पापुनि के बहाने कांग्रेस विधायकों और संसदीय सचिवों की बयानबाजी और चिठ्ठियाँ कांग्रेस के सत्ता-संघर्ष का परिणाम : भाजपा

०० भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अनुराग ने कहा- संसदीय सचिवों और विधायकों ने आलाकमान को पत्र लिखकर साबित कर दिया कि प्रदेश कांग्रेस और सरकार के नेतृत्व में कुछ भी सही नहीं चल रहा है

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने पाठ्यपुस्तक निगम में करोड़ो रुपए के कथित घपले को लेकर बजाय अपनी सरकार पर जाँच के लिए दबाव बनाने के कांग्रेस विधायकों और संसदीय सचिवों के मीडिया में बयानबाजी करने और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम चिठ्ठियाँ लिखने को कांग्रेस में मचे सत्ता-संघर्ष और गुटीय कलह का परिणाम बताया है। श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश के संसदीय सचिवों और कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी के आलाकमान को पत्र लिखकर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश कांग्रेस और सरकार के नेतृत्व में कुछ भी सही नहीं चल रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस के जनप्रतिनिधि अब अपने दिल्ली दरबार को पत्र लिखने को विवश हैं।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस और प्रदेश सरकार का यह सत्ता संघर्ष हालाँकि कांग्रेस का आंतरिक मामला है लेकिन इस आपसी द्वंद्व से यह भी स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार में अपने ही संसदीय सचिवों और विधायकों की अब कोई सुनवाई नहीं हो रही है और इसलिए सत्ता-संघर्ष के सूत्रधार अब अपने समर्थक संसदीय सचिवों और विधायकों को लामबंद कर कथित घपले की आड़ लेकर दबाव बनाने में जुट गए हैं। श्री सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व और प्रदेश सरकार से पीड़ित होकर ही संसदीय सचिवों व विधायकों ने आलाकमान को पत्र लिखा है और यह कांग्रेस के भीतर चल रही  आंतरिक कलह का ही हिस्सा है। श्री सिंहदेव ने कहा कि अब  लगता है कि नाराज कांग्रेस का विधायकों का एक समूह तैयार हो रहा है जो अपनी ही सरकार में अपनी बातें नहीं सुने जाने से परेशान है और इसीलिए पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष को देकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री सिंहदेव ने कहा कि पाठ्यपुस्तक निगम के कथित घपले को लेकर पत्र ऐसे समय लिखा जा रहा है  कि जब कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दो साल छह माह पूरे हो रहे हैं। बयानबाजी और चिठ्ठीबाजी का यह सिलसिला कई सियासी संभावानाओं को जन्म देता है। श्री सिंहदेव ने कहा कि पत्र में संसदीय सचिवों और विधायकों का दर्द साफ दिख रहा है। ऐसे समय में  प्रदेश के मुखिया असम में हैं और पूरा प्रदेश भगवान भरोसे है। ऐसे हालात में कांग्रेस का दिल्ली नेतृत्व इस पत्र की भावनाओं को कितना गंभीरता से लेता है, यह भविष्य का एक बड़ा सवाल है। श्री सिंहदेव ने कहा कि यह बयानबाजी और चिठ्ठीबाजी तो कांग्रेस में मचे सियासी घमासान का एक हिस्सा है, अन्यथा प्रदेश सरकार और कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में जाँच और कार्रवाई करने में सक्षम होकर भी इस मामले को यूँ लटकाकर सियासी घमासान में क्यों इस्तेमाल किया जाता?

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