अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट : कांग्रेस 

पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि का मूल कारण है सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, नेता प्रतिपक्ष राज्यों के बजाए केंद्र को एक्साइज ड्यूटी घटाने की सलाह दें

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक रमेश वर्ल्यानी ने पेट्रोल-डीजल की मनमानी मूल्यवृद्धि को लेकर कांग्रेस के धरना प्रदर्शन पर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की अनर्गल टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें 100 रू. के पार पहुॅंचने का कारण मोदी सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में लगातार बढ़ोत्तरी किया जाना है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से लेकर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक सहित सारे भाजपा नेता, केंद्र की मनमानी एक्साइज ड्यूटी से ध्यान भटकाने के लिए हमेशा राज्यों को सलाह देते हैं कि वे वेट की दरों में कमी करें। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता लगातार यह झूठ बोलते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार के मूल्यों के आधार पर पेट्रोल- डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है। असलियत यह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यू.पी.ए सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुॅंच गई थी, तब डॉ. मनमोहन सिंह ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगाम लगायी थी और देश को पेट्रोल 74 रू. एवं डीजल 58 रू. प्रति लीटर में उपलब्ध कराया था। मोदी सरकार के शपथग्रहण के तत्काल बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल गिरकर 44 डॉलर तक पहुॅंच गई थी जो आज 70 डॉलर तक ही है। लेकिन मोदी सरकार ने जनता को राहत देने के बजाए, एक्साइज ड्यूटी के माध्यम से लूट का रास्ता खोज निकाला। पेट्रोल पर 2014 में एक्साइज ड्यूटी 9.48 रू. प्रति लीटर थी, जो आज बढ़कर 33 रू. हो गई है और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.56 रू. से बढ़कर 32 रू. प्रति लीटर हो गई है। राज्यों में वेट पेट्रोल-डीजल के बेस प्राइस पर लगता है जिसमें कच्चे तेल की लागत, एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, कंपनी का लाभांश शामिल होता है। एक्साइज ड्यूटी में कमी किए जाने से बेस प्राइस भी कम हो जाएगी और उस पर लगने वाले वेट टैक्स की राशि भी स्वतः कम हो जाएगी। यह मूल्य निर्धारण की सामान्य प्रक्रिया है।
उन्होंने सेंट्रल एक्साइज से राज्य को मिलने वाले राजस्व के आरोप पर कहा कि श्री कौशिक को यह मालूम ही नहीं है कि मोदी सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सहित अन्य 25 वस्तुओं पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को सेस में शामिल कर, राज्यों के राजस्व पर डाका डालने का काम किया है। यह संविधान एवं संघीय व्यवस्था पर सीधे हमला है। उन्हांने कहा कि छत्तीसगढ़ पेट्रोल-डीजल पर वेट कर की दरें देश के भाजपा शासित राज्यों से कमतर हैं। म.प्र. में आज पेट्रोल 107 रू. तथा डीजल 98 रू. प्रति लीटर मिल रहा है जबकि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की प्रति लीटर दर 94 रू. है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से सवाल किया है कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने को कहने का साहस दिखाएंगे और म.प्र. के मुख्यमंत्री को सलाह देंगे कि वे म. प्र. में वेट की दरें छत्तीसगढ़ के समान रखें? उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल की महंगाई की मार से आम आदमी कराह रहा है और भाजपा नेताओं को आम जनता की भलाई से कोई सरोकार नहीं है। इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी के माध्यम से 22 लाख करोड़ रू. लूट लिये और कार्पोरेट घराने की कंपनियों के कार्पोरेट टैक्स में 10 प्रतिशत कमी कर, उन्हें 1,46,000 करोड़ रू. का टैक्स बेनीफीट दिया।
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