस तरह से मंजूर किए जाएं जिससे अधिकाधिक लोगों को लाभ मिले। प्रदेश में 16 हजार करोड़ रूपए की लागत से सड़कों-पुल-पुलियों के निर्माण की कार्ययोजना बनाई गई है और स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है कि सारे काम दो साल में पूरे कर लिए जाएं। राम वन गमन पथ’ वास्तव में भगवान राम के वनवासी रूप के प्रकटीकरण का पथ है। इस महान मानवीय मूल्य को लोक आस्था के साथ जोड़ते हुए हजार 260 किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण करने का बड़ा लक्ष्य हमने रखा है और इसके प्रथम चरण का कार्य भी प्रगति पर है। बिजली के क्षेत्र में भी अधूरी पड़ी योजनाओं के कारण बहुत बड़ा निवेश जनहित में उपयोग नहीं हो पा रहा था और परियोजनाएं ठप्प पड़ी थीं। इसलिए हमने बिजली के क्षेत्र में भी प्राथमिकताएं तय की। हमने अति उच्च दाब पारेषण तंत्र की 500 करोड़ रुपए लागत की परियोजनाएंवितरण तंत्र की करीब हजार 700 करोड़ रुपए लागत की परियोजनाएं पूरी कराईजिसका लाभ अब विभिन्न क्षेत्रों को मिलने लगा है। अब नए सिरे से परियोजनाएं बनाई गई हैंजो प्रगति पर हैं। इनसे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में और अधिक सुधार तथा स्थायित्व आएगा। हाफ बिजली बिल योजना’ का लाभ 39 लाख 63 हजार लोगों को हजार 822 करोड़ रुपए की बचत के रूप में मिला है। निःशुल्क बिजली प्रदाय योजना का लाभ लाख किसानों तथा 18 लाख बी.पी.एल. उपभोक्ताओं को मिला है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारी बिजली कंपनियों में विभिन्न पदों पर हजार 500 से अधिक कर्मियों की भर्ती की जा रही हैजिसमें जूनियर इंजीनियर से लेकर मैदानी स्तर पर काम करने वाले लाइन अटेंडेंट के पद शामिल हैंछत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बिजली कंपनी में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नियमित भर्ती हो रही हैजिनमें छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को नियुक्ति दी जाएगी। इसमें से हजार 500 लाइन अटेंडेंट पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। शेष पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही हैशीघ्र ही उसके लिए भी विज्ञापन जारी किए जाएंगे। हमें विरासत में 18 हजार करोड़ रुपए लागत की अधूरी 543 सिंचाई परियोजनाएं मिली थींजिनमें से अब 138 परियोजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं और 405 का काम प्रगति पर है। 17 दिसम्बर 2018 के बाद हजार 657 करोड़ रुपए की लागत की 429 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैंजिनमें से 12 परियोजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं तथा 417 परियोजनाएं भी शीघ्रता से पूरी करने हेतु जोर दिया जा रहा है। मैं बताना चाहता हूं कि आगामी दो वर्षों में भाटापारा शाखा नहरप्रधानपाठ बैराजखरखरा मोहदीपाटजोंक व्यपवर्तन सिंचाई परियोजनाओं का लाभ भी मिलना शुरू हो जाएगा। जल जीवन मिशन’ के माध्यम से हम ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 39 लाख ग्रामीण घरों में वर्ष 2023 तक नल से शुद्ध पेयजल देने का काम पूरा हो जाए। भाइयों और बहनोंनिश्चित तौर पर हमारा लक्ष्य ग्रामीण तथा वन क्षेत्रोंकिसानों तथा वन आश्रित परिवारों को तेजी से विकसित कर सामान्य अंचलों के लोगों की बराबरी में लाना हैलेकिन हम विकास की किसी भी संभावना को छोड़ना नहीं चाहते और उसमें हर अंचल के स्थानीय लोगों की भागीदारी भी पूरी प्राथमिकता से बढ़ाना चाहते हैं। हमने स्पष्ट कहा है कि छत्तीसगढ़ के संसाधनों से राज्य में ही वेल्यू एडिशन के लिए जो भी व्यक्ति या संस्था आएंगेउन सबका हार्दिक स्वागत है। