कोरोना के नाम पर की गयी खरीदी में भ्रष्टाचार को दबाने के लिए तीन फार्माशिष्टो को किया निलंबित

मामला एसईसीएल उपक्रम के हसदेव क्षेत्र का है 

मनेन्द्रगढ़। एसईसीएल उपक्रम के हसदेव क्षेत्र में अधिकारियों की मिलीभगत से कोरोना काल में सामानों की खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है इस मामले की जांच कोयला मंत्रालय का सतर्कता विभाग, और कोल इंडिया का सतर्कता विभाग भी कर रहा है इस जांच से घबराए अधिकारियों ने आनन-फानन में केंद्रीय चिकित्सालय मनेंद्रगढ़ के तीन फार्मासिस्टो को निलंबित कर दिया है और निलंबित करने का आधार बनाया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि दस्तावेजों को अन्य लोगों या अन्य एजेंसियों को आपके द्वारा दिया गया है जबकि कोरोना काल में खरीदे गए इन सामानों के खरीदी में इन फार्मासिस्टो की कोई भूमिका है ही नहीं बल्कि मामले को उलझाने और भटकाने के लिए इस प्रकार से यह रास्ता प्रबंधन ने खोज लिया है ज्ञात हो कि अपने सेवा के अंतिम दिन में पूर्व में पदस्थ मुख्य चिकित्सा अधिकारी केंद्रीय चिकित्सालय मनेंद्रगढ़ जो इस भ्रष्टाचार में भी शामिल है ने तीन फार्मशिस्टो को निलंबित किया है जो अपने आप में खुद संदेह के दायरे में है जहां पूरा विश्व एक ओर कोरोना की त्रासदी को झेल रहा है वहीं दूसरी तरफ मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त एसईसीएल उपक्रम कोरोना के कहर में को कैसे कमाई के अवसर में बदला जाए इस जुगत में लगा हुआ था ज्ञात हो कि एसईसीएल हसदेव क्षेत्र में लाखों रुपए का गबन अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया है।

की गयी शिकायतों पर सतर्कता विभाग की जांच हुई शुरू

कोल इंडिया के एसईसीएल उपक्रम के हसदेव क्षेत्र में कोविड-19 के नाम पर अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों का भ्रष्टाचार किये जाने के संबंध में मुख्य सतर्कता अधिकारी कोयला मंत्रालय शास्त्री भवन नई दिल्ली, सतर्कता अधिकारी कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता, कार्मिक निदेशक एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर सहित विभिन्न अधिकारियों को इस मामले की जाँच कराकर दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने के मांग की गयी थी वरिष्ठ कार्यालयो ने इसे गंभीरता पूर्वक लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्या था मामला

एन-95 मास्क, पीपीई किट, सर्जिकल मास्क थ्री लेयर, सर्जिकल कैप, हाइपोक्लोराइड सैल्यूशन, थर्मल स्कैनर (नॉन कांटेक्ट थर्मामीटर) एन-95 मास्क विथ रेस्पीरेटर, पीपीई किट (80 जीएसएम) की खरीदी तीन आपूर्ति आदेश के माध्यम से मेसर्स-वर्षा सर्जिकल एण्ड मेडिकल, बी.के.टॉवर बलदेव बाग जबलपुर(म.प्र.) से लगभग 15 लाख रूपये में की गई है इस ख़रीदी में कई प्रकार की अनियमितताएं बरती गयी है एन-95 मास्क जो क्रय किया गया है वह अत्यंत ही घटिया किस्म का और नॉन ब्रांडेड मास्क क्रय किया गया है, एन-95 के स्थान पर डस्ट को रोकने वाला मास्क क्रय किया गया है वह भी बाजार से दो-तीन गुना अधिक मूल्य पर पीपीई किट नॉन ब्रांडेड और घटिया क्वॉलिटी का लिया गया है यह किट बाजार से दो-तीन गुना अधिक मूल्य पर क्रय किया गया है सर्जिकल मास्क थ्री लेयर, सर्जिकल कैप, हाइपोक्लोराइड सैल्यूशन, थर्मल स्कैनर(नॉन कांटेक्ट थर्मामीटर), एन-95 मास्क विथ रेस्पीरेटर, पीपीई किट (80 जीएसएम)यह सब भी बाजार से दुगुने और तिगुने दरो पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के मापदंडों के विपरीत जाकर बाजार में खुदरा बिक्री दर से ऊपर जाकर थोक में क्रय किया गया है हसदेव क्षेत्र से नजदीक बिलासपुर, रायपुर से इन सभी सामग्री को क्रय न करके अपनी सेटिंग के अनुसार जबलपुर से किराया किया गया है और आपूर्तिकर्ता फर्म ने भी आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन करते हुए ऊंचे दरों पर सप्लाई किया है आपूर्तिकर्ता के विरुद्ध भी जांच कराकर उचित एवं अग्रिम कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता है।

खरीदी में अधिकारियों की थी मिलीभगत 

इन सामानो की खरीदी में विश्वजीत चौधरी तत्कालिक महाप्रबंधक हसदेव क्षेत्र, वर्तमान पदस्थापना एनसीएल उपक्रम,श्रीमती गुरमीत कौर, सेवा निवृत्त प्रमुख चिकित्सा सेवाएं , सीएचएम हसदेव, चीफ मैनेजर, सामग्री क्रय हसदेव क्षेत्र,, ए.के.भक्ता,वरीय प्रबंधक (स्टोर),हसदेव क्षेत्र मुख्य रूप से शामिल हैं।

