अंतर राशि की किश्तें बांध भद्दे मजाक पर आमादा सरकार को किसान सूद समेत करारा जवाब देंगे : भाजपा

०० किश्तों में भुगतान को लेकर लिया गया प्रदेश सरकार का फैसला किसानों के साथ आपराधिक अन्याय : सोनी

०० किसानों के आत्म-सम्मान को लहूलुहान करने वाली सरकार अंतर राशि देकर कोई अहसान नहीं कर रही : साहू

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार सत्ता में आते ही किसानों के विश्वास और आत्म-सम्मान से खिलवाड़ करने पर आमादा रही है। भाजपा ने कहा कि किसानों के धान मूल्य की अंतर राशि का चार किश्तों में भुगतान करने वाली सरकार न्याय योजना के नाम पर इस कोरोना-काल में किसानों के साथ जो भद्दा मजाक कर रही है, अन्नदाता किसान उसे पूरी गंभीरता से ले रहा है और समय आने पर वह इस मजाक का सूद सहित करारा जवाब भी देगा।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष व संसद सदस्य सुनील सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी कर अपने नाकारेपन का ही परिचय दिया है। प्रदेश सरकार बताए कि जब कोरोना संकट से पहले ही प्रदेश सरकार ने अपने बजट में धान मूल्य की राशि के लिए प्रावधान कर दिया था तो फिर ऐसी कौन-सी विपरीत परिस्थिति आ गई कि सरकार धान मूल्य की अंतर राशि का किश्तों में भुगतान कर रही है? जबकि प्रदेश सरकार ने कोरोना काल में भी किसानों को एक पैसे की भी कोई मदद अपनी ओर से मुहैया नहीं कराई। श्री सोनी ने कहा कि एक तरफ कोरोना संकट के चलते हर वर्ग के लोग आर्थिक दिक्कतों से दो-चार हो रहे हैं, तब प्रदेश सरकार का अंतर राशि के किश्तों में भुगतान को लेकर लिया गया फैसला किसानों के साथ आपराधिक अन्याय है। भाजपा संसद सदस्य चुन्नीलाल साहू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शुरू से ही अपने किसान विरोधी चरित्र का प्रमाण दिया है। धान खरीदी की शुरुआत से ही प्रदेश सरकार किसानों से एक तरह की दुश्मनी भंजाती नजर आई है। पहले खरीदी को एक माह टाल दिया, फिर धान का रकबा घटा दिया, टोकन देने के लिए नित-नए तुगलकी फरमान जारी कर किसानों को परेशान किया, बारदाना तक देने में आनाकानी की। फिर धान भंडारण को लेकर किसानों पर छापेमारी कर किसानों को अपराधी साबित करने का शर्मनाक कृत्य किया। कुल मिलाकर, सरकार ने किसानों के आत्म-सम्मान को लहूलुहान करने का काम किया। श्री साहू ने कहा कि आज भी किसान अपना धान बेचने के लिए परेशान हो रहा है और सरकार उसके हक के पैसे देने में जी चुरा रही है। धान मूल्य की अंतर राशि किसानों के गाढ़े पसीने और जायज हक की कमाई है जिसे देकर हुए प्रदेश सरकार किसानों पर कोई अहसान नहीं कर रही है।

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