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि हमारी भावना निवेशकों तक सही अर्थों में पहुंची हैजिसके कारण विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 हजार 492 करोड़ रुपए के पंूजीनिवेश से हजार 145 नए उद्योग स्थापित हुए हैं और 28 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। मैं बताना चाहता हूं कि वृहद उद्योगों में 51 हजार करोड़ रुपए से अधिक पूंजीनिवेश करने के लिए बडे़ महत्वपूर्ण एमओयू भी हुए हैंजिनमें लगभग 72 हजार स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलना प्रस्तावित है। सरकारीअर्धसरकारीनिजीनगरीय-ग्रामीण-वन जैसे हर क्षेत्र में हमने नए रोजगार के अवसर बनाए हैं। नियमों को शिथिल करते हुए अनेक लोगों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को पुलिस में भर्ती किया गया है। विभिन्न उपायों से बेरोजगारी दर को 22 प्रतिशत से घटाकर प्रतिशत तक लाने में सफलता मिली हैयह एक स्वतंत्र एजेंसी का आकलन है। भाइयों और बहनोंमुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि छत्तीसगढ़ में बरसों से लंबित समस्याओं का हल इन पौने तीन वर्षों में हुआ है और अब प्रदेश की फ़िजा मंे हर ओर विकास के नए रंग उभरने लगे हैं। विरासत में मिली नक्सलवाद की समस्या पर अंकुश लगाने में मिल रही सफलता उत्साहवर्धक है। बस्तर फाइटर्स’ बटालियन के तहत हजार 800 नए पदों पर भर्ती की जाएगी। नक्सल प्रभावित जिलों में 63 सुदृढ़ पुलिस थाना भवनों का निर्माण किया जा रहा है। पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए कार्ययोजना मंजूर की गई है। डायल 112’ सेवा की उपयोगिता को देखते हुए इसका विस्तार अब पूरे प्रदेश में किया जाएगा। पुलिस बल को तनाव मुक्त रखने और जन-सरोकारों के लिए अधिक जागरूक करने हेतु कई कदम उठाए गए हैं जैसे-संकट निधिस्पंदनशहीद सम्मान निधिमेरिट स्कॉलरशिपथानों में संवेदना कक्षबाल मित्र कक्षमहिला हेल्प डेस्कराज्य साइबर थाना आदि। इस प्रकार हम पुलिस बल को नए तरीके से सजग और सुसज्जित कर रहे हैं। भाइयों और बहनोंयह एक विडम्बना ही है कि देश की आजादी के 75वें साल का उत्सव मनाते वक्त भी हमें कहीं न कहीं उन प्रवृत्तियोंउन प्रतिक्रियावादी ताकतों का मुकाबला करना पड़ रहा हैजो 1947 के समय उभार पर थीं। शांतिअहिंसा और साम्प्रदायिक सद्भाव की बुनियाद को कमजोर करने वाली ताकतों का पोषण कहां से होता हैयह बात समझना भी हमारी आजादी के मूल्यों को समझने के समान होगा। मैं स्वतंत्र भारत के महान संविधान के हवाले से कहता हूं कि सभी नागरिकों को सामाजिकआर्थिक और राजनैतिक न्यायविचारअभिव्यक्तिविश्वासधर्म और उपासना की स्वतंत्रताप्रतिष्ठा और अवसर की समताव्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता का रास्ता अपनानातब भी हमारी जरूरत थी और आज भी हमें इसकी जरूरत है। आज इस पावन तिरंगे की छांव में खड़े होकर हम एक बार फिर यह संकल्प लेते हैं कि गांधी-नेहरू-अम्बेडकर के रास्ते परसंविधान के सिद्धांतों पर चलेंगेभले ही रास्ता कितना भी कठिन और चुनौतियों से भरा क्यों न हो। मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ मॉडल से देश में विकास की जो नई अवधारणा विकसित हो रही हैसमरसता और भागीदारी के साथ विकास का जो नया वातावरण बन रहा हैउससे न सिर्फ छत्तीसगढ़ के प्रति देश का विश्वास मजबूत होगाछत्तीसगढ़ न सिर्फ देश और दुनिया के लिए नई आशाओं का गढ़ बनेगा बल्कि इसका लाभ भारत को अपनी विरासतमूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ाने में भी मिलेगा। छत्तीसगढ़राष्ट्रीय गौरव के केन्द्र के रूप में सम्मानित होगा। हम ऐसा ही नवा छत्तीसगढ़’ गढ़ने को प्रतिबद्ध हैं।

जय हिन्दजय छत्तीसगढ़

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