भूपेश सरकार के दो साल : किसानो के हित में हुआ पहला हस्ताक्षर, मछली पालन को कृषिमे शामिल करने की तैयारी : रविन्द्र चौबे

०० कृषि व राजधानी के प्रभारी मंत्री रविंद्र चौबे ने सरकार की उपलब्धियों को किया साझा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार दो साल पूरे करने जा रही है। 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ ली थी। इस अवसर पर सरकार के मंत्री उपलब्धि गिनने प्रदेश के हर जिलों में पत्रकारों से चर्च कर रहे हैं। इसी क्रम में आज प्रदेश के कृषि व राजधानी के प्रभारी मंत्री रविंद्र चौबे ने पत्रकारों से चर्चा कर सरकार की उपलब्धियों को साझा किया।
रविंद्र चौबे ने कहा कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने अपनी पहली कैबिनेट किसानों के नाम किया। सबसे पहले किसानों का कर्जा माफ हुआ, अपने वादा के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2500 रुपए में धान खरीदी जैसे अहम निर्णय लिए गए। छत्तीसगढ़ सरकार गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। प्रदेश के 18 लाख किसानों का करीब 9 हजार करोड़ रूपए अल्पकालीन कृषि ऋण माफ किया गया। जल कर के रूप में 17 लाख किसानों को 244 करोड़ रुपए बकाया माफ किया गया। बस्तर में किसानों की 1764.61 हेक्टेयर अधिगृहित भूमि वापस की गई। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने तथा फसल उत्पादकता में वृद्धि के उद्देश्य से प्रदेश में राजीव गांधी किसान न्याय योजेजना शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों को 5750 करोड़ रुपए की आदान सहायता चार किश्तों में किये जाने का प्रावधान है। वहीं तीन किश्तों में 4500 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। अंतिम किश्त आगामी मार्च महीने में दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दो सालों में धान बेचने वाले किसानों की संख्या 12.06 लाख से बढ़कर 18.36 लाख हो गई है। धान का पंजीयन रकबा भी 24.46 हेक्टेयर से बढ़कर 59 लाख हेक्टेयर हो गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन देने के लिए सरकार ने सुराजी गांव योजना के तहत नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित कर रही है। राज्य में 6430 गौठान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 4487 निर्मित हो चुके हैं। इन गौठानों में वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन के साथ ही ग्रामीणों विशेषकर समूह की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए अनेक आयमूलक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। बाडिय़ों में साग-सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। हमारी सरकार ने देश में अपने तरह की पहली अनूठी योजना-गोधन न्याय योजना शुरू की, जिसके तहत 2 रुपए किलो की दर से गोठानों में गोबर की खरीदी की जा रही है। इस योजना के माध्यम से जैविक खेती, पशुओं की देखभाल के साथ फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। साथ ही किसानों की अतिरिक्त आय का यह जरिया साबित हुई है। गोधन न्याय योजना के तहत अब एक करोड़ 36 लाख गोबर विक्रेताओं को 59 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका था। राज्य सरकार ने गोठानों में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट की न्यूनतम विक्रय दर को 8 रूपए से बढ़ाकर 10 रूपए कर दिया है। प्रदेश के सभी छोटे-बड़े नालों को पुनर्जीवित करने एवं जल संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन के लिए सभी जिलों में नरवा विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 1028 नालों का चयन कर संवर्धन की योजना बनाई गई है। नरवा कार्यक्रम के तहत बिलासपुर और सुरजपुर जिले को केन्द्र सरकार ने नेशनल वॉटर आवार्ड के लिए चयनित भी किया है। देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ के कृषि सहित सभी क्षेत्रों में आर्थिक तेजी रही। रिजर्व बैंक सहित अनेक राष्ट्रीय एजेंसियों ने इसे सराहा है। लाख की खेती के लिए किसानों को अब सहकारी समितियों से अन्य फसलों की तरह अल्पकालीन ऋण सुविधा दी गई है। कृषि पंप ऊर्जीकरण के लिए विद्युत लाइनों के विस्तार के लिए प्रति पंप एक लाख रुपए का अनुदान। दो वर्षों में 57 हजार से अधिकपंपों का ऊर्जीकरण किया गया है। 