जननायक कोटा एसडीएम डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी हुए गंदी राजनीति के शिकार, कोटा से बिलासपुर किये गए अटैच

०० जनता के दिलों में राज करने वाले एसडीएम आसुतोष चतुर्वेदी एसडीएम कोटा निराशाजनक आम लोगों में देखने को मिली

०० कोटा की जनता ने कहा है कि एसडीएम आशुतोष चतुर्वेदी का स्थानांतरण कोटा से हुआ है हमारे दिलों से नहीं 

करगी रोड कोटा। ऐसी प्रथा निकल चली है की अच्छे कार्य करने वाले अधिकारी गंदी राजनीति के शिकार हो जा रहे हैं बिलासपुर जिले के कोटा अनुभाग के एसडीएम आशुतोष चतुर्वेदी ने अपने अनुभाग के लिए ना जाने कितने अच्छे कार्य किए है जनता के हित के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जो काम कोटा में पिछले 50 सालों में नहीं हुआ था वह सारे कार्य वह अपने पिछले 5 महीने के कार्यकाल में संपूर्ण किए जनहित के लिए उन्होंने वह सारे कार्य किए चाहे वह कोटा के तालाबों की सफाई कराना हो या सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना हो या वृक्षारोपण हो या फिर किसी ऐसे गरीब की मदद करना हो जो पिछले 15 सालों से ट्राई साइकिल के लिए संघर्ष कर रहे हो और उसे व्यक्तिगत रूप से मदद करना ऐसे ना जाने कितने हैं जनहित के कार्य एसडीएम आशुतोष चतुर्वेदी ने कराएं और हमेशा जनता के लिए सुलभ रहे कभी भी उन्होंने एक अधिकारी के तौर पर नहीं बल्कि एक सेवक के रूप में जनता की सेवा की और उनकी इस सेवा को देखकर शायद कुछ राजनीतिज्ञ को यह बात खटकने लगी और अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर ऐसे जन नायक को कोटा से बिलासपुर स्थानांतरण करा दिया गया आपको बताना चाहेंगे कि जब हमने कोटा की जनता से बात की तब बहुत से लोगों ने कहा कि पिछले 40 सालों में उन्होंने ऐसा अधिकारी नहीं देखा था और उन्हें इस बात का दुख है कि वह ऐसे अधिकारी को अपने बीच से जाते हुए देख रहे हैं वहां के कुछ लोगों ने बताया कि वह एसडीएम साहब के समर्थन में एक जन रैली निकालने जा रहे थे परंतु एसडीएम साहब ने यह कहकर उस रैली को रुकवा दिया कि अगर आप लोग मुझे सच में सम्मान देते हैं तो ऐसे कोई कार्य नहीं करेंगे जो कि वैधानिक ना हो और उनके निवेदन को कोटा की जनता ने स्वीकार किया और अपनी रैली को रुकवा दिया अब सवाल यह होता है की क्या ऐसे अच्छे कार्य करने वाले अधिकारी कुछ गंदे राजनीतिज्ञों के शिकार होते रहेंगे पिछले दिनों भी आप लोगों ने सुना होगा की सुकमा के एसपी जितेंद्र शुक्ला को भी एक मंत्री की बात ना मानने पर स्थानांतरित कर दिया गया था अब सवाल यह है की ऐसे माहौल में अधिकारी कैसे काम करेंगे इस प्रकार के स्थानांतरण अधिकारियों का मनोबल तोड़ते हैं और जो अधिकारी पूरी शिद्दत से काम करना चाहते हैं वह भी ऐसे माहौल में काम करने से डरने लगेंगे ऐसे में हमारे छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था कैसे चलेगी यह भी एक सोचनीय विषय है और इस विषय का संज्ञान मुख्यमंत्री महोदय को लेना चाहिए

 

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