महाधिवक्ता की अनिच्छा को इस्तीफा मानना हास्यापद : रिजवी

रायपुर। जकांछ के मीडिया प्रमुख और वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने कहा है कि प्रदेश के महाधिवक्ता और वरिष्ठतम सफल वकीलों में से एक कनक तिवारी की अनिच्छा को इस्तीफा मानकर पद से हटाना न्यायिक जगत के लिए एक गंभीर घटना है। इस अवैधानिक घटना से प्रदेश सरकार की जग हंसाई हुई है। शासन को यदि इन्हें हटाकर अपनी पसंद के व्यक्ति को उक्त पद पर बिठाना ही था तो कनक तिवारी से संपर्क साधकर विधिवत इस्तीफा मांग सकते थे। क्योंकि तिवारी महाधिवक्ता के पद से ही जाने या पहचाने नहीं जाते। तिवारी किसी पद या पहचान के मोहताज नहीं है। सतीशचन्द्र वर्मा को नियुक्त करने में इतनी जल्दबाजी कई शंकाओं को जन्म देती है। प्रदेश सरकार की ओर से नियुक्ति में अपनाई गई प्रक्रिया अव्यवहारिक, गैरकानूनी और शर्मनाक है जो शासन के दिमागी दिवालियापन को दर्शाता है। तिवारी के अनुसार उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है ऐसे में महाधिवक्ता का पद रिक्त ही नहीं हुआ। जो पद रिक्त नहीं है उस पद पर नई नियुक्ति असंवैधानिक है।
रिजवी ने कहा है कि इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से वकील जगत का हर व्यक्ति नाराज है और न्यायिक जगत हतप्रभ है। उन्होंने प्रदेश के सभी अधिवक्ता संघों से अपील की है कि कनक तिवारी को अवैधानिक तरीके से महाधिवक्ता के पद से हटाए जाने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पारित करें।

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