श्री अजीत जोगी अमर हैं, महात्मा जोगी रहेंगे अमर : हुलेश्वर जोशी

०० अजीत जोगी कौन हैं?*

रायपुर| एक गरीब छत्तीसगढ़िया किसान के बेटा हैं, असुविधाओं में जीने और पढ़ने वाले मेरिटधारी स्टूडेंट के रूप में भी जान सकते हैं। आप उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में जान सकते हैं, आप उन्हें आईपीएस, आईएएस, इंजीनियर और उकील के नाम से से जान सकते हैं। आप उन्हें प्रशासनिक अधिकारी के बजाय राजनैतिक व्यक्ति के रूप में जान सकते हैं उन्हें सांसद, विधायक, विपक्ष के दमदार नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता के रूप में भी जान सकते हैं। फिर भी ख्याल रखना महात्मा जोगी वास्तव में क्या और कितना थे उसे कोई नहीं जान सकेगा। सबकी अपनी दृष्टिकोण है आप उन्हें ज्यादा जानें का फिर कम; आप उनके प्रसंशक हों या निंदक कोई बात नहीं उनके दिशा में उनके बनाये और चले रास्ते में चलकर देखिए वह “गुरु” से  कम नही होंगे।

*महात्मा जोगी कितना गलत हैं?*

मनुष्य अत्यंत बुद्धिमान प्राणी है, हर मनुष्य के अपने अलग अलग दृष्टिकोण है, हर व्यक्ति के पास अपनी अपनी तराजू है, हर व्यक्ति के आंखों में अपने अलग अलग रंग के चश्मे लगे हैं, हर आदमी समीक्षा और उचित अनुचित का बोध भी रखता है। इसके बावजूद कुछ चंद लोग मेरे (लेखक) जैसे भी हैं जिन्हें कल्याणकारी होने से मतलब नहीं, मैं अत्यंत स्वार्थी व्यक्ति हूँ अपने हिसाब से दुनिया को स्थापित करके देखना चाहता हूं। बचपन में हमारा गर्मियों का दिन जेठू गौटिया के आम के बगीचे ही गुजरता था, बहुत छोटे से लेकर युवा होने तक आम के फल लगे आम के बगीचा हमें अत्यंत आकर्षित करते। एक दिन मेरा एक साथी बोलने लगा “ईश्वर अत्यंत नासमझ है।” मैंने पूछा क्यों? क्या हुआ? तुम ईश्वर के ऊपर प्रश्न खड़ा कर रहे हो? उन्होंने कहा आम हम सबको पसन्द है फिर उन्होंने आम को कद्दू जैसे बड़े आकार के और डूमर जैसे जड़ से लेकर डाली के अंतिम छोर तक फलने वाले नहीं बना पाया। इसका मतलब आप सोचिए ईश्वर कितने अदूरदर्शी थे, ये बात मेरे दूसरे साथी भी मानने लगे थे, मैं भी मानने को मजबूर था क्योंकि मुझमें भी अविकसित बुद्धि जो थी। एक दिन रात में मेरे दादा जी हम भाई बहनों को कहानी सुना रहे थे तब मैंने उनसे पूछा क्या ईश्वर अत्यंत नासमझ थे? तब दादा जी सुनकर हँसने लगे, फिर चुप होकर समझाने लगे बोले हम ईश्वर को मानते हैं या नहीं यह बात महत्वपूर्ण नहीं आप आम को ईश्वर द्वारा निर्मित मानें या फिर क्यों न प्रकृति की देन मगर आम का पेड़ अत्यंत संतुलित आकार के होते हैं और उसके फल भी। आगे उन्होंने एक बड़ी कहानी भी सुनाया जिसमें बुद्धिलाल ईश्वर का गलती खोजने निकला रहता है तभी थककर रास्ते में ही लगे आम के पेड़ के नीचे बैठकर ईश्वर से कहता है देखो तुम कितने नासमझ हो आम के पेड़ को इतना विशालकाय बना दिया मगर फल को इतना छोटा और मनुष्य के सामान्य पहुच से दूर रखें हो। बुद्धिलाल बड़बड़ाते हुए ईश्वर को कोशते हुए वहीं आराम करने लगता है अचानक आंख खुलती है तो लाठी भांजने लगते हैं क्योंकि किसी ने उसके शिर को मार दिया था, आजु बाजू और पेड़ के पीछे देखा तो समझ मे आया कोई नही है। सोचा पक्का भगवान आकर उन्हें मार गए होंगे, भगवान उनसे जलने जलने लगे हैं, आसमान की ओर चिल्लाकर बोलते हैं तुम धन्य हो भगवान आज तुम्हारी दुश्मनी भी देख लिया तुम कितने कमजोर हो जो छिपकर मुझपर वार कर रहे हो, आओ हिम्मत है तो मेरे सामने आकर कुश्ती कर लें। इतना बोलते ही एक पके आम उनके सामने ही गिर गया, फिर दूसरा तीसरा….. सैकड़ों आम गिरने लगे क्योंकि जोर की आंधी चलने लगी थी। उन्होंने समझा अब तो पक्का भगवान उनके दुश्मन बन गए हैं सो उन्होंने लाठी भांजते हुए दौड़ते दौड़ते कोसों दूर अपने घर पहुच गए, पत्नी पूछती है भगवान के कितने गलती निकाले? वह बुद्धिलाल बोलने लगे गलती तो करोड़ निकाल दूँ मगर अब वे मेरे दुश्मन बन गए हैं जैसे तैसे जान बचाकर आया हूँ कहकर पूरी वृत्तांत अपनी पत्नी को बताया। पत्नी पेट पकड़ पकड़ कर हँसने लगी, बुद्धिलाल को क्रोध आने लगा अंततः पत्नी थोड़ी देर उनके मूर्खता से वापस लौटकर उन्हें समझाई तो समझ में आया कि ईश्वर सही हैं बुद्धिलाल ही, व्यर्थ के मानसिकता में पड़े थे। यदि आप भी बुद्धिलाल के जैसे इंसान हैं तो आप महात्मा जोगी के लाखों गलती, असफलता और कमजोरी निकालने का प्रयास कर सकते हैं।

