ईवीएम मशीन में गड़बड़ी की आशंका, सवालों के घेरे में मोदी सरकार : पीआर खुंटे

०० किस खुशी में भाजपा को लोकसभा में वोट मिलामोदी बतायें?

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद पी.आर. खुंटे ने कहा कि आखिर मोदी सरकार को देश की जनता ने किस खुशी में अप्रत्याशित दुबारा बम्फर वोट दिया है। अनेकों सवाल है, इन सवालों का जवाब मोदी को देना होगा। श्री खुंटे ने बताया कि मोदी ने दो करोड़ नौकरी प्रतिवर्ष देने का वादा करके मुकर गया क्या इसी खुशी में युवा? मोदी सरकार के जी.एस.टी. के चलते 10 करोड़ नौकरियां गवांकर बेरोजगार हो चुके लोग भूखे मरने की खुशी में, मोदी सरकार ने 15 लाख रूपये हर गरीब के खाते में डालने का वादा किया था, क्या इस वादे को नहीं पाने की खुशी में? विदेशों से अरबो का कालाधन वापस लाने का वादा नहीं निभाने की खुशी में? हजारों किसान कर्ज में डुबकर आत्महत्या करने विवश हुए क्या किसान इस खुशी में? गौ रक्षा माब लीचिंग के नाम पर अनुसूचित जातियों और मुसलमानों की प्रताड़ना हत्याये देश भर में हुई। रोहित बेमूला की संस्थानिक हत्या हुई, उना गुजरात की घटना, घोड़ी पर चढ़ने, मुंछ रखने, जूता पहनने आदि के चलते अनुसूचित जातियो, आदिवासियों को सताया गया क्या अनुसूचित जाति, मुसलमान इस खुशी में? एस सी, एस.टी एक्ट के बदलाव करके सरकार ने अनुसूचित जातियो, आदिवासियों के संविधानिक सुरक्षा कवच को हटाने का षडयंत्र किया था क्या अनुसूचित जाति, आदिवासी मोदी को इस खुशी में? करोड़ो आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन, बेदखल किया गया उन्हे नक्सली कहकर फर्जी इनकाउंटर में मारे गये हजारों निर्दोष आदिवासियों को फर्जी केस बनाकर जेल में डाल दिया गया। सैकड़ो आदिवासियों एवं अनुसूचित जाति के महिलाओं का बलात्कार व हत्या उनकी संपत्ति की लूट की गयी, क्या आदिवासी एवं अनुसूचित जाति जन इस खुशी में? 13 पाइंट रोस्टर का खतरनाक षडयंत्र किया गया और एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. के आत्मा पर गहरा आघात करने का षडयंत्र किया गया क्या इस खुशी में मतदाता ने वोट दिया।

