मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री के रूप में प्रस्तुत किया दूसरा बजट

०० किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना: 5100 करोड़ रूपए का प्रावधान, किसानों को मिलेगी समर्थन मूल्य के अंतर की राशि

०० दो वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षाकर्मियों का 1 जुलाई 2020 से संविलियन
०० वर्ष 2020-21 के लिए कोई नया कर प्रस्तावित नहीं
०० डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के लिए 550 करोड़ और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के लिए 50 करोड़ का प्रावधान
०० बेमेतरा, जशपुर, धमतरी और बालोद जिले के अर्जुंदा में उद्यानिकी महाविद्यालय और लोरमी में कृषि महाविद्यालय की घोषणा
०० तांेगपाल, कंुआकोण्डा में छात्रावास सहित नवीन महाविद्यालय: सुकमा, कोण्डागांव, नारायणपुर, बीजापुर और तखतपुर में कन्या महाविद्यालय खुलेंगे

०० इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में होगी खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना

०० राजपुर (धमधा) में फिशरीज पॉलिटेक्निक की स्थापना, बेमेतरा और तखतपुर में खुलेंगे डेयरी डिप्लोमा महाविद्यालय
०० सिंचाई परियोजनाओं के लिए 1893 करोड़ रूपए का प्रावधान, गिरौदपुरी में गुरूकुल विद्यालय की स्थापना, कंडेल में महाविद्यालय
०० 3 इंजीनियरिंग कॉलेज और 5 पॉलिटेक्निक कॉलेज में इंटरनेट ऑफ थिंग्स एवं रोबोटिक्स की प्रयोगशालाएं शोध के लिए

