राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों के आकलन में छत्तीसगढ़ बना रोल मॉडल

रायपुर| छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा में लगातार नवाचार और गुणवत्ता शिक्षा को निरंतर बल प्रदान किया जा रहा है। कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कूली बच्चों का राज्य स्तरीय आकलन में 43 हजार 824 स्कूलों के 28 लाख 93 हजार 738 बच्चों का गुणवत्ता सुधार हेतु आकलन किया गया। विगत एक वर्ष में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया गया राज्य स्तरीय आकलन राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों के आकलन के लिए रोल मॉडल बन गया है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी निहित क्षमताओं का सर्वश्रेष्ठ परिवर्तन कर सके। इसमें शिक्षक अपनी सभी विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पहचानकर विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ाने के लिए कार्य कर सकेंगे। राज्य स्तर पर आकलन की रिपोर्ट अत्यंत उपयोगी है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षा व्यवस्था अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को उनकी पहुंच सीमा के अंतर्गत विद्यालय उपलब्ध कराने कटिबद्ध है। साथ ही शाला में दर्ज प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने प्रयासरत है। शासन के प्रयास से राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दुर्बल वर्ग के विद्यार्थियों को शालाओं में उनकी जनसंख्या प्रतिशतता के क्रम में शासन द्वारा सफलता प्राप्त की गई है।

आई.सी.टी. और स्मार्ट क्लास– प्रदेश के चार हजार 330 शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में आई.सी.टी. योजना प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत लैब साइट डिजिटल क्लास रूम प्रारंभ किया गया है। विद्यालयों में स्क्रीन और प्रोजेक्टर के माध्यम से मल्टीमीडिया विषय वस्तु सहायता से शिक्षण कार्य किया जा रहा है। इससे शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के बच्चे लाभान्वित होंगे। समस्त पाठ्य सामग्री छत्तीसगढ़ बोर्ड एवं लर्निंग आउटकम से मैप की गई है।

दीक्षा– मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ मिलकर एक अभिनव पहल की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच राज्यों आंध्रप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को चैम्पियन राज्य का दर्जा देकर कार्य प्रारंभ हुआ है। राज्य में हिन्दी माध्यम की कक्षा पहली से दसवीं तक की समस्त पाठ्य पुस्तकों में 3040 क्यू.आर.कोड अंकित कर ’ एनजाईस्ड टेक्स्ट बुक’ में परिवर्तित कर लिया गया है। जिसमें आडियो-वीडियो, पीपीटी एवं पी.डी.एफ. दस्तावेज के माध्यम से अतिरिक्त रूचिकर सामग्री शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई हैं। जीतने के लिए जीत जरूरी है की तर्ज पर कार्य कर हिन्दी माध्यम एवं बहूभाषा, छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोढ़ी, कुडूख, सरगुजिया पर ’ई’ कन्टेंट तैयार किया गया है। इसे विद्यार्थियों तक पहुंचाकर देश में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो गया है।

मल्टी मीडिया टेक्स्ट बुक – कक्षा नवमीं और दसवीं की विज्ञान, गणित और अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों को मल्टी मीडिया पाठ्यपुस्तक में तैयार किया गया है। जिसमें विभिन्न गतिविधियों को करके दिखाया गया है। मल्टी मीडिया एप को ’गूगल प्ले’ में जाकर डाउनलोड कर पाठ्यपुस्तकों का उपयोग किया जा सकेगा।

शिक्षा का अधिकार की निरंतरता अब बारहवीं कक्षा तक – निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम अंतर्गत कक्षा आठवीं उत्तीर्ण बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता के लिए राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है। इसमें प्रदेश के निजी विद्यालयों में अध्ययनरत चार हजार 899 बच्चों को कक्षा नवमीं में अध्यापन के लिए व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा इस संबंध में निर्देश भी जारी किए हैं।

अतिथि शिक्षक – बस्तर एवं सरगुजा संभाग में एक हजार 885 और मॉडा पाकेट क्षेत्र में 631, गणित, विज्ञान एवं वाणिज्य आदि विषयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए नवीन भर्ती  और शालाअें में पदस्थापना होने तक विद्यार्थियों के शिक्षण कार्य में बाधा न हो इसके लिए अतिथि शिक्षक रखे जाने का निर्णय लिया गया है। इसका दायित्व जिला शिक्षा अधिकारी और शाला प्रबंध समिति को सौपा गया है।

शिक्षकों की नियमित सीधी भर्ती – राज्य शासन द्वारा प्रदेश में 14 हजार 560 सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

टीम एप – राज्य में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत सम्पूर्ण शिक्षा आकलन एवं प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है। एन.आई.सी. के सहयोग से 51 मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे। इसके अंतर्गत विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थियों की जानकारी का संकलन किया जा रहा है। विद्यार्थियों की जानकारी एक बार दर्ज की जाएगी एवं उनकी इस पूरी शिक्षा पूर्ण होने तक उनके अधिगम स्तर की जानकारी का संधारण किया जाएगा। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अंतर्गत समस्त योजनाओं की ट्रैकिंग की जाएगी। साथ ही शिक्षकों की स्थापना संबंधी कार्य में भी इससे सहायता मिलेगी।

मध्यान्ह भोजन – शालाओं में किचन गार्डन- नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी अभियान अंतर्गत ऐसी शालाओं में जिनमें अहाता तथा पानी की व्यवस्था है, वहां नरेगा एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से प्रत्येक गांव के लिए एक आदर्श बारी (किचन गार्डन या पौष्टिक वाटिका) विकसित की जा रही है। प्रदेश में अब तक लगभग 10 हजार शालाओं किचन गार्डन तैयार किए गए हैं।

मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत बच्चों को दूध पिलाने का प्रावधान – राज्य की 10 आकांक्षी जिलों में दूध बच्चों को खीर के रूप में सप्ताह के एक दिन प्रदान किया जा रहा है। राज्य की चार जिलों दुर्ग, गरियाबंद, कांकेर और सूरजपुर में सप्ताह में दो दिन फ्लेवर्ड मीठा सोया दूध प्रदान किया जाना है। पेण्ड्रा और खड़गवां विकासखण्ड में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रतिदिन नास्ता दिया जा रहा है।

 

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