धृतराष्ट्र बना प्रशासन, सरकार बनी दुःशासन..सत्ताधारी कर रहे नियमों का चिरहरण : विक्रांत तिवारी

०० कलेक्टर के आदेश पर आपत्ति, क्या आम जनता के लिए अलग और कांग्रसियों के लिए अलग नियम चला रहा प्रशासन?

०० पहली कंडिका का ही पालन नही करवा पा रहे हैं, जनता को मौत के मुहाने पे ले जा रहे हैं : विक्रांत तिवारी

०० करोना को लेके गंभीर नही है जिला प्रशासन, प्रभारी मंत्री पे कार्यवाही करें या आदेश बदल के इज़्ज़त बचाएं

०० हम बिलासपुरवासियों ने कई अपनो को खोया है दुबारा वो स्थिति न आये इसलिए हम चिंतित

बिलासपुर| जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर बिलासपुर द्वारा 28.6.21 को जारी करोना निर्देश पर जनता कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज करवाई है। जनता कांग्रेस ने प्रशासन को बिलासपुर के हालातों से अवगत किया और कई गंभीर आरोप भी लगाते हुए धृतराष्ट्र की संज्ञा दी है। और कहा कि या तो ऐसे आदेश वापस लेके प्रशासन की इज़्ज़त बचा लें या इस पद और आपके आदेश की गरिमा रखते हुए इसका पालन करवाएं और उचित कार्यवाही करें

विदित हो कि कल शाम पुनः बिलासपुर जिले दण्डाधिकारी एवम कलेक्टर बिलासपुर द्वारा धारा 144 के तहत आदेश जारी किया गया जिसमें उन्होंने आम जनता को कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि क्या करना है क्या नही करना है। जिसपे जनता की तरफ से उनकी आवाज़ बन कर जनता कांग्रेस ने जिला कलेक्टर के आदेश पे आपत्ति दर्ज कराई है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के जिला अध्यक्ष विक्रांत तिवारी ने इसपे कड़ी प्रतिकिया देते हुए कहा ,  की क्या एक कलेक्टर का अधिकार सिर्फ आदेश जारी करने तक ही सीमित है? क्यों अपने आदेश की खुल्ले आम हो रही अवहेलना प्रशासन को नही दिखती? क्यों प्रशासन सत्ता के नुमाइंदों के सामने नतमस्तक हो जाता है? क्यों सत्ता के दबाव में जनता को मौत के मुहाने पे लेजाने की मौन स्वीकृति दे रहाहै प्रशासन??  ऐसे कई सवाल और हालिया बिलासपुर के हालातों को देख कर ये कहना कोई अतिश्योक्ति नही है कि प्रशासन धृतराष्ट्र की भांति सत्ता द्वारा नियमों के चिर हरण को मौन होकर अनदेखा कर रहा है जिसका खामियाजा हम आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। विक्रान्त ने कहा कि, प्रशासन द्वारा  11 जून आदेश क्रमांक 2189, 16 जून आदेश क्रमांक-2211 ,और अब 26 जून आदेश क्रमांक 2353 एवं  28 जून आदेश क्रमांक 2388 जैसे कई आदेश तो जारी किए किन्तु आदेशो की पहली कंडिका का ही पालन नही करवाया जा सका है। जारी आदेश में जहां कंडिका 1 की उप कंडिका( ¡¡) में लिखा है कि “सभी प्रकार की सभा, जुलूस,रैली,धरना प्रदर्शन साथ ही सामाजिक,राजनैतिक, खेल एवं सांस्कृतिक अथवा धार्मिक आयोजन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।” वहीं इसी अवधि में बिलासपुर में 17 जून को जगह जगह चक्का जाम किया गया जिसमें कलेक्टर कार्यालय से 100 मीटर की दूरी पे स्थित नेहरू चौक में सबसे बड़ा सांकेतिक चक्काजाम किया गया जिसमें 100 से अधिक लोग उपस्थित थे(सबूत सभी पत्रिकाओं में नाम सहित है)। 25 जून को पूरे शहर में रैली, जुलूस, एवं बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम रखा गया जिसमें प्रशासन स्वम अपनी सेवाएं दे रहा था। जिससे पूरा शहर  भीड़-भाड़ और जाम में फसने को मजबूर होता रहा( सबूत पूरे शहर की जनता प्रत्यक्षदर्शी है) । औऱ भी कई धरना प्रदर्शन,शिविर,सम्मेलन सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी द्वारा निरंतर इस अवधि में किए गए किन्तु प्रसाशन ने एक पर भी संज्ञान नही लिया, मानो धृतराष्ट्र की भाँति नियमो का चिरहरण करने की मौन स्वीकृति हो। जारी आदेश की दुसरी कंडिका है, कंडिका 12 ,जिसमे लिखा है ” आम जनता को निर्देश दिया जा रहा है कि अति आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकले..” अब अगर इन दोनों कंडिकाओं को साथ मे देखा जाए और बिलासपुर में नियमों के चिरहरण को संज्ञान में रखा जाए तो ये प्रतीत होता है कि भूपेश सरकार में आम जनता के लिए अलग कड़े नियम हैं और कांग्रेस पार्टी के लिए सभी प्रकार की छूट के साथ अलग नियम जिसपे हमे घोर आपत्ति है। हम जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर बिलासपुर से अपील करते हैं कि अगर वह सच मे बिलासपुर की जनता के प्रति संवेन्दनशील है, यदि वह वाकई में करोना की तीसरी लहर को लेके गंभीर हैं तो उनके इस आदेश की धज्जियाँ उड़ाने वाले प्रभारी मंत्री और चक्का जाम करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्यवाही करे जनता की इस पद ले प्रति विश्वास को बनाए रखें अन्यथा इस कंडिका को अपने आदेशों से हटाने का कष्ट करें। कोरबा से आए परदेशिया प्रभारी मंत्री को बिलासपुर की जनता से कोई प्रेम नही किन्तु हम बिलासपुरियों ने हाल फिलाल में अपने कई लोगो को खोया है आप की ये अनदेखी और चूक हमारे बिलासपुर को फिर उस भयावह स्थिति में न लेजाए इस और हम चिंतित हैं।

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