जूनियर डॉक्टरों की जायज मांगों पर विचार कर त्वरित निर्णय ले सरकार : विष्णुदेव साय

०० टीएस सिंहदेव और उनका विभाग या तो विफल हो चुका हैं या फ़िर किसी दबाव और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में निर्णय नहीं ले पा रहा हैं

०० डॉक्टरों को अच्छा मास्क, पीपीई किट तक मुहैय्या नहीं, डिस्पोजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं तो समझा जा सकता हैं छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना को ले कर कितनी लापरवाह हैं

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल मेकाहारा के जूनियर डॉक्टरों के पिछले दो दिन से जारी हड़ताल को लेकर चिंता व्यक्त की है और प्रदेश सरकार से जूनियर डॉक्टरों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार कर त्वरित निर्णय लेने की सलाह दी हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टरों की मांग हैं कि प्रदेश सरकार उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले मास्क और पीपीई किट उपलब्ध नहीं करवा रही हैं। इस्तेमाल के बाद पीपीई किट के डिस्पोजल की बेहतर व्यवस्था नहीं होने से डॉक्टर भी कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। संक्रमित डॉक्टरों पर अवैतनिक अवकाश का दबाव सहित और भी मांगे हैं प्रदेश सरकार को जायज मांगों पर विचार कर त्वरित निर्णय लीना चाहिए और अम्बेडकर अस्पताल की चरमराई व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि जो डॉक्टर लगातार छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा में जुटे हैं जो हमारे लिए दिन रात कोरोना से लड़ रहे हैं वे यदि  हड़ताल पर है कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग फ्रंट लाइन वारियर्स को अच्छा मास्क, पीपीई किट तक मुहैय्या नहीं करा रहा हैं, डिस्पोजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं तो सहज ही समझा जा सकता हैं कि छत्तीसगढ़ की सरकार कोरोना के विरुद्ध लड़ाई को ले कर कितनी लापरवाह हैं। स्वास्थ्य विभाग को अपने फ्रंट लाइन वारियर्स तक कि सुरक्षा की कोई फिक्र नहीं हैं। प्रदेश सरकार कितनी असंवेदनशील हैं कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले और इस संकट की घड़ी में भगवान का रूप डॉक्टरों को अपनी मांगों के लिए हड़ताल पर जाना पड़ता हैं और दो दिन बाद भी कोई सार्थक पहल कोई सकारात्मक निर्णय सरकार नहीं कर पाती हैं।  साय ने मेकाहारा के डॉक्टरों को साधुवाद देते हुए कहा कि तमाम विपरीत परिस्तिथियों में प्रदेश सरकार की लचर व्यवस्थाओं के बीच खतरा मोल ले कर इस संकट के खिलाफ सीधे लड़ाई लड़ने वाले डॉक्टर आज भी पूरी संवेदनशीलता के साथ आपातकालीन सेवा और कोविड का इलाज़ जारी रखते हुए अपनी मांग प्रदेश सरकार के सामने रख रहे हैं परंतु दुर्भग्यपूर्ण हैं कि ना तो सीएम भूपेश बघेल और ना ही स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव इस विषय में गम्भीरता दिखा रहे हैं। साय ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से पूछा हैं कि जब स्वास्थ्य विभाग अपने फ्रंट लाइन वारियर्स की जायज मांगों को लेकर ही निर्णय करने की स्तिथि में नहीं हैं तब कोरोना संकट और लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के आभाव की शिकायतों के निराकरण को लेकर आपकी निर्णय क्षमता और कार्य क्षमता पर प्रश्न खड़ा होना जायज हैं। आपके ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के कुछ स्थानों पर एक्सपायरी डेट की दवा तक मरीजो को वितरित कर दी गयी थी। कोरोना मरीजों तक समय पर दावा भी नहीं पहुंच पा रहीं, अस्पतालों में लंबी कतार, ऑक्सीजन की कमी, वेंटिलेटर का आभाव, डॉक्टर्स की कमी और अब डॉक्टरों की हड़ताल ऐसे में कहा जा सकता हैं कि स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और उनका विभाग या तो विफल हो चुका हैं या फ़िर किसी दबाव और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में निर्णय नहीं ले पा रहा हैं दोनों ही परिस्तिथि में छत्तीसगढ़ की जनता का अहित हो रहा हैं जनता भुगत रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को स्पष्टिकरण देना चाहिए कि क्यों छत्तीसगढ़ की जनता की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं? क्यों फ्रंट लाइन वारियर्स को घटिया क़्वालिटी का मास्क और पीपीई किट दे कर संक्रमण के मुह में ढकेला जा रहा हैं? क्यों स्वास्थ्य व्यवस्था आज चरमरा गयी हैं और आप और आपका विभाग निर्णय की स्तिथि में नहीं हैं।

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