संचार-संकर्म की बैठक के बहाने घोंघा-जलाशय के कृषक-कुटीर में जमकर चला शराब व कबाब

०० जनपद पंचायत कोटा के वरिष्ठ-अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ जनपद-सदस्यो ने भी खूब छलकाए जाम, खींचकर खाए मुर्गे की टांग

०० कृषक-कुटीर के प्रभारी एसडीओ भामरी की भूमिका संदिग्ध? जनपद से पत्र-प्रेषित के बाद बैठक के लिए दिया गया था?

०० सिंचाई विभाग के ई.अशोक तिवारी ने कहा बाहर हु वापस आने के बाद जानकारी लेकर कार्यवाही की जाएगी

संजय बंजारे

करगीरोड-कोटा। ऐसे तो कोटा का घोंघा-जलाशय का कोरी डैम काफी प्रसिद्ध है,आसपास के इलाकों से लेकर दूर-दराज तक से पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है, बड़े-बड़े अधिकारियों नेताओ व उनके परिवारों का आने जाने के अलावा छत्तीशगढ़ी फिल्मो की शूटिंग तक यहा पर हो चुका है, बेहतर लोकेशन की वजह से पर पिछले दिनों घोंघा-जलाशय का कृषक कुटीर विश्राम गृह पर्यटकों के पर्यटन स्थल के नाम से नही-?सरकारी-अधिकारियों-कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों के लिए शराब खाना का अड्डा बनने के नाम से चर्चा में आ गया है-?खुलेआम शराब खोरी चिकन चखने के साथ सेवन किया जा रहा है,वो भी सरकारी बैठक का हवाला देकर-??

पिछले दिनों जल संसाधन विभाग के कृषक कुटीर भवन में  कोटा जनपद पंचायत के सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों सहित जनपद सदस्यो के द्वारा सरकारी बैठक संचार संकर्म की बैठक के बहाने दारू-मुर्गा पार्टी आयोजित की गई थी, बीते बुधवार को जनपद पंचायत कोटा की संचार संकर्म सभा की बैठक जनपद के अधिकारियों ने कृषक कुटीर में आयोजित की बैठक तो एक से डेढ घंटे चली लेकिन उसके बाद कुछ जनपद सदस्यों और जनपद के शासकीय कर्मचारियों ने बैठक के बाद जमकर शराबखोरी की शराब के साथ चिकन को चखना बनाकर शराब पार्टी आयोजित की गई, जानकारी के अनुसार बुधवार को जनपद पंचायत की संचार संकर्म समिति की बैठक अपने जनपद सभागार में बैठक करने की बजाए कोटा के घोंघा जलाशय कोरीडैम में बना पर्यटक स्थल कृषक कुटीर में आयोजित की गई-?सवाल उठता है, की जनपद सीईओ की अनुपस्थिति में बिना सीईओ को सूचनार्थ किए हुए बैठक की सूचना एसडीएम कोटा को दिए बगैर बैठक जनपद के सभागार के बदले कृषक कुटीर मे क्यों आयोजित की गई-? इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है-? बैठक जनपद की संचार संकर्म समिति की थी, लिहाजा समिति के सदस्य और विभागीय अधिकारी वहां पहुंचने लगे बैठक बारह से एक बजे के बीच शुरू हुई और घंटे डेढ घंटे में बैठक की समाप्ती भी हो गई, बैठक मे आए अधिकतर लोगों का ध्यान बैठक में चर्चा करने के बजाए खाने पीने की तरफ ज्यादा था,आनन फानन में बैठक समाप्त करने के बाद पर्यटक स्थल के शासकीय रेस्ट हाउस को मयखाना, बार-खाने में तब्दील कर डाला जनप्रतिनिधियों व अधिकारी-कर्मचारियों ने जाम से छलकाया और टकराया भी-? सरकारी बैठक के बहाने कृषक कुटीर चल रहे दारू मुर्गा पार्टी की पूरे जानकारी जनपद पंचायत कोटा व कृषक-कुटीर से निकलकर कोटा नगर के मीडिया तक पहुंच गई ,बैठक की  जानकारी लेने जब कोटा के प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक, वेब पोर्टल के मीडियाकर्मी जब बैठक स्थल  पहुंचे तो पूरा नजारा देखकर चौक गए,खाना खाने के टेबल पर जनपद सदस्य के द्वारा महंगी अंग्रेजी शराब की बोतल मीडिया कर्मी के कैमरे के सामने शराब के नशे में लहराया जा रहा था, बैठक के बाद की शराब-नॉनवेज पार्टी अपने पूरे चरम पर थी, जनपद सदस्यों के साथ जनपद पंचायत कोटा के अधिकारी और कर्मचारी शराब के नशे में मदमस्त शराब की बोतल और मुर्गे की टांग को चबाते हुए अभिमान और अहंकार से परिपूर्ण मीडियाकर्मियों से अभद्र व्यवहार के साथ-साथ खबर छापने पर देख लेने की धमकी तक दे डाली जनपद पंचायत की प्राइवेट बैठक बैठक के बाद ऐसे बहुत सारे सवाल उठने लगे है, जिसके जवाब अधिकारियों को देने होंगे।