एग्रीड सूची में शामिल अधिकारी को मिली पदोन्नति 

इतना ही नहीं इस मामले में भ्रष्टाचार में शामिल सीनियर मैनेजर स्टोर ए. के. भक्ता को सतर्कता विभाग ने जहां एक और एग्रीड सूची में रखा है वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया मुख्यालय द्वारा इनकी पदोन्नति ई -6 से ई -7 पर कर दी है एसईसीएल और कोल इंडिया उच्च प्रबंधन की यह कार्यप्रणाली दोहरे मापदंड को दर्शाता है।

भ्रष्टाचार को दबाने के लिए बलि के बकरे बने फार्मासिस्ट 

बताया जाता है कि सेवानिवृत्ति के उपरांत प्राप्त होने वाले देयको के भुगतान को प्राप्त करने के उद्देश्य से मुद्दे को भटकाने के लिए साथ ही किए गए भ्रष्टाचार पर पर्दा ढकने के लिए केंद्रीय चिकित्सालय में पदस्थ तीन फार्मासिसटो को बलि का बकरा बना कर सस्पेंड कर दिया गया है और सारा दोष इनके ऊपर मढने की तैयारी है हालांकि प्रबंधन का यह हिटलर शाही रवैया सभी के समझ में आ रहा है लेकिन अपने सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जो कारनामा किया है वह इस कारनामे की सभी जगह निंदा की जा रही है ।

सतर्कता विभाग की निगाहें भी हैं इस मामले पर

एसईसीएल उपक्रम के सतर्कता विभाग के महाप्रबंधक सतर्कता के द्वारा जारी पत्र क्रमांक एसईसीएल/ विजिलेंस/ 08/2020/1766 दिनांक 13/08/2020 के माध्यम से इस पूरे मामले के दस्तावेज मंगाए गए हैं अब सवाल यह उठता है कि क्या सेवा निर्वित हो चुके इस अधिकारी के ऊपर कोई बड़ी कार्यवाही हो पाएगी? या यह पत्राचार मात्र कागजी घोड़ा ही कहलाएगा और कागजो पर मात्र दौड़ता रहेगा ? ज्ञात हो कि कोल इंडिया / एसईसीएल का दोहरा मापदंड पूर्व में भी देखा गया है और इस मामले में भी देखा गया है जब कोई छोटा कर्मचारी ,श्रमिक किसी मामले में फंसता है तो उनके विरुद्ध झूठी शिकायतों को भी सही मानकर बिजलेंस विभाग और एसईसीएल का प्रबंधन तुरंत उसके खिलाफ बड़ी कार्यवाही करते हुए फण्ड,ग्रेजुवटी एवं अन्य मिलने वाले देयकों को रोक देता है और अब एक अधिकारी की बात आती है तो कई प्रकार से मामले को भटकाया जाता है और किए गए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की पुरजोर कोशिश की जाती है।

सेवानिवृत्त हो गयी एक दोषी अधिकारी

ज्ञात हो कि इस पूरे मामले में शामिल हसदेवक्षेत्र के सेंट्रल हॉस्पिटल में पदस्थ मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अहम भूमिका है जो 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो चुकी है क्षेत्र के जागरूक लोगों ने मांग की है कि सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी के देयकों को तब तक रोका जाए जब तक मामले का निपटारा ना हो जाए साथ ही मामले में शामिल अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच कराकर इनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।

मामले में आया नया मोड़ हालांकि इस मामले में नया मोड़ तब आ गया जब इसी मामले में शिकायत करने वाले कमल वैश्य ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि
मैनें कुछ दिनों पूर्व केन्द्रीय चिकित्सालय मनेन्द्रगढ में हुए पीपीईकिट, मास्क एवं अन्य मद्दों से संबंधित एसईसीएल के प्रबंधन से कुछ गंभीर शिकायते की थी जिसकी जानकारी आप सभी को हैं जिस पर कोई जांच अभी तक नहीं की गई और सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए केन्द्रीय चिकित्सालय में पदस्थ तीन फार्मसिस्टों को निलंबित कर दिया गया है परंतु मेरी शिकायत पर भ्रष्टाचार की जांच कराने के बजाय प्रबंधन द्वारा अंधेरे में तीर चलाया जा रहा है और बेगुनाह कर्मचारियों पर कार्यवाही की जा रही है आरोप भी यह लगाया जा रहा है कि उन्होने भ्रष्टाचार को उजागर क्यों किया जबकि मेरे द्वारा दिये गये दस्तावेज पूरी तरह से प्रमाणित है और कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पास से होकर गुजरे है फिर भी तीन लोगों को निलंबित करना मामले को दबाने की साजिश को दर्शाता है जब कोविड-19 के दौर में देश संकट में हैं और लोगों की जान जा रही है उस वक्त मै अखबारों में पढ़ा एवं लोगों से सुना कि कोविड-19 के नाम पर केन्द्रीय चिकित्सालय में घोटला ही घोटाला हो रहा है तब मैने जानकारी ली और हसदेव क्षेत्र के एक अधिकारी के द्वारा ही मुझे उक्त दस्तावेज प्राप्त हुए समय आने पर मै उस अधिकारी का नाम भी उजागार करुंगा मैने जो आरोप केन्द्रीय चिकित्सालय में हुए भ्रष्टाचार के लगाये है मैं उस पर अभी भी कायम हॅू और एसईसीएल के प्रबंधन से यह निवेदन कर रहा हॅू कि मैने आरोपों के संबंध में साक्ष्य भी दिया है अगर एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के अधिकारियों के द्वारा मेरे द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच नही कि जाती है तो मैं सीबीआई को शिकायत करूँगा और समस्त दस्तावेजों के साथ न्यायालय मे उपस्थित भी होऊंगा।

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