महात्मा जोगी के बारे में, चंद बातें

# श्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी केवल चंद नाम के मोहताज नहीं, कुछ उपलधियों तक सीमित नहीं वे छत्तीसगढ़ राज्य के हर कण में विद्यमान रहेंगे; क्योंकि श्री अजीत जोगी भारतमाँ के रतन बेटा है, छत्तीसगढ़ महतारी के दुलरुआ हीरा बेटा है।

# श्री जोगी; श्री अजीत जोगी को केवल अजीत प्रमोद कुमार जोगी ही नहीं बल्कि महात्मा जोगी के नाम से भी जाना जाएगा, हां वही अजीत जोगी जो जाति, धर्म और राजनीतिक से भी दूर काबिलियत और संघर्ष का रोल मॉडल हैं। महात्मा जोगी कभी हारने वाले नहीं सदैव जीतने वाले रहे हैं।

# महात्मा जोगी जो गरीब और शोषित छत्तीसगढ़िया के लिए भगवान से कम नही थे।

# महात्मा जोगी हमें कई वर्ष नही, कई दशक नहीं बल्कि सैकड़ों शताब्दी तक आपको संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

# महात्मा जोगी जो कई शताब्दियों तक जिंदा रहेंगे।

# महात्मा जोगी जिंदगी की जंग हारे नहीं बल्कि जीत चुके हैं।

# जो उनके विरोधी हैं जो उन्हें अपने किसी स्वार्थगत कारणों से बदनाम करने की कोशिश करते रहे उनसे भी निवेदन हैं अब आपके स्वार्थ के बीच कोई अटकाव नही है; मगर ख्याल रखना महात्मा जोगी आपके अंदर भी जिंदा हैं, आपके जीवित रहते वे आपके दिलोदिमाग से अलग नही होंगे। क्योंकि महात्मा जोगी जिंदा हैं।

 

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