रायपुर| मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट प्रस्तुत किया। श्री बघेल ने कहा कि यह संजीवनी बजट है। प्रदेश की अर्थ व्यवस्था के लिए, गांवों और किसानों के लिए, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक और आम जनता से लेकर हर वर्ग के लिए यह बजट संजीवनी बजट साबित होगा। बजट में विगत वर्ष के प्रावधानों को जारी रखा गया है और नये प्रावधान भी किए गए हैं। बजट मुख्य रूप से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़-स्वस्थ एवं सुपोषित नई युवा पीढ़ी के निर्माण की भावना के साथ सुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी एवं विस्तार तथा युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक एवं उत्पादक रूप  में उपयोग कर उनकों राज्य के सशक्त संसाधन के रूप में विकसित करने पर केन्द्रित है। बजट में कोई भी नया कर प्रावधान नही किया गया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के दूसरे बजट का भाषण में कहा कि आधुनिकता तथा परम्परा का साम्य हमारे विकास का बुनियादी दर्शन है। यही कारण है कि हमारे विकास के मॉडल मंे यदि हम राज्य के नदी-नालों, धरती-जंगल और तीज-त्यौहारों को शामिल करते हैं तो दूसरी ओर किसानों के खातों को अपडेट करने के लिये जियो-रिफरेंशिंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं। हमारा विकास का मॉडल समावेशी भी है। विकास की योजनाओं का लाभ समाज के सबसे कमजोर लोगों तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। इसीलिये हम कर्ज से दबे किसानों और गरीबी के कारण कुपोषित महिलाओं और बच्चों के विकास की योजनाएं बनाते हैं। चिन्ता का विषय है कि राज्य बनने के 19 वर्षाें के बाद भी हमारी महिलाओं और बच्चों के कुपोषण की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।  राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी स्लम में रहने वाले परिवारों को हमने कुपोषण और बीमारियों से प्रतिदिन लड़ते देखा है। इसीलिये कुपोषण को दूर करने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सभी को जागरूक करने के लिये सुपोषण अभियान शुरू किया गया है। प्राथमिक बीमारियों की जांच एवं उपचार के लिये अब हमारी स्वास्थ्य टीम के सदस्य साप्ताहिक हाट बाजारों एवं शहरी स्लम क्षेत्रों में स्वतः पहुंच कर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं और जरूरत के अनुसार परामर्श एवं उपचार किया जा रहा है। जब जनता का दर्द शासन अनुभव करने लगता है और जनता की जरूरत पर प्रशासन उसके पास पहुंचने लगता है तो समस्याओं का निदान आसान हो जाता है। हमारी मंशा केवल कुपोषण एवं बीमारियों को कम करने तक सीमित नहीं है। हम तो इसकी जड़ में जाकर इसके मुख्य कारण गरीबी को भी कम करना चाहते हैं। इसके लिये अब तक 17 लाख 24 हजार किसानों का कृषि ऋण माफ किया जा चुका हैं। ऋण माफी से धान पंजीयन में किसानों की संख्या बढ़ी है। 2019-20 में अब तक 82 लाख 81 हजार मैट्रिक टन धान की रिकार्ड खरीदी हो चुकी है। ग्राम सुराजी योजना के अंतर्गत नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी विकास के कार्याें मंे भी ग्रामीणों का बढ़-चढ़कर सहयोग प्राप्त हो रहा है। नरवा संरक्षण के कार्याें से भू-जल के स्तर में सुधार हो रहा है। गौठानों में पशुओं को चारा और स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा मिल रही है। घुरूवा के प्रोत्साहन से बायोगैस संयंत्र एवं जैविक खाद निर्माण के लिये लोग स्वतः सामने आ रहे हैं। बाड़ियों के पुनर्जीवन से ग्रामीणों की आय और पोषण में वृद्धि हुई है। राज्य में गन्ने के रस से इथेनॉल बनाकर उसे शासकीय पेट्रोलियम कम्पनियों को विक्रय करने के लिये हमने सार्थक कदम उठाए हैं। इसी प्रकार धान से इथेनॉल निर्माण हेतु केन्द्र शासन से अनुमति प्राप्त करने के लिये निरंतर प्रयास जारी है। इन योजनाओं से किसानों को धान एवं गन्ने का अधिक मूल्य मिलेगा, युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा, उद्योग-व्यापार में वृद्धि होगी तथा पेट्रोलियम आयात पर राष्ट्र के विदेशी धन की भी बचत होगी। गरीबी में कमी लाने के लिये स्थानीय आवश्यकता के आधार पर जिलेवार कार्ययोजना बनाने का काम शुरू किया गया है। अति पिछड़ा जिला दंतेवाड़ा में गरीबी के प्रतिशत को राष्ट्रीय गरीबी औसत 22 प्रतिशत के बराबर लाने की मुहिम शुरू हो चुकी है। इसके लिये जिले में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करने के साथ-साथ राज्य बजट से भी रूपये 20 करोड़ दिया जायेगा। हमारा मानना है कि शासन-प्रशासन के प्रयास एवं जनता की सहभागिता से गरीबी के स्तर में प्रभावी कमी आएगी। सुपोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी शीघ्र ही हमारा राज्य राष्ट्रीय स्तर के मानव विकास सूचकांको के समकक्ष होगा।
आर्थिक स्थिति :- भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा सदन के सामने प्रस्तुत करता हूँ। राज्य के विगत वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार स्थिर दर पर वर्ष 2018-19 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद मंें 6.08 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान किया गया था किन्तु अद्यतन प्रस्तुत त्वरित अनुमान के अनुसार 7.06 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है। मंदी के राष्ट्रीय आंकडों के बीच यह वृद्धि राज्य के लिये एक सुखद संकेत है। वर्ष 2019-20 में स्थिर भाव पर राज्य में कृषि क्षेत्र में 3.31 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र में 4.94 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। इस प्रकार कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में राज्य की अनुमानित वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्रों में अनुमानित वृद्धि दर क्रमशः 2.8 एवं 2.5 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। प्रचलित भाव पर राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2018-19 में 3 लाख 04 हजार करोड़ से बढ़कर वर्ष 2019-20 में 3 लाख 29 हजार करोड़ होना अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.26 प्रतिशत अधिक है। विगत वर्ष अनुमानित प्रति व्यक्ति आय 96 हजार 887 की तुलना में वर्ष 2019-20 में प्रति व्यक्ति आय 98 हजार 281 रूपये का अनुमान है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 6.35 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2019-20 के केन्द्रीय बजट में राज्य के लिये अनुमानित केन्द्रीय करों में कमी आयी है। आगामी वर्ष में केन्द्र से प्राप्त होने वाली जीएसटी क्षतिपूर्ति में भी कमी संभावित है। इससे राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है किन्तु संतोष का विषय यह है कि राज्य सरकार की नीतियों एवं प्रयासों से राज्य के स्वयं के संसाधन 11 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।

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