सरकार की गलत नीति के चलते छत्तीसगढ़ का स्टील उद्योग अब बिजली की बढ़ी हुई कीमतों का झटका झेल रहा है : भाजपा

०० भूपेश सरकार की गलत नीति से छत्तीसगढ़ के उद्योग दम तोड़ देंगे
०० औद्योगिक वातावरण को दूषित और उद्योगों को हतोत्साहित कर रही भूपेश सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट को विद्युत दर पर मिलने वाले अनुदान को लेकर भाजपा ने छत्तीसगढ़ सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता श्रीचंद सुन्दरानी ने भूपेश बघेल सरकार पर छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील उद्योगों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीते छः महीने में इस सरकार की लापरवाही और लचर नीति के चलते आज छत्तीसगढ़ का मिनी स्टील उद्योग दम तोड़ने के कगार पर खड़ा है। श्री सुन्दरानी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील उद्योग को मिलने वाले विद्युत दर अनुदान को न सिर्फ छीनने का काम किया है अपितु ऐसा करके स्वयं सरकार ने अपने ही प्रदेश के उद्योगों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार किया है कि छत्तीसगढ़ के स्टील उद्योग सीमावर्ती उद्योगों से प्रतिस्पर्धा में ही पिछड़ने लगे हैं। देश के उद्योग में बड़ी उत्पादक भागीदारी वाले छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार की गलत नीतियों के चलते अब बिजली की बढ़ी हुई कीमतों के कारण मिनी स्टील प्लांटों में तालाबंदी की नौबत आ गयी है। तालाबंदी से इन मिनी स्टील प्लांटों से जुड़े हजारों मजदूर सड़कों पर आ जाएंगे जिसकी जिम्मेदारी क्या राज्य की भूपेश बघेल सरकार लेगी? निर्माण समेत दूसरे उद्योगों के भी इससे प्रभावित होने की संभावना है।
श्री सुन्दरानी ने राज्य सरकार पर राज्य में औद्योगिक वातावरण को दूषित  और उद्योगों को हतोत्साहित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य जिसे बीते 15 वर्षों के अथक प्रयासों से हमने सरप्लस राज्य बनाया। पूर्व की डॉ. रमन सिंह की सरकार ने स्टील उद्योगों को बंद होने से बचाने एवं सुचारु संचालन की दृष्टि से उद्योगों को बढ़ावा देने एवं सीमावर्ती प्रदेशों से पूर्ण प्रतिस्पर्धा के साथ छत्तीसगढ़ के उद्योगों को आगे बढ़ाने लगातार प्रयास किया। श्री सुन्दरानी ने कहा कि डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ के उद्योगों को आगे बढ़ाने कितने संवेदनशील थे, इस का अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि उन्होंने वर्ष 2016-2017 में 1.40 रुपये, वर्ष 2017-2018 में 0.80 रुपये, वर्ष 2018-2019 में 0.50 रुपये स्टील उद्योग को अनुदान दिया था। निश्चित ही डॉ. रमन सिंह के इस संवेदनशील कदम से उद्योगों को न सिर्फ राहत मिली अपितु अन्य प्रांतीय उद्योगों से प्रतिस्पर्धा भी संभव हुई। सुन्दरानी ने कहा कि यह दुर्भाग्य का विषय है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल की सरकार ने उद्योगों को मिलने वाले उक्त अनुदान को ही समाप्त कर दिया है। आज उद्योगों की प्रति यूनिट बिजली दर काफी बढ़ गई है जिससे उद्योग आज दम तोड़ने की स्तिथि में आ गए है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि डॉ. रमन सिंह की तरह संवेदनशीलता दिखाते हुए छत्तीसगढ़ शासन तुरंत प्रभाव से इन उद्योगों को अनुदान प्रदान करें अन्यथा ये उद्योग सीमावर्ती उद्योगों से मुकाबला भी नहीं कर पाएंगे और धीरे-धीरे दम तोड़ देंगे।

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