03 हार्स पावर तक कृषि पंपों में 6000यूनिट प्रतिवर्ष एवं 03 से 05 हार्स पावर के कृषि पंपों में 7500 यूनिट प्रति वर्ष छूट। इसके अलावा फ्लेट रेट में बिजली प्राप्त करने का भी विकल्प दिया गया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए विद्युत खपत की सीमा को समाप्त कर दिया गया है। विद्युत पहुंच-विहीन क्षेत्रों में दो वर्षों में 25000 से अधिक सोलर पंपों की स्थापना हुई है। विभिन्न योजनाओं के लिए किसानों की भूमि के अधिग्रहण पर मुआवजा राशि 2 गुना से बढ़ाकर अब 4 गुना कर दिया गया है। बेमेतरा, जशपुर, धमतरी एवं अर्जुदा जिला बालोद में उद्यानिकी महाविद्यालय तथा लोरमी में कृषि महाविद्यालय की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान बजतट में किया गया है। 57 नवीन पशु औषधालयों की स्थापना, 29 पशु औषधालयों, कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों का पशु चिकित्सालयों में उन्नयन किया गया है। सांकरा (पाटन) दुर्ग में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई है। खेतों-खलिहानों तक पहुंचने के लिए धरसा विकास योजना के तहत बनाये जा रहे हैं। मछलीपालन को खेती का दर्जा देने की तैयारी है। बोधघाट परियोजना के तहत इंद्राववी नदी पर 22 हजार 653 करोड़ रुपए की बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना का काम आगे बढ़ाया गया है। इससे बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में 03 लाख 66 हजार हेक्टेयर में नयी सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। गांवों के लिए मनरेगा से इस वर्ष अब तक करीब 27 लाख परिवारों के करीब 51 लाख श्रमिकों को काम। साढ़े दस करोड़ मानव दिवस रोजगार का सृजन कर 2305 करोड़ रूपए की मजदूरी का भुगतान किया गया है।
प्रदेश में इस साल 4.28 लाख परिवारों को 400 दिनों का रोजगार दिया गया है। वन अधिकार पट्टाधारी 2 हजार से अधिक परिवारों को भी 400 दिनों से अधिक का रोजगार दिया गया है। मनरेगा अभिसरण से धान उपार्जन केंद्रों में 6692 पक्के चबूतरों का निर्माण किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के गंदगी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक ओडीएफ प्लस गांव के लिए दूसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ है। छत्तीसगढ़ को स्वच्छता सर्वेक्षण (ग्रामीण) 2019-20 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ग्रामीणों को चौबीसों घंटे पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो वर्षों में 3 हजार 117 नग सोलर पंपों की स्थापना की गई है। बैंक सखियों के माध्यम से बैंकों की कमी वाले क्षेत्रों में मनरेगा मजदूरी, पेंशन और छात्रवृत्तियों का गांव में ही भुगतान। प्रदेश में 1431 बैंक सखियां सक्रिय हैं। राजीव युवा मितान क्लब से युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास तथा कौशल विकास की गतिविधियां संचालित की जा रही है। 146 विकासखंडों की 11 हजार 664 ग्राम पंचायतों में गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।
00 सार्वभौम पीडीएस :- प्रदेश के गरीब और अमीर सभी परिवारों को खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 से सार्वभौम पीडीएस का क्रियान्वयन किया गया है। राज्य की 97 प्रतिशत जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा मिली है।