अल्पसंख्यक मुसलमानों एवं इसाइयों को विभिन्न दंगो के माध्यम से मरवाया गया। भाजपा के लोग विगत विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में एक भी मुसलमान को अपनी पार्टी का टिकिट नही दिया उनके धार्मिक विश्वासों पर आक्रमण रवैया अपना कर परेशान किया गया, क्या अल्पसंख्यक वर्ग इस खुशी में?सरकारी कर्मचारी, सैनिक आदि वर्ग सरकार की नीतियों से परेशान रहे क्या इस खुशी में? भाजपा के शीर्ष नेता संविधान बदलने, आरक्षण खत्म करने, हिन्दू राष्ट्र बनाने मनुस्मृति लागू करने की बात करते है, क्या मतदाता इस खुशी में? भारत में विदेशी कर्ज खरबों डालर तक पहुंच गया विदेशी कंपनी भारत को भारत मे व्यापार करने बुलाया जा रहा है। जिससे देश का आम नागरिक कर्जदार बन गया है क्या इस खुशी में मोदी को वोट दिया। मोदी ने रातों-रात नोटबंदी कर आम जनता को बैंको एवं ए.टी.एम. में लाइन लगाने मजबूर कर दिया, सैकड़ो लोगों की जान चली गयी इसके बाद भी कालाधन वापस नहीं आया, नक्सलवाद,आतंकवाद, खत्म नहीं हुआ और न ही नकली नोटो का चलन बंद हुआ क्या जनता ने इस खुशी में? एक चुटकी में महंगाई दूर करने, सौ दिन में अच्छे दिन लाने, अयोध्या में राम मंदिर बनाने, धारा 370 हटाने, हिन्दू राष्ट्र बनाने असफल प्रधानमंत्री मोदी को किस खुशी में? मोदी ने अपने आप को पिछड़ा वर्ग बताया और चुनाव जीत गए लेकिन उसने पिछड़े वर्ग को उचित संविधानिक हक दिलाने नहीं बल्कि उनको बरबाद करने की नितियॉ बनाई क्या पिछड़ा वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व दिया जवाब दे ऐसे और भी सैकड़ो सवाल है। जिससे देश की जनता को भारी  नुकसान उठाना पड़ा। पुलवामा घटना, बालाकोट घटना, राष्ट्रवाद की मुद्दा पर जनता के सामने अलग से प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। इन सवालों का जवाब देश की जनता मांग रही है। मोदी जी जवाब दो। लगता है कि ई.वी.एम. मशीन में गड़बड़ी के चलते भाजपा एवं उनके सहयोगी दलों को 351 सीटें मिली है। चुनाव परिणाम आने के पहले 300 से अधिक सीटें जीतने की दावा करना और 303 सीट जीतना मोदी एवं अमित शाह की दावा सही साबित होना अनेक संदेहो को जन्म दे रहा है। चुनाव आयोग के प्रमुख आर.एस.एस. से संबधित होना चुनाव में गड़बड़ी करने को बल मिलता है। 6 माह पूर्व हुए पांच विधानसभा चुनाव से पूर्व देश के अनेक राजनीतिक दलों ने देश के चुनाव आयोग से निष्पक्ष एवं विश्वसनीय चुनाव कराने हेतु पहले तो वेलेट पेपर से चुनाव कराने की पूरजोर मांग की थी लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी मांग को एक शिरे से खारिज कर दिया। फिर उस ई.वी.एम. मशीन पर होल मशीन लगाने कुछ ऐसी शर्तों के साथ राजी हो गया जिस पर भी मांग कर्ताओं को संतुष्टि नहीं हुई क्योकि उस शर्त के अनुसार पूरे पेपर होल मशीन की गिनती भी नहीं हुई ले-देकर शंका-आंशकाओं के बीच चुनाव निपट गया विधानसभा के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को तीन राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान में बहुमत मिला और वहां सरकार बना सकी। विधानसभा के इस परिणाम से चुनाव आयोग को यह कहने का अवसर मिल गया कि यदि ई.वी.एम. मशीन अविश्वनीय है तो तीन राज्यों में कांग्रेस को कैसे बहुमत मिल गया। भाजपा के रणनीतिकारों ने बेहद सुझ-बुझ व षडयंत्र पूर्वक ऐसी रणनीति बनायी जिससे आम आदमी तो क्या पढ़ा लिखा आदमी भी गच्चा खा गया। लेकिन जो लोग राजनीति को समझते है ऐसे लोगों को मीडिया में प्रमुखता से स्थान नही दिया गया। लोकसभा जिनकी चुनाव जिनकी चुनाव जीतने की संभावना नही ंके बराबर था, आश्चर्य एवं चौकाने वाली बात यह है कि जब चुनाव परिणाम आया तो 11 में 9 भाजपा उम्मीदवार भारी मतों से चुनाव जीत कर आ गये। चुनाव के समय जन चर्चा था कि विधानसभा की तरह छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा क्षे़़त्रों मे कांग्रेस उम्मीदवार के जीतने की चर्चा जोरो पर था।

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