26 फरवरी के अपील के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, रोड सेफ्टी से ज्यादा जरूरी है छत्तीसगढ़ वासियों की सेफ्टी : प्रकाशपुन्ज पाण्डेय 

रायपुर| कोरोना वायरस के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए समाजसेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने पुनः एक बार मीडिया के माध्यम से कहा है कि ऐसा क्यों होता है की हिंदी फिल्मों में जिस प्रकार घटना होने के बाद पुलिस पहुंचा करती है, उसी प्रकार सब कुछ पता होने के बाद भी छत्तीसगढ़ में प्रशासन की नींद देर से खुलती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने 26 फरवरी 2021 को ही शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम, नया रायपुर में आयोजित होने वाले “रोड सेफ्टी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट विश्व कप” की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े किए थे। जब एक महीने पहले से ही छत्तीसगढ़ की पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में 3 जिलों में लॉकडाउन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी जिसको देखते हुए छत्तीसगढ़ में भी बाहर से आने वाले यात्रियों और मुसाफिरों की कोरोना जांच करने के आदेश दिए गए थे, तो ऐसी स्थिति में ऐसा आयोजन, प्रशासन की इच्छा शक्ति और मंशा पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। इसी आयोजन को स्थगित करने की अपील 26 फरवरी को प्रकाशपुंज ने की थी। उस समय प्रशासन ने उनकी इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन आज की स्थिति यह है कि प्रशासन अब इस आयोजन के दौरान होने वाली लापरवाही और गलतियों के मद्देनजर नित नए नए निर्देश जारी कर रहा है और मैराथन मीटिंग्स ले रहा है। कोरोना वायरस के देशभर में बढ़ते हुए रफ्तार के मद्देनजर महाराष्ट्र में कुछ जिलों में पूर्ण रूप से लॉक डाउन लगा दिया गया है जिसमें रायपुर से लगभग 350 किलोमीटर दूर नागपुर भी है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि इस रोड सेफ्टी क्रिकेट विश्वकप के आयोजन में प्रायः देखा गया है कि लोगों ने वहां की तस्वीरें उत्साह वश सोशल मीडिया पर साझा की हैं। लेकिन यह भी सब ने देखा है कि समाज के प्रतिष्ठित और जिम्मेदार लोगों ने भी वहां पर ना ही सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग का अनुसरण किया ना ही उन्होंने मास्क पहना हुआ था। अब अगर समाज और राज्य के जिम्मेदार व्यक्ति ही समाज में ऐसा संदेश देंगे तो आम जनता से क्या अपेक्षा की जाती है? एक तरफ होली जैसे पावन पर्व पर होलिका दहन में 5 से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर मनाई है, शादी ब्याह में 50 से अधिक लोगों के घटना होने में मनाई है, तो वहीं दूसरी ओर शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 50,000 से अधिक की भीड़ जमा हो रही है बिना कोरोना के सरकारी नियमों का अनुसरण किए, तो इसका जिम्मेदार कौन है? प्रशासन का ऐसा दोहरा मापदंड क्यों? इस पर अब आम जनता को ही सोचने की जरूरत है क्योंकि ‘रोड सेफ्टी’ से ज्यादा जरूरी है ‘हर इंसान की सेफ्टी’।  ज्ञात हो कि गुजरात में हो रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला में भी अब कोरोना वायरस की बढ़ती हुई रफ्तार को देखते हुए दर्शकों के जाने पर रोक लगा दी गई है। उम्मीद है कि अब रायपुर में भी प्रशासन की नींद खुलेगी और इस आयोजन में दर्शकों के जाने पर तत्काल रूप से प्रतिबंध लगेगा। वरना अगर कोरोना बम फूट गया तो इसे रोक पाना नामुमकिन हो जाएगा जो कि सभी ने छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के समय देख चुका है।

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