स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ, अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

०० आचार संहिता के दौरान नियम कानून का पालन नहीं करवा पा रहे हैं सक्षम अधिकारी        

करगी रोड कोटा। कोटा नगर में विवादित निर्माणाधीन मकान में स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। कोटा तहसीलदार कमलेश मिरी से बात करने पर उनके द्वारा कहा गया कि मैंने किसी भी तरह स्टे आदेश को निरस्त नहीं किया है। जबकि सूत्रों से पता चला है कि मौखिक रूप से एक  राजस्व अधिकारी द्वारा ही उसे कार्य करने की अनुमति,एक विशेष व्यक्ति के दबाव में दी गई है तथा जिससे यह सिद्ध हो रहा है कि क्या कोई व्यक्ति भी कानून के ऊपर हो सकता है? मामला वार्ड नंबर आठ पुरानी बस्ती का है जहां पर की गलत सीमांकन व अतिक्रमण को लेकर खसरा नंबर 992/5 में प्रकरण तहसीलदार के यहाँ पर चल रहा है तथा इस पर तहसीलदार कमलेश मिरी  द्वारा 28/03/2019 को स्थगन आदेश जारी कर कार्य बंद करने का आदेश दिया था। उसके बाद से कार्य बंद था, लेकिन अचानक ही कल दिनांक 1 मई 2019 को पुनः निर्माण कार्य चालू हो जाने पर पता चला की तहसीलदार द्वारा स्टे को नहीं हटाया गया है उसके बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ होना किस ओर इंगित करता है यह सोचने का विषय है।

गौरतलब है कि विगत 4 अप्रैल को पुलिस प्रशासन द्वारा स्वयं मौके पर जाकर पुलिस बल की सहायता से कार्य को बंद कराया गया था तथा निर्माणकर्ता को यह हिदायत दी गई थी कि जब तक स्थगन आदेश लगा है निर्माण कार्य ना करें ।उसके बावजूद अचार संहिता के दौरान नियम कानून को ठेंगा दिखाकर किये जा रहे निर्माण कार्य, यह सवाल पैदा करता है कि आखिर माननीय न्यायालय एवं प्रशासन के आदेश कैसे और किसके सह पर बेमानी साबित हो रहे हैं? बहरहाल मामला तहसीलदार के दरबार में प्रस्तुत है। इस मामले में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोटा आसुतोष चतुर्वेदी का कहना है कि मैं खुद इस मामले  जाकर देखूंगा और मामले की जांच की जाएगी दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।

 

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