दो साल से अधूरा है कोटा ब्लाक के आमामुडा पंचायत में आंगनबाडी केन्द्र 

०० जनपद सदस्य और सभापति है ठेकेदार, आंगनबाड़ी भवन नही बनने से हो रही परेशानी 

संजय बंजारे

करगीरोड कोटा|  जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत आने वाली ग्राम आमामुड़ा पंचायत में पिछले दो साल से आंगनबाड़ी भवन बन रहा है लेकिन दो साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया । सूत्रों के अनुसार निर्माण राशि की दो तीन किश्त ठेकेदार को दे दी गई है लेकिन जनपद के अधिकारियों के साथ ही महिला बाल विकास विभाग ने भी इसके निर्माण की तरफ कोई रूची नहीं दिखाई कि आखिर आंगनबाड़ी भवन का हाल क्या है और दो साल से इसका निर्माण क्यो रूका है ।

आमामुड़ा ग्राम पंचायत में दो आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत हुए है जिनमें से एक आमामुड़ा में और एक पंचायत के आश्रित ग्राम सेमीपानी में स्वीकृत हुआ है । आमामुड़ा का भवन कोई प्रजापति बना रहा है तो सेमीपानी का भवन जनपद के सभापति और जनपद सदस्य अरविंद जायसवाल बना रहा है । आमामुड़ा का भवन डोर लेंटर तक बन के रूक गया है तो वहीं सेमीपानी का आंगनबाड़ी भवन नींव तक ही उठा फिर रूक गया । जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे पूरा कराने की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया क्यों ? कारण अज्ञात है लेकिन आप समझ सकते हैं। कोटा जनपद में ऐसा ही हो रहा है यहां के सभापति अरविंद जायसवाल ने साल भर पहले आमामुड़ा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम सेमीपानी में छोटे छोटे बच्चों के लिए बनने वाले आंगनबाड़ी भवन के ठेका ले लिया । नेता ठेका ले भी सकते हैं क्योंकि ना तो नेता बनने के लिए योग्यता की जरूरत है और ना ही नेता के ठेकेदार बनने के लिए । इसलिए पंचायत ने 2017-18 में बनने वाले आंगनबाड़ी का ठेका नेताजी को दे दिया फिर क्या था आंगनबाड़ी को ना तो बनना था न बना। सूत्रों की माने तो आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की राशि सीधे ठेकेदार के खाते में जा रही है इसलिए पंचायत कुछ कर नहीं पा रहा है । इस पंचायत में दो आंगनबाड़ी बनना है जिसके लिए पंचायत ने अधिकारियों के कहने पर दोनों ठेकेदार को छयासी छयासी हजार की राशि का पहला चेक दिया उसके बाद से निर्माण की राशि जनपद के द्वारा सीधे ठेकेदारों को दी जाने लगी। दो साल से जब पंचायत में आंगनबाड़ी का काम अधुरा रहा और ठेकेदार ध्यान नहीं देने लगे तो पंचायत ने कई बार उन्हें मोैखिक रूप से आंगनबाड़ी को पूर्ण कराने के लिए कहा बाद में लिखित नोटिस भी जारी की ओैर तो और एक ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर भी करवा दिया गया लेकिन नेताजी यहां भी बच गए क्योंकि नेता जो ठहरे। बहरहाल ये जांच का विषय हो सकता है कि सेमीपानी में बन रहे आंगनबाड़ी का काम अभी तक क्यों पूरा नहीं हुआ ? साढे छह लाख में बनने वाले आंगनबाड़ी भवन के लिए जनपद ने कितने पैसे ठेकेदार को भुगतान कर दिया है ? और ठेकेदार क्यों आंगनबाड़ी भवन को नहीं बना रहा है।अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही की सजा गांव के वो छोटे छोटे बच्चे भुगत रहे हैं जिनके लिए ये आंगनबाड़ी भवन बनना है। जिम्मेदारों को थोड़ी तो शर्म आनी चाहिए कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए भवन का निर्माण शिघ्र करवाया जाए लेकिन ऐसा होना ही नहीं है सरकारी काम है गांव जंगल की तरफ देखता कौन है ? और देख भी लेगा तो करेगा क्या ? क्योंकि जितने पैसों का भुगतान हुआ है उसमें इंजिनियर एसडीओ और दूसरे अधिकारियों को भी तो कमीशन मिला है। 

 “निर्माण कार्य को पूर्ण करने के लिए कई बार मौखिक रूप से कहा गया है तीन बार लिखित नोटिस भी दिया गया है लेकिन अभी तक निर्माण कार्य को पूरा नहीं किया गया है

अभिषेक शर्मा, इंजिनियर, जनपद पंचायत कोटा

भवन का ठेका जनपद पंचायत के सभापति अरविंद जायसवाल को दिया गया है लेकिन कुछ विवादों के कारण काम बंद है

ललिता पैकरा, सरपंच, आमामुड़ा

सरपंच ने अरविंद जायसवाल को ठेका दिया था, डीपीसी लेबल तक काम हुआ है। ठेकेदार से काम पूरा करने कहा गया तो उनका कहना था सरपंच से हिसाब पूरा हो गया है। आंगनबाड़ी निर्माण का पैसा भी जनपद से सीधे ठेकेदार के खाते में ट्रांसफर हुआ है इसलिए हम कुछ नहीं कर पा रहे है।

सुनिता मरावी, सचिव, आमामुडा

बात सही भी हैं जनपद पंचायत ने जब सीधे ठेकेदार को पैसे दिए हैं तो फिर जवाबदारी पंचायत की क्यों? जवाबदारी तो जनपद के अधिकारियों को उठानी चाहिए लेकिन पता ये भी चला है कि जनपद के अधिकारियों ने कल ही आनन फानन में ग्राम पंचायत को नोटिस जारी किया है कि सेमीपानी आंगनबाड़ी का काम शिघ्र पूरा करवाए जाए । पंचायत कहां से पूरा करवाएगी ये भगवान जाने या नोटिस निकालने वाले अधिकारी।

 

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