बस्तर के लोग विधानसभा चुनाव के जैसे लोकसभा चुनाव में भाजपा का हिसाब करेंगे : कांग्रेस

०० कांग्रेस सरकार ने तीन महिनों में बस्तरवासियों के विकास में अभूतपूर्व फैसले किये

रायपुर। बस्तर क्षेत्र के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने भरोसा जताया है कि उसकी सरकार के तीन महिने के कार्यकाल में बस्तर के निवासियों और आदिवासियों के हक में जो फैसले हुये है उनसे बस्तर के मतदाता कांग्रेस के पक्ष में मतदान करेंगे।

प्रदेश कांग्रेस के कमेटी के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनते ही सरकार ने बस्तर में आदिवासियों के विकास के लिए कई ठोस क़दम उठाए हैं। कांग्रेस सरकार ने लोहांडीगुड़ा में 1700 एकड़ से अधिक ज़मीन आदिवासियों को वापस लौटा दी. कार्रवाई पूरी कर उन्हें कागज़ात भी सौंप दिए गए हैं। आदिवासियों पर दर्ज मुक़दमों की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज के नेतृत्व में एक समिति का गठन कर दिया है. यह समिति निर्णय करेगी कि किन मामलों में रिहाई के लिए अदालत में आवेदन लगाए जाने हैं। हमें विश्वास है कि बहुत से निर्दोष आदिवासी जेल से रिहा हो सकेंगे। कांग्रेस सरकार ने वनाधिकार के सारे प्रकरणों पर पुनर्विचार का फ़ैसला किया है और हम चाहते हैं कि सभी वाजिब हक़दारों को वनाधिकार मिले। बस्तर विकास प्राधिकरण को पुनर्जीवित किया है और एक आदिवासी राजनेता को इसकी कमान सौंपी है। नई सरकार चाहती हैं कि आदिवासियों के मुद्दे मसलों पर आदिवासी ही फ़ैसला लें। हमने प्रतिबोरा तेंदूपत्ता के लिए भुगतान 2500 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए कर दिया है. हमने कहा था कि कमीशनखोरी के लिए जूता चप्पल बांटने की जगह हम तेंदूपत्ता संग्राहकों को नकद पैसा देने के पक्ष में हैं. और हमने सरकार बनते ही यह कर दिया है। यूपीए सरकार ने लघुवनोपजों के लिए समर्थन मूल्य घोषित किया था. लेकिन मोदी सरकार ने इस समर्थन मू्ल्य में 53 प्रतिशत तक की कटौती कर दी और राज्य सरकार ने तत्काल इसे लागू कर दिया। भूपेश सरकार ने सरकार बनने के बाद सात की जगह 15 वनोपजों को समर्थन मूल्य पर ख़रीदने का फ़ैसला किया है। आदिवासियों के रोज़गार को लेकर हमारी चिंता कागज़ी नहीं है. हमने हर ब्लॉक में एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का फ़ैसला किया है। कोंडागांव में मक्का प्रोसेसिंग के लिए फूडपार्क लगाने का फ़ैसला किया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जी ने इसका शिलान्यास भी कर दिया है। आने वाले दिनों में हम आदिवासियों के लिए वो सारी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे जिसके लिए वे बरसों से तरसते रहे हैं। कांग्रेस की विकास की अवधारणा में सिर्फ़ सड़कें और इमारतें नहीं हैं. हम लोगों का विकास करना चाहते हैं। हमारी विकास की सोच में पूर्व सरकार की तरह कमीशनखोरी नहीं है। मानवीयता है, शिक्षा है, चिकित्सा का इंतजाम है और रोजगार का इंतजाम है। नई सरकार से आदिवासियों के मन में नई उम्मीद जागी है। हमें विश्वास है कि कांग्रेस ने केंद्र में सरकार बनने पर न्याय सहित जो अन्य घोषणाएं की हैं, उससे आदिवासियों को नई राहत मिलेगी।

इतिहास गवाह है कि भाजपा के 15 वर्षों के कार्यकाल में बस्तर के आदिवासियों की बहुत दुर्दशा हुई वे बेवजह जेलों में भी ठूंस दिए गए। भाजपा सरकार नक्सली समस्या हल करने का दावा करती रही और नतीजा यह हुआ कि तीन ब्लॉकों तक प्रभाव रखने वाले नक्सली राज्य के 14 ज़िलों तक फैल गए। आदिवासियों को क़दम क़दम पर प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा, रोज़गार मिला नहीं और वे पलायन को मजबूर हुए। वनाधिकार क़ानून यूपीए ने बनाया था लेकिन राज्य की सरकार ने साढ़े चार लाख से अधिक वनाधिकार के आवेदन रद्द कर दिए गए। आदिवासियों की ज़मीन लेकर लैंड बैंक में रख लिया। बस्तर के लोग विधानसभा के समान लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के खिलाफ मतदान कर उसकी वायदाखिलाफी और कुशासन का हिसाब करेंगे।

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