प्रवासी मजदूरों के प्रति प्रदेश सरकार की यह दुर्भावना हैरत भरी : विक्रम उसेण्डी

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेण्डी ने प्रवासी मजदूरों की वापसी के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को अनुमति नहीं देने के लिए प्रदेश सरकार की आलोचना की है। श्री विक्रम उसेण्डी ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के प्रति प्रदेश सरकार की यह दुर्भावना हैरत भरी है क्योंकि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुछ दिनों पहले तक न केवल राजनीति की अपितु श्रमिकों की निःशुल्क वापसी के नाम पर केन्द्र सरकार के साथ सौदेबाजी जैसा कृत्य भी किया था।
श्री उसेण्डी ने कहा कि भारतीय रेलवे रोज तीन सौ श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाकर विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन के चलते फंसे श्रमिकों को उनके गृह प्रदेश वापस लौटाने का काम करने को तैयार है। इसके लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आग्रह पर 12 सौ ट्रेनें पूरी तरह आरक्षित रखी गई है ताकि श्रमिकों को लेकर राज्य सरकारों के आग्रह पर ये ट्रेनें राज्यों की ओर रवाना की जा सकें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झारखंड के साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार इस सुविधा का लाभ नहीं उठा रही है और इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अनुमति नहीं दे रही है। इसके चलते प्रवासी श्रमिकों को अपने घरों से दूर रहकर कष्ट सहना पड़ रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री विक्रम उसेण्डी ने कहा कि रेल मंत्री श्री गोयल के मुताबिक एक ओर जहां उत्तर प्रदेश के लिए चार सौ ट्रेनों तथा बिहार के लिए दो सौ ट्रेनों का परिचालन किया गया है। श्री गोयल ने गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के इस रवैये पर अफसोस भी जताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री विक्रम उसेण्डी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रवासी मजदूरों की वापसी को लेकर दुराग्रह दर्शा रही है और उनकी वापसी के प्रति उदासीन है। कुछ दिनों पहले गुजरात से चलने वाली दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को भी रवाना होने पहले ऐन वक्त पर रोकना पड़ा क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। रेल मंत्री द्वारा उपलब्ध आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रवासी मजदूरों के नाम पर कोरी सियासी बाते करने में मशगूल है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के प्रति प्रदेश सरकार की संवेदनहीनता का यह कोई पहला उदाहरण नहीं है। कोरोना संकट में लॉकडाउन के चलते विभिन्न राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के वे श्रमिकजो ई-पास व अनुमति लेकर छत्तीसगढ़ आ रहें है उन्हें प्रदेश सरकार प्रदेश की सीमा पर ही रोककर उन्हें प्रदेश में आने की अनुमति नहीं दे रही है और सीमा से ही उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। एक गर्भवती महिला और एक बीमार वृद्ध को सीमा से ही वापस लौटाकर प्रदेश सरकार और उसके नौकरशाहों ने जिस अमानवीयता का परिचय दिया है उसकी कीमत तो समय आने पर प्रदेश सरकार को चुकानी ही पड़ेगी। उक्त बीमार वृद्ध व्यक्ति की मौत हो गई थी। श्री शर्मा ने कहा कि विभिन्न राज्यों में दाने-दाने को तरस रहे श्रमिकों की भी प्रदेश सरकार कोई सुध नहीं ले रही है। प्रदेश सरकार की ओर से उन मजदूरों के खातें में अब तक एक नया रूप्या भी जमा नहीं किया गया है जिसके चलते वे बेहद परेशान हैं। प्रदेश की सीमा और प्रदेश के क्वारेंटाइन सेंटर्स में आ रहे प्रवासी मजदूरों के पर्याप्त परीक्षण और रहने व खाने-पीने का भी पुख्ता इंतजाम नहीं है।

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