ज़रा सोचिए सरकार! क्या गुड़ाखू नशीले पदार्थों की श्रेणी में आता है या नहीं? : प्रकाशपुंज पांडेय 

रायपुर| छत्तीसगढ़ के समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने एक बेहद ही गंभीर मुद्दे पर मीडिया के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि, गुड़ाखू गुड, तंबाकू और बीड़ी पत्ते से बना एक देसी मंजन है जो बेहद ही ख़तरनाक है। जिसके उपयोग से व्यक्ति बेवजह ही बहुत ही ख़तरनाक बीमारियों को न्योता देता है। डॉक्टरों की रिसर्च से पता चला है कि इससे कैंसर जैसी भयानक बीमारी भी हो सकती है। अब प्रश्न यह है कि क्या इसे बीड़ी, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, पान मसाला आदि प्रकार के नशीले पदार्थों की श्रेणी में आता है या नहीं? क्योंकि देश के ग्रामीण अंचलों में इससे एक सस्ते नशे के रूप में देखा जाता है। ग्रामीण लोग इसे सुबह से रात तक कई बार इस्तेमाल करते हैं जिससे तंबाकू का जो हल्का नशा होता है वह होने स्फूर्ति देता है लेकिन असल में यह एक प्रकार का गलत नशा है जिसका व्यक्ति आदी हो जाता है।

अब जब छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने रायपुर में बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा, पान मसाला जैसे नशीले पदार्थों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है तो यह देखने वाली बात होगी कि गुड़ाखू को सरकार कौन सी श्रेणी में मानती है क्योंकि नशा तो ये भी है, हानिकारक तो ये भी है, बीमारी तो इससे भी फैलती है। मेरी राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्य सरकार से अपील है कि इस संगीन विषय को जनहित में देखते हुए कोई ठोस कदम उठाएँ ताकि अगर कहीं इससे समाज में व्यक्ति को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से नुकसान हो रहा हो तो उन्हें बचाया जा सके। पहले ही देश में कोरोना नामक वायरस से बहुत सा संक्रमण फैला हुआ है।

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