00 स्वास्थ्य विभाग :- डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना से प्रदेश के 65 लाख परिवारों को इलाज की सुविधा दी जा रही है। 56 लाख बीपीएल परिवारों को सालाना पांच लाख रूपए तक और 9 लाख एपीएल परिवारों को हर वर्ष 50 हजार रूपए तक के नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी गई। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से जटिल एवं गंभीर रोगों के इलाज के लिए 20 लाख रूपए तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वनांचलों एवं दूरस्थ क्षेत्रों में मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना के माध्यम से लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। शहरों में मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के माध्यम से मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए नि:शुल्क जांच एवं दवाईयां मुहैया कराई जा रही है। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के माध्यम से शहरी क्षेत्रों की गरीब बस्तियों में निवासरत 16 लाख लोगों तक मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं की आसान पहुंच बनी है। दाई-दीदी क्लीनिक योजना के माध्यम से महिला चिकित्सकों द्वारा महिलाओं का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। रायपुर, भिलाई एवं बिलासपुर में एक-एक क्लीनिक की शुरूआत की गई है।
बस्तर संभाग को मलेरिया, एनीमिया व कुपोषण से मुक्त करने तथा शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान संचालित किया जा रहा है। इससे वहां मलेरिया के मामलों में 65 प्रतिशत तक की कमी आई है। प्रदेश के 9 जिला अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए नि:शुल्क कीमोथेरेपी और 5 जिला अस्पतालों में किडनी रोगों से पीडि़तों के लिए नि:शुल्क डायलिसिस सुविधा शुरू की गई है। 541 नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति के साथ ही 52 एम.बी.बी.एस. और 432 पी.जी. अनुबंधित डॉक्टरों की सरकारी अस्पतालों में पदस्थापना की गई है। महासमुंद, कांकेर और कोरबा में तीन नए मेडिकल कॉलेज भी शुरू किए जा रहे हैं।
00 कोविड प्रबंधन :- कोविड मरीजों के प्रबंधन में प्रशिक्षित 16 हजार से अधिक मेडिकल स्टॉफ की तैनाती कोविड अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर्स में की गई है। कोरोना संक्रमण की पहचान के लिए प्रदेश में रोजाना 30 से 35 हजार सैंपलों की जांच की जा रही है। देश के विभिन्न भागों से प्रदेश लौटे करीब 7 लाख श्रमिकों के लिए 21 हजार क्वारेंटाइन सेंटर्स बनाए गए। इन सेंटरों में निशुल्क आवास, भोजन और स्वास्थ्य जांच के साथ सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई। लॉकडाउन अवधि में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत नियमित रूप 3 लाख 34 हजार हितग्राहियों को सूखा राशन का वितरण किया गया और 2.36 लाख बच्चों और महिलाओं को अन्य पौष्टिक आहार प्रदान किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के माध्यम से प्रदेश के 51 हजार 455 आंगनवाडी केन्द्रों के लगभग 24 लाख 38 हजार हितग्राहियों को घर-घर जाकर रेडी टू ईट का प्रदाय किया गया।
00 महिलाओं के लिए :- ग्रामीण महिलाओं के आजीविका संवर्धन एवं उन्हें विभिन्न रोजगार मूलक गतिविधियों से जोडऩे के लिए गरीब परिवारों की 6 लाख 12 हजार महिलाओं को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत 55 हजार 814 स्वसहायता समूहों से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की अनुदान राशि 45 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रूपए, अनुदान बढ़ोतरी के बाद 2 हजार 944 कन्याओं का विवाह संपन्न कराया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की गई है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 को मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का शुभारंभ किया गया है। 77 हजार बच्चे कुपोषण से तथा 98 हजार महिलाएं एनीमिया से मुक्त हुईं है। महिला स्व सहायता समूह ऋण योजना के तहत विगत दो वर्ष की अवधि में 2 हजार 752 महिला समूहों को 4 करोड़ 8 लाख रूपये का ऋण दिया गया है।
00 बुर्जुगों और दिव्यागजनों के लिए :- दिव्यांगजनों के विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि 50 हजार से बढ़ाकर 4 लाख रूपए की गई। बीमार वयोवृद्ध नागरिकों के रहने तथा उपचार के लिए `पैलेटिव केयर यूनिटÓ बनाने का निर्णय लिया गया है।