जनपद सभागार के बजाए कृषक-कुटीर में बैठक क्यो आयोजित: – जनपद पंचायत की संचार संकर्म की बैठक जनपद पंचायत के सभागार हाल की बजाय पर्यटक स्थल कृषक कुटीर में ही क्यों आयोजित की गई-? बैठक की अनुमति आखिर किसके कहने पर ली गई-? जनपद पंचायत से चार किलोमीटर दूर कृषक-कुटीर में जनपद के बाबू और अधिकारी जनपद के सरकारी दस्तावेज लेकर किसके आदेश से वहां पहुंचे-? क्या इस पूरे बैठक की जानकारी जनपद सीईओ को थी-?अगर बैठक की जानकारी सीईओ कोटा को थी तो  उन्होंने जनपद के सभागार में बैठक करने की बजाए कृषक कुटीर में समिति की बैठक आयोजित करने की सहमती क्यो प्रदान की-?इस बैठक की सहमति असहमति में जनपद सीईओ की भूमिका भी काफी संदिग्ध है-? यदि जनपद सीईओ को जानकारी नहीं थी तो बिना आदेश के कृषक-कुटीर में किसके कहने पर बैठक आयोजित कर दी गई थी-?क्यो सीईओ के अनुपस्थिति में एसडीएम कोटा को बैठक की सूचना नही दी गई-?ऐसे बहुत से सवाल है जो की अधिकारियों कर्मचारियों की कार्यप्रणाली,लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना रवैये होने की ओर ईशारा करते हैं,जनपद पंचायत के कर्मचारी का कहना था,कि कोई बैठक नहीं थी, मीडिया के अचानक पहुंच जाने से हड़बडाए जनपद के अधिकारी-कर्मचारीयों की बोलती बंद हो गई, जनपद पंचायत के बड़े बाबू तो मीडिया का कैमरा देखकर आगे बढ़ने लगे मीडिया के सवाल पूछने पर मीडिया कर्मी पर ही झल्लाने लगे कैमरा देख आरईएस के एसडीओ अंग्रेजी शराब का गिलास टेबल के नीचे रख बाथरूम की तरफ भागने लगे, तो आरईएस के कुछ इंजीनियर बेशर्मी से मुर्गे की टांग के मजे लेते हुए शराब सेवन करते रहे कहा कोटा फारेस्ट विभाग के रेंजर व्ही के नेल्सन पर जैसे ही मीडिया के कैमरे की लाइट पड़ी हाथो से रुमाल निकालकर मुह पर रखते हुए धीरे से निकल गए, जनपद पंचायत के बड़े बाबू संतोष चंद्राकर ने कैमरे पर आन रिकार्ड बोला कि यहा किसी भी प्रकार की बैठक यहां आयोजित नहीं थी ये बोलते हुए शायद वो ये भूल गए कि उनका ये झुठ उनपर और भी भारी पड़ सकता है, क्योंकि आरईएस के एसडीओ,और अन्य इंजीनियरो के साथ टेबल पर जाम छलकाते और मुर्गे की टांग खीचते नजर आ चुके थे, उसके अलावा सिंचाई विभाग के कृषक कुटीर के एसडीओ सुभाष भामरी ने अपने बयान में साफ-साफ कहा की जनपद पंचायत से बाकायदा पत्र प्रेषित किया गया है बैठक के लिए इसलिए बैठक की इजाजत दी गई थी, फिर भी यदि जनपद के बाबू संतोष चंद्राकर की ही बात मान ली जाए कि वहां कोई मीटिंग नहीं थी, तो सवाल यही उठता है, कि पूरा का पूरा जनपद पंचायत बारह बजे से छह बजे तक कृषक कुटीर में क्या कर रहे थे-?अपने कार्यालयीन समय में जनपद के आरईएस के एसडीओ कैवर्त, इंजिनियर अमिताभ कश्यप,कोटा से लोरमी ट्रांसफर हुए एसडीओ बी.पी गुप्ता, जनपद के बड़े बाबू संतोष चंद्राकर, कोटा से ही स्थानान्तरण हुए इंजिनियर किरण ध्रुव अपने कार्यालयीन समय में कृषक-कुटीर में दारू मुर्गे की पार्टी में कैसे मौजूद रहे।

