रमज़ान के पहले-असरे के बाद दूसरे-असरे की शुरुआत पहला-रहमत दूसरा-बरकत व तीसरा-मगफिरत का

००  रोज के रोज 13-से-14-घण्टे तक भूखा-प्यासा रहकर रोजे  रह रहे हैं मुस्लिम-धर्मावलंबी 

०० रोजे-रखने में बड़ो के साथ बच्चे-बच्चियां भी पीछे नही इबादत-और कुरान की तिलावत में गुजरता है दिन

०० पांच-वक्त की नमाज़ों के साथ तराबीह की विशेष-नमाज, अदा कराई जा रही है मुस्लिम-धर्मगुरुओं द्वारा 

करगीरोड-कोटा| मुस्लिम-समाज के त्योहारों में रमजान का महीना बहुत ही मुबारक और अफजल वाला महीना कहलाता है, रमजान-उल-मुबारक की मुकद्दस माह में मुस्लिम-समाज के लोग पूरे एक माह तक रोजा (उपवास) रखते हैं, पूरे 1 माह तक रोजा रखने के बाद उपहार के रूप में मुस्लिम-समुदाय को अल्लाह-ताला त्यौहार के रूप में मुस्लिम-समुदाय के लोगों को ईद का त्यौहार ईद-उल-फितर मनाने की खुशियां देता है, शाबान महीने की उर्दू की एक तारीख से रमजान का मुबारक महीना शुरू हुआ, आज 11 रोजा हो गया रमजान महीने का दूसरा जुमा (शुक्रवार) इस बार रमजान का महीना गर्मी के दिनों में शुरू हुआ 42 से 45 डिग्री तापमान होने के बावजूद 14 घंटा बिना खाए पिए बिना पानी के रहना बहुत मुश्किल है, बावजूद उसके मुस्लिम-समुदाय के लोग रोजा रख रहे हैं, सूरज की तेज गर्मी से भी मुस्लिम-समुदाय के लोगो का जज्बा कम नही हो रहा है, सूरज उगने से पहले से लेकर सूरज डूबने तक भूखा-प्यासा रहना काफी मुश्किल भरा होता है, वह भी इस भीषण गर्मी में इसके बावजूद भी मुस्लिम-समाज के मुस्लिम भाइयों द्वारा पूरे एहतियात और पूरे एहतराम के साथ इबादत में लगे हुए हैं, रमजान-उल-मुबारक के मुकद्दस माह के रोजे रख रहे हैं, सुबह से लेकर शाम तक और शाम से लेकर रात तक पूरी दिनचर्या इबादत में गुजरती है,पूरे दिन रोजे (उपवास)रखने के साथ दिन में पांच वक्त की नमाज पढ़ना,पुरुष वर्ग मस्जिदों में और महिलाएं घरों पर इबादत करती है, साथ ही कुरान की तिलावत करना शाम को  रोजा(उपवास)-इफ्तार खोलने के बाद रमजान की विशेष 20-रकात-नमाज-तरावीह की मस्जिदों में हाफिज-ए-कुरान द्वारा पढ़ाई जाती है।

इसी कड़ी में करगीरोड-कोटा के मुस्लिम-जमात के लोगों द्वारा भी रमजान के इस मुबारक महीने में पूरे एहतराम के साथ इस महीने का  एहतराम किया जा रहा है,साथ ही नौजवान-बुजुर्ग-महिलाओं और बच्चे-बच्चियां भी रोजा रख रहे हैं, सुबह से लेकर शाम तक घरों में और मस्जिदों में नमाज की इबादत के साथ घरों में कुरान की तिलावत भी की जा रही है, बढ़ती हुई गर्मी के बावजूद भी बड़ों का बच्चों का  जज्बा कम नहीं हो रहा है, शाम होते ही मुस्लिम समुदाय के बच्चे-बच्चियां अपने अपने घरों से बनाए हुए खाने की सामग्री जिसे उर्दू में अफ्तारी कहते हैं, मोहल्लों में मस्जिदों में घरों-घर पहुंचाया जाता है, शाम होते ही मगरिब की अजान के बाद सभी लोग एक साथ बैठकर रोजा खोलते हैं, रोजा खोलने के समय मुस्लिम समुदाय का ऐसा मानना है की रोजा खोलने के समय जो भी दुआ (प्रार्थना) दिल से की जाती है, उसे अल्लाह-ताला जिसे हम रहमान और रहीम भी कहते हैं उस दुआ को कुबूल फरमाता है मस्जिदे-ताहा के पेश इमाम हाफिज गुलजार ने बताया कि शाबान के महीने में शुरू हुए रमजान के पाक रोजे मुसलमानों के लिए बेहद ही खास होते हैं, इस बार के रमजान के रोजे में काफी गर्मी पड़ रही है, बावजूद उसके मुस्लिम-समुदाय के लोगों का जज्बा कम नहीं हो रहा है, पूरे जज्बे के साथ रोजा भी रख रहे हैं और मस्जिदों में घरों में इबादत कुरान की तिलावत भी की जा रही है, रमजान के महीने में पूरे एक माह तक रोजा रखना पड़ता है, इस दौरान तीन असरा पड़ता है, जैसा कि रमजान का पहला असरा खत्म होने के बाद दूसरा असरे की शुरुआत हो चुकी है इन तीनो असरो में पहला असरा रहमत दूसरा बरकत और तीसरे असरे में मगफिरत होती है, इस दौरान अल्लाह-ताला अपने नेक बंदों पर रहमत बरसाता है, उनकी दुआएं मकबूल फरमाता है, गलत बातों से बुराइयों से दूर फरमाता है, आगे उन्होंने बताया कि दिन भर रोजा रखने और पांचों वक्त की नमाज पढ़ने के बाद रमजान में तरावीह की विशेष नमाज अदा की जाती है,जिसके लिए बाहर से हाफिज व कारी हाफिज-ए-कुरान मस्जिदों में इस विशेष तराबीह की नमाज़ पढ़ाते हैं, मस्जिद-ए ताहा कोटा में भी बिलासपुर फैजुर-रज़ा मदरसे से मोहम्मद सादिक साहब जो कि हाफिज-ए-कुरान है उस विशेष नमाज-तरावीह को पढ़ा रहे हैं, जिससे कि कोटा मुस्लिम-जमात के मुस्लिम भाइयों को कुरान-शरीफ की तिलावत सुनने का सर्फ हासिल हो रहा है, तरावीह की नमाज के लिए आसपास गांव से नवागांव, बिल्लीबंद, बरर, नवापारा, छेरकाबांधा, लखोदना सहित अन्य गांव से भी मुस्लिम-धर्मावलंबी के लोग आते हैं।

 

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