00 विद्यार्थियों के लिए :- प्रदेश में पहली बार शिक्षा के अधिकार के तहत 12वीं तक नि:शुल्क शिक्षा व्यवस्था दी जा रही है। 14 हजार 580 से नियमित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। दो वर्ष पूरे होने पर 16 हजार 278 शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया गया। कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने की स्थिति में `पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रमÓ के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कर 22 लाख बच्चों एवं 02 लाख शिक्षकों द्वारा अध्ययन-अध्यापन किया गया। 39.57 लाख ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही है। जहां इंटरनेट नहीं है, वहां पढ़ई तुंहर पारा से ऑफलाइन कक्षाएं मुहैया कराई जा रही है। 23 हजार 643 शिक्षकों की ओर से 7 लाख 48 हजार 266 विद्यार्थियों की पढ़ाई, गांवों में लाउडस्पीकरों के माध्यम से भी पढ़ाई का इंतजाम, 02 हजार 343 शिक्षकों द्वारा 68 हजार 916 विद्यार्थियों को सहयोग मिला है। ब्लूटूथ आधारित बुल्टू के बोल कार्यक्रम के माध्यम से 4608 शिक्षकों द्वारा सुदूर अंचलों में 27 हजार 433 पालकों तक पाठ्य सामग्री पहुंचा कर बच्चों की पढ़ाई कराई गई। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना के तहत 53 उत्कृष्ट अंग्रेजी मॉडल स्कूलों का संचालन अगले साल 100 नये स्कूल खोलने का लक्ष्य रखा गया है। शहीद नंदकुमार पटेल के नाम से रायगढ़ में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कार्यवाही शुरु की गई है। 32 नये शासकीय कॉलेज खोले गए। 14 भवन निर्माण एवं विविध पदों की स्वीकृति प्रदान की गई। 27 प्राइवेट नये कॉलेज खोले गए। 69 शासकीय कॉलेजों में 3780 एवं 56 प्राइवेट कॉलेजों में 5990 सीटों की वृद्धि की गई। सहायक प्राध्यापकों के 1384 रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। अनुसूचित जाति-जनजाति तथा वनश्रितों के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 2500 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया।
शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना लागू करके 12 लाख 65 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से अब 52 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी। 2018 में यह संख्या केवल 07 थी। आदिवासियों पर दर्ज प्रकरणों की समीक्षा और प्रकरणों की वापसी की गई। बस्तर, सरगुजा में जूनियर कर्मचारी चयन बोर्ड (स्थानीय युवाओं के लिए प्राथमिकता)। रायपुर में राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया। मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। निरस्त वन अधिकार पत्रों की समीक्षा कर वन अधिकारों को मान्यता देने में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। 29 नवीन एकलव्य विद्यालय प्रारंभ करने की स्वीकृति दी गई है। भोपालपटनम में बांस आधारित कारखाना, इंद्रावती नदी विकास प्राधिकरण का गठन और बस्तर में आदिवासी संग्रहालय की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
00 श्रमिकों के लिए :- कोविड काल में लगभग 07 लाख से अधिक श्रमिकों की छत्तीसगढ़ में सम्मानपूर्वक वापसी। कुल 107 स्पेशल ट्रेन चलाई गई, जिसके माध्यम से लगभग एक लाख 54 हजार श्रमिक वापस छत्तीसगढ़ अपने गांव लौटे। श्रम विभाग ने लॉकडाउन में छूट के बाद उद्योगों में वापस 01 लाख 10 हजार श्रमिकों को रखवाने की पहल की गई और 73 हजार से अधिक श्रमिकों का बकाया भुगतान 171.6 करोड़ कराने में मदद की गई। जनसहयोग से राहत शिविर लगाए गए। इन शिविरों में मजदूरों के लिए भोजन, पानी सहित अन्य व्यवस्थाएं की गईं। मजदूरों की स्वास्थ्य जांच के लिए 42 स्थायी क्लीनिक संचालित किए गए, जिनमें 01 लाख 54 हजार से अधिक श्रमिकों का इलाज और उन्हें दवाइयों का वितरण किया गया। श्रमिकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष की गई। इससे राज्य के 4 लाख से अधिक श्रमिकों को अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा अवधि का लाभ मिलेगा। पत्रकारवार्ता के दौरान रायपुर उत्तर विधायक कुलदीप जुनेजा, पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय, अभनपुर विधायक धनेन्द्र साहू, धरसींवा विधायक श्रीमती अनिता शर्मा और रायपुर नगर निगम के महापौर एजाज ढ़ेबर उपस्थित थे।

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