सिंचाई विभाग के कृषक कुटीर प्रभारी एसडीओ की भूमिका भी संदिग्ध:- जल संसाधन विभाग के कृषक कुटीर प्रभारी एसडीओ सुभाष भामरी की भूमिका भी संदिग्ध दिखाई पड़ता है, जब उनसे इस  बैठक में हो रही शराबखोरी के बारे में जानकारी ली गई तो उनका साफ कहना था, कि जनपद पंचायत से बाकायदा पत्र प्रेषित किया गया था, बैठक के लिए जब मीडिया कर्मी ने सवाल किया कि बैठक सरकारी थी, तो फिर बैठक में इस तरह का कृत्य क्यों किया गया, जनपद पंचायत के सभागार में तमाम तरह की बैठक होती है, जहा पर एसडीएम से लेकर जिला पंचायत सीईओ तक बैठक कर चुके हैं, फिर यहा पर ऐसी कौन सी स्पेशल बैठक थी,जो कि कृषक कुटीर में करने की आवश्यकता पड़ी-?

जनपद पंचायत कोटा सीईओ मोनिका वर्मा की अनुपस्थिति के बगैर बैठक-? एसडीएम कोटा को भी बैठक की सूचना नही:- संचार संकर्म की बैठक उस दिन की जाती है,उसी दिन जनपद पंचायत कोटा सीईओ मोनिका वर्मा अनुपस्थित रहती है, इसमे सीईओ की भूमिका भी संदिग्ध दिखाई पड़ती है, क्या इस पूरे बैठक की स्क्रिप्ट सीईओ ने लिखि थी-?क्या बैठक के दिन जानबूझकर सीईओ अनुपस्थित थी-? जैसा कि सूत्रों के हवाले से खबर है कि बैठक से पहले जनपद सीईओ से जनपद अध्यक्ष, सभापति के साथ कुछ जनपद सदस्यो की गोपनीय बैठक की गई, शौचालय निर्माण के बकाया भुगतान के संबंध में-?कुछ पंचायतो के पंचायत सचिव-सरपंच ने शौचालय भुगतान को लेकर जनपद पंचायत सभापति और जनपद सदस्यो पर अवैध उगाही के लिए डराने-धमकाने की बात कही गई है, इसका बात का खुलासा भी जल्द ही किया जाएगा खबर के अगले अंक में, कुछ सरपंच सचिवो ने कैमरे के सामने इस बात की पुष्टि की है।

एसडीएम कोटा, एसडीओपी कोटा सहित जिला पंचायत सीईओ ने नोटिस जारी कर जवाब तलब कर कार्रवाई की बात कही

इस पूरी घटनाक्रम की जानकारी लिखित में कोटा अनुविभाग के एसडीओपी, अभिषेक नारायण सिंह, अनुविभागीय अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी,को कोटा मिडिया कर्मियों के द्वारा दी गई है, जिसमें दोनो अनुविभाग के अधिकारियों ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है,स्पष्ट जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संबधित लोगो पर कार्रवाई करने की बात  दोनों अनुविभागीय अधिकारी ने कही, वही पर जनसमस्या निवारण शिवीर में पहुचे जिला पंचायत सीईओ रितेश अग्रवाल ने भी इस पूरे मामले पर जवाब तलब कर कार्रवाई की बात कही।

 

error: Content is protected !!