आदिवासी शिक्षक को न्याय के लिए पड़ रहा है भटकना, जिले में नहीं है कोई सुनने वाला… .

बालोद| जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को न्याय के लिए पड़ रहा है भटकना| गुरूर थाना क्षेत्र के ग्राम अरमरी कला निवासी अग्रहिज नागवंशी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि मेरे द्वारा पुलिस थाना गुरूर में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई थी. लेकिन जन सूचना अधिकारी द्वारा भ्रामक और अपूर्ण जानकारी दिया गया जिसके खिलाफ मैंने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष आवेदन पेश किया गया है| उन्होंने आगे बताया कि मेरे द्वारा पुलिस थाना गुरूर में आवेदन किया गया था जिसमे जो जवाब दिया गया है बेहद ही चौकाने वाला है एक ओर जांच आधिकारी के द्वारा दिया गया जवाब मे कहा जा रहा है कि  गीता नागवंशी को पोषण सोनी द्वारा पत्नी बनाकर रखा गया है. जबकि पोषण सोनी के पत्नी ने अपने पति पोषण सोनी और गीता नागवंशी के खिलाफ. ग्रामीण विकास समिति में शिकायत किया गया था, जिस पर ग्रामीण बैठक किया गया था. लेकिन मामला. थाना क्षेत्र में होने के कारण कोई बात नहीं हो पाई. वहीं एएसआई कि भूमिका संदिग्ध है| वह एक लोक सेवक हैं,शिकायत के आधार पर जांच किया गया है| जांच के दौरान भीशम नागवंशी या आवेदक को गाली गलौज या थाने में बंद कर देने की धमकी नहीं दिया गया है जबकि उक्त मामले में मुख्य गवाह जिसका ब्यान की कापी नहीं दिया गया था, जिस पर अपील कर पुलिस अधीक्षक बालोद से ब्यान की कापी निकाला गया है| जिसमे उन्होने स्पष्ट रूप से ए एस आई पर आरोप लगाया था. की अपना मुंह बंद कर. रहे. और तीजू राम के मामले में समझौता करे. नहीं तो. लाकब में बंद कर दिया जाएगा . एक बुजुर्ग रिटायर्ड शिक्षक जो कि सरपंच रहकर अपने कार्यो को ईमानदारी पूर्वक निर्वहन किया किया गया है. जो कि आदिवासी समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर समाज सहित पूरे जिले में सम्मान पा चुके हैं. ऎसे समाज चिंतक को को थाने बुलाकर इस तरह की धमकी देकर. एवँ डरा धमका कर मामले में. राजी नामा करने के लिए दबाव बनाया गया था.अग्रहिज नागवंशी के अनुसार ए एस आई धरम भूआर्य जो कि शिक्षा कर्मी की नौकरी छोड़

पुलिस विभाग में आकर वर्दी का धौंस दिखाते हुए. बिना जांच पड़ताल किये केस डायरी बनाना एवं केस चालान पेश करना थाना गुरूर का एतिहासिक कार्य रहा है. ए एस आई धरम भूआर्य के कारण हमारे घर में फुट पड़ने की कगार पर है.. क्योंकि मेरे पुत्र के सामने ही मुझे शांत बैठने एवं घर फोड़ने की बात कहा है. धरम भूआर्य ए एस आई द्वारा अपराध क्रमांक. 471. दिनांक 10.12.2018. को किस कारण से दर्ज किया गया है बिना जांच किए ही बाप और बेटे को कोर्ट में जमानत दार खड़ा करना पड़ा. नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने की कोशिश की..प्राकृति की खुली हवा को साँस लेने में बंद कर दिया. दिनांक 13. 01.2018 को ए एस आई धरम भूआर्य ने कोटवार पुत्र द्वारा नोटिस भिजवाना एवं दिनांक 14.01.2018 को तलाक सुदा बहु गीता बाई को हमारे घर के सामने भेजकर गली गलौज एवं आतंक मचाना धरम भूआर्य गुरूर एवं उपरोक्त असामाजिक व्यक्तियों का सुनियोजित षड्यंत्र रहा है एवं मानस सम्मेलन का आख़िरी दिन था. ताकि हमारे परिवार की प्रतिष्ठा पर धूमिल कर अपमानित किया गया एवं प्रताड़ित किया गया है. मामला अभी मान. न्‍यायलय में विचाराधीन है।सुचना के तहत जो जानकारी दी गई है वह भ्रामक जानकारी है. जानकारी के अनुसार शिकायत के आधार पर कोई जांच पड़ताल नहीं किया गया है. बिना जांच पड़ताल किए. मामला दर्ज किया गया गयाहै.जबकि गीता बाई नागवंशी ने 18 /4/2018 को अनुविभागीय अधिकारी दंडाधिकारी बालोद के समक्ष पेश होकर अपना कथन दिया था. जिसमे उन्होने कहा है कि. विगत एक वर्ष से पोषण सोनी के साथ प्रेम संबंध होने के कारण पोषण सोनी के साथ चली गई थी. और अपने वर्तमान पति गोपी नागवंशी और  बच्चों के साथ नही रहना चाहती है. पोषण सोनी के साथ रहना स्वीकार किया गया था. इसके विपरीