संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन को कांग्रेस सहित 12 राजनैतिक दलों का समर्थन : कांग्रेस

मोदी सरकार तीनों काला कानून वापस लेंकिसानों की मांग जायज : कांग्रेस

रायपुर। 12 राजनैतिक दलों की ओर से जारी पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन को समर्थन देते हुये नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग की गयी और कहा गया है कि इसे वापस लिया जाना चाहिये क्योंकि लाखों किसानों को महामारी का शिकार होने से बचाया जाना चाहिये। तत्काल इसे वापस लिया जाये ताकि किसान वापस जाकर फिर से किसानी कर भारतीय लोगों का पेट भर सकें।

कांग्रेस समेत 12 राजनैतिक दलों ने संयुक्त किसान मोर्चा को उनके शांतिपूर्वक किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर अपना समर्थन दिया है। किसान 26 मई को देश व्यापी प्रदर्शन करेंगे।

इस पत्र में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, जनता दल-एस प्रमुख एचडी देवगौड़ा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बेनर्जी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन, झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख हेमंत सोरेन, नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूख अब्दुला, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव, सीपीआई प्रमुख डी. राजा, मार्क्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी प्रमुख सीताराम येचुरी के हस्ताक्षर है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि किसानों के हित में तीन काले कृषि कानून को तत्काल वापस लेना चाहिये। किसानों की मांग जायज है एवं देशहित में है। दिल्ली में किसान मोदी सरकार के तीन काले कानून को वापस लेने की मांग को लेकर इस महामारी काल मे देशभर के किसान दिल्ली में 6 माह से आंदोलन कर रहे है लेकिन केंद्र में बैठी सरकार के कानों में जूं तक नही रेंग रहा है। सत्ता के घमंड में, अहंकार में मदमस्त मोदी सरकार किसानों की बात मानने तैयार नही है। मोदी सरकार के मंत्री और भाजपा के नेता किसानों की बात सुनने के बजाए किसान आंदोलन के खिलाफ दुष्प्रचार करने में लगे है। आंदोलन में शामिल किसानों को भाजपा के नेता कभी आतंकवादी समर्थक, कभी नक्सली बता देते हैं, कभी देशद्रोही और टुकड़े-टुकड़े गैंग से संबंधित होने का आरोप लगाते रहे है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि यही भाजपा लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर के किसानों के वोट पाने के लिए किसानों से अनेक लोक लुभावने वादे किए और सत्ता प्राप्ति की। सत्ता प्राप्ति के पश्चात केंद्र में बैठी मोदी भाजपा की सरकार किसानों के ऊपर अत्याचार कर रही है। किसानों का शोषण कर रही है। किसानों को चंद पूंजीपति का गुलाम बनाने के लिए तीन काला कृषि कानून लाए जिसका देश भर के किसान विरोध कर रहे हैं। आज 6 महीने से किसान दिल्ली में आंदोलन कर कृषि कानून को वापस लेने की मांग कर है। महामारी के विकराल रूप के दौरान भी किसान अपनी जान को जोखिम में डालकर देशभर के किसानों को गुलाम बनाने लाए गए तीन काले कानून का विरोध कर रहे हैं।

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