भाजपा का सवाल : नक्सलियों से आर-पार की निर्णायक लड़ाई का ढिंढोरा पीटती सरकार आख़िर कब मुँहतोड़ ज़वाब देगी?

0 भाजपा प्रवक्ता ने सुकमा क्षेत्र में दो युवकों की हत्या को लेकर प्रदेश सरकार पर साधा निशाना- नक्सली निर्दोषों का खून बहा रहे और प्रदेश सरकार उनके ख़िलाफ़ ठोस योजना और नीति तक नहीं बना पाई

0 प्रदेश सरकार नक्सलियों के रक्तपात की मुँहज़ुबानी निंदा चाहे जितनी कर ले, नक्सली उसे ‘अपनी मित्र सरकार’ मानते हैं और कांग्रेस नेताओं का नक्सलियों से दोस्ताना रिश्ता चर्चा में रहा ही है : संजय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने बस्तर के सुकमा क्षेत्र के जगरगुंडा व चिंतलनार के बीच दो युवकों की हत्या करके एक बार फिर नक्सलियों द्वारा किए गए रक्तपात को लेकर प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ आर-पार की निर्णायक लड़ाई का ढिंढोरा पीटती सरकार आख़िर कब नक्सलियों को मुँहतोड़ ज़वाब देगी? श्री श्रीवास्तव ने कहा कि नक्सली लगातार पुलिस की मुखबिरी का बहाना बनाकर बस्तर में निर्दोष लोगों का खून बहा रहे हैं और प्रदेश सरकार उन नक्सलियों के ख़िलाफ़ कोई ठोस योजना और नीति तक अपने पूरे कार्यकाल में नहीं बना पाई है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री श्रीवास्तव ने कहा कि हाल ही जवानों पर हुए बड़े नक्सली हमले के बाद मुख्यमंत्री बघेल ने बहुत ज़ोर-शोर से नक्सलियों के विरुद्ध ज़वाबी कार्रवाई का ढोल पीटा था, लेकिन नक्सलियों ने दो निर्दोष युवकों मड़कम अर्जुन और ताती हिड़मा को मौत के घाट उतारकर प्रदेश सरकार के उस ढोल की पोल खोलकर रख दी है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि दरअसल प्रदेश सरकार नक्सलियों को सख़्त ज़वाब देने की राजनीतिक इच्छाशक्ति ही नहीं रखती। वह बस्तर में नक्सलियों के रक्तपात की मुँहज़ुबानी निंदा चाहे जितनी कर लें, लेकिन प्रदेश जानता है कि प्रदेश की सरकार को नक्सली ‘अपनी मित्र सरकार’ बताते हैं और कांग्रेस नेताओं का नक्सलियों के साथ दोस्ताना रिश्ता तो कई बार सवालों की शक़्ल में लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार नक्सलियों को ख़िलाफ़ कारग़र कार्ययोजना और रणनीति तक अपने ढाई साल के शासनकाल में तय नहीं कर पाई। जुमलेबाजी करके और केंद्र सरकार को चिठ्ठियाँ लिखकर मुख्यमंत्री प्रदेश को नक्सली आतंक से मुक्त करने के जितने सुझाव वे केंद्र सरकार के पाले में डालने का ग़ैर-ज़िम्मेदारान राजनीतिक आचरण कर रहे हैं, उन पर ख़ुद प्रदेश सरकार अमल करने को स्वतंत्र है, लेकिन प्रदेश सरकार ऐसा न करके नक्सलियों से अपनी दोस्ती निभा रही है।

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