असम में हार देखकर बंगाल भागे मोदी-शाह : कांग्रेस

०० बंगाल में पतली हालात देखकर बांगला देश गये मोदी-कांग्रेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एम.ए. इकबाल ने भाजपा, मोदी सरकार पर करारा तंज कसते हुये कहा है कि असम में छत्तीसगढ़ प्रदेश के जुझारू मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा उनकी टीम और कांग्रेस महागठबंधन के तूफानी प्रचार से घबरा कर मोदी-शाह ने बंगाल का रूख किया। बंगाल की जनता ने ‘बाहरी’ वाला मुद्दा समझ लिया और वहां भाजपा को समझ में आ गया कि यहां भी उनकी दाल गलने वाली नहीं है तो बंगला के मतुआ समाज के वोट के लालच में बांगला देश की कूटनीति, कम वोट नीति के लिये विदेश यात्रा पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर मतुआ समाज को रिझाने कलकत्ता से 200 कि.मी. दूर ठाकुरवाड़ी स्थित उनके धर्मगुरू हरिशचंद ठाकुर के मंदिर में जाने की योजना बनाई लेकिन वहां भी मोदी असफल रहेंगे क्योंकि मतुआ समाज पहले से ही कांग्रेस समर्थित रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता एम.ए. इकबाल ने आरोप लगाते हुये कहा है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले प्रधानमंत्री है जिन्होंने चुनाव जीतने के लिये प्रधानमंत्री के कुर्सी का सहारा लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव के समय अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘नमस्ते ट्रंप’ वाला कार्यक्रम किया। अब बंगाल चुनाव को जीतने की प्रतिष्ठा बनाकर इतने विशाल लोकतांत्रिक देश के सर्वोच्च पद पर आसीन मोदी प्रधानमंत्री पद का सहारा लेकर  बांगला देश का दौरा तक कर डाला। परंतु नरेन्द्र मोदी का बांगला देश के चिटगांव-ढाका आदि शहरों में वाहां की जनता द्वारा विरोध किया जाना यह दर्शाता है कि मोदी की बांगला देश यात्रा फेल है। मोदी ने अपने आप को बांगला देश में स्थापित करने एवं लोकप्रिय साबित करने यहां तक कह दिया कि 1971 में बांगला देश की आजादी के लिये उन्होंने संघर्ष किया और जेल तक गये। यह प्रधानमंत्री के झूठ की पराकाष्ठा है, जबकि सारी दुनिया जानती है कि बांगला देश की आजादी के लिये भारत देश की तात्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने कितनी मेहनत की थी और अपनी विदेश नीति, कुशलता से बांगला देश की ‘मुक्ति वाहिनी सेना’ के साथ मिलकर 93 हजार पाकिस्तानियों सैनिकों को सरेंडर करा कर बांगला देश को आजाद कराया जिसके बाद बांगला देश के चहेते नेता शेख मुजबुर्र रहमान प्रधानमंत्री बने थे।

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