भाजपा तो अब 14 विधानसभा सीटों तक सिमट  गयी हैं : कांग्रेस

छत्तीसगढ़ को हथियाने और चलाने की मंशा भाजपा के मन से कब निकलेगी?

क्या भाजपा चाहती है कि छत्तीसगढ़ का भी हाल देश की अर्थव्यवस्था की तरह हो जायें?

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है कि भाजपा बतायें कि छत्तीसगढ़ को हथियाने और चलाने की मंशा उनके मन से कब निकलेगी? छत्तीसगढ़ विरोधी रवैये के कारण भाजपा अब 14 विधानसभा सीटों तक सिमट गयी है। विपक्ष की जो छोटी-मोटी भूमिका बची है, उसको निभाने में भाजपा अपना ध्यान लगायें। आज समय की मांग है कि भाजपा छत्तीसगढ़ के मतदाताओं द्वारा सौपी गयी विपक्ष की भूमिका को निभायें और छत्तीसगढ़ को हथियाने की साजिशों से बाज आयें।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना से लड़ाई पहले दिन से ही प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से बेहतर प्रबंधन में लड़ रही है जबकि मोदी सरकार संघीय व्यवस्था के तहत जिम्मेदारियों से भाग रही है। पहले प्रवासी मजदूरों के रेल किराये के 85 प्रतिशत देने के नाम पर झूठ बोला, फिर श्रमिक कल्याण रोजगार योजना में छत्तीसगढ़ को शामिल नहीं किया, किसान सम्मान निधि से छत्तीसगढ़ के 18 लाख किसानों को बाहर किया और अब वन नेशन वन राशनकार्ड योजना के द्वितीय चरण में भी छत्तीसगढ़ को शामिल नहीं किया। मोदी सरकार लगातार छत्तीसगढ़ की जनता को छलने और ठगने का काम कर रही है। त्रिवेदी ने भाजपा से पूछा है कि केन्द्र की भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश की तरह हथियाना चाहती है या गोवा की तरह हथियाना चाहती है या कर्नाटक की तरह हथियाना चाहती है या अरूणाचल की तरह हथियाना चाहती है। त्रिवेदी ने पूछा है कि भाजपा की केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ में कोरोना का प्रबंधन नोटबंदी की तरह करना चाहती है या लाकडाउन के कुप्रबंधन की तरह करना चाहती है या जीएसटी को गब्बर सिंह टेक्स बनाने की तरह करना चाहती है। नोटबंदी, जीएसटी को गब्बर सिंह टेक्स बनाने और लाकडाउन के कुप्रबंधन के मोदी सरकार के कारनामों के परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था तहस नहस हो गयी, महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है और मोदी सरकार से व्यापारी, उद्योगपति, मजदूर, किसान, नौजवान सभी दुखी है, निराश है। क्या भाजपा चाहती है कि छत्तीसगढ़ का भी हाल देश की अर्थव्यवस्था की तरह हो जायें? त्रिवेदी ने कहा है कि मोदी भाजपा की सरकार कोरोना वायरस में पहले ही अक्षम साबित हो चुकी है। अब कोरोना के बढ़ते मामलों को रोकने में भी असफल सिद्ध हो गई है। कोरोना के रोकथाम एवं आम नागरिकों के लिए बनाई गई पीएम केयर फंड की राशि से कोरोना में उपाय करने और राज्यों को मदद करने के बजाय मोदी की भाजपा सरकार कोरोना रोकने की खानापूर्ति मात्र करने में लगी है। मोदी की भाजपा सरकार की रूचि कोरोना रोकने के उपाय करने में नहीं है, बल्कि अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने में है। कोरोना महामारी को रोकने में हुई असफलता और देश में 90,00,000 से अधिक पाए गए कोरोना के मरीज और डेढ़ लाख के करीब कोरोना के कारण हुई मौतों से पल्ला झाड़ने की कोशिश भाजपा नेता बयानबाजी करके कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने कोरोना महामारी को रोकने में जो युद्ध स्तर पर उपाय किया है उसका ही परिणाम है कि राज्य में 2 लाख मरीज कोरोना प्रभावित होकर स्वस्थ होकर घर पर हैं। साढे सात लाख प्रवासी मजदूरों की सकुशल वापसी हुई, उनके स्वास्थ्य परीक्षण हुए और भाजपा शासित प्रदेश मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तरप्रदेश, बिहार से बेहतर स्थिति में छत्तीसगढ़ है तो वह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के कोरोना रोकने के उपायों का ही परिणाम है।

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