नक्सली संगठन में नहीं मिली पदोन्नति, नाराज होकर 7 लाख के इनामी दंपति ने किया समर्पण

रायपुर/बीजापुर। नक्सल संगठन में पदोन्नति नहीं मिलने और कथित तौर पर माओवादी संगठन में प्रताड़ना से तंग आकर दो माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। नक्सली प्लाटून नम्बर दो का सदस्य गोपी और उसकी पत्नी भारती ने नक्सल संगठन से पूरी तरह से तौबा कर लिया है। दोनों ने आज बीजापुर पुलिस का दामन थाम लिया। डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिंह व पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप के समक्ष दोनों ने आत्मसमर्पण किया।

नक्सल मोर्चे पर तैनात माओवादी गोपी पर पांच लाख और उसकी पत्नी भारती पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित है, पखवाड़े भर पहले बीजापुर पुलिस के समक्ष सरेंडर करने वाले गंगालूर एरिया कमेटी सदस्य गोपी मोड़ियामी को पुलिस ने मीडिया के सामने आज पेश किया। गोपी के साथ प्लाटून नंबर 2 की सदस्य भारती कट्टम ने भी सरेंडर किया है। इनामी माओवादियों के संबंध में पुलिस कप्तान कमलोचन कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि गोपी पर 73 आपराधिक मामले पंजीबद्ध है। 50 स्थाई वारंट भी लंबित है। दो दर्जन से अधिक वारदातों में शामिल रहा गोपी के सरेंडर के पीछे प्रेम और प्रताड़ना दोनाें है| गंगालूर एरिया कमेटी सदस्य गोपी 2004 में ओड़िसा के कोरापुट जिले के पुलिस लाइन थाना एवं प्रशिक्षण केंद्र पर अटैक और आर्म्स लूटने की घटना में शामिल था। मार्च 2006 में मुरकीनार कैम्प पर अटैक में भी वह शरीक था, जिसमें 11 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा 2006 में पामलवाया के पास रोड ओपनिंग पार्टी पर हमले की वारदात, जिसमें 6 पुलिस कर्मी शहीद हुए थे। 2007 में सलवा जुडूम अध्यक्ष बुधराम राणा और उसके पुत्र कमलेश्वर राणा की हत्या की घटना में वह शामिल था। कुल 17 बड़ी घटनाओं में गोपी की संलिप्तता पाई गई है।एसपी के मुताबिक गोपी के सरेंडर के बाद निश्चित ही गंगालूर एरिया माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। पूछताछ में उसने कई राज भी खोले हैं। चेरकंटी का रहने वाला गोपी 2002 में माओवादी संगठन में भर्ती हुआ था। एलओएस सदस्य के रूप में कार्य करते हुए वह कई पदों पर रहा। गोपी के मुताबिक 2012 में गंगालूर एरिया कमेटी सचिव पद से हटाकर एसीएस सदस्य बना दिया गया।संगठन के वरिष्ठ माओवादियों से मतभेद तथा बस्तर क्षेत्र का होने के कारण बार-बार नीचा दिखाकर हर सलाह को नजर अंदाज किया जाता रहा। माओवादी संगठन का सबसे पुराना कार्यकर्ता होने के बाबजूद डीव्हीसीएम पद नहीं दिया गया। पार्टी में प्रत्येक तीन माह में सदस्यों को उसके परिवार से मिलने दिया जाता है, लेकिन उसे 6 माह में परिवार से मिलने की अनुमति दी जाती थी।वहीं उसके साथ सरेंडर करने वाली भारती कट्टम 2003 में माओवादी संगठन की सदस्य बनी। आधा दर्जन से अधिक घटनाओं में शामिल रही भारती 2006 में फरसेगढ़ में सलवा जुडूम कार्यकर्ता चिन्नाराम गोटा शक में उसके चालक की हत्या की घटना में भी शामिल थी। उसके विरूद्ध बीजापुर के अलग-अलग थानों में 4 अपराध पंजीबद्ध है। कुल 6 स्थाई वारंट लंबित है। भारती ने बताया कि संगठन में रहते हुए वह गोपी के साथ एक ही एरिया कमेटी में कार्य करने की इच्छुक थी, लेकिन संगठन ने उसकी मांग को खारिज करते हुए भैरमगढ़ एरिया कमेटी में काम करने का दबाव डाला, जो उसे नागवार गुजरा। पत्रवार्ता के दौरान डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिंह, सीआरपीएफ 168 बटा कमांडेंट विनय कुमार मौजूद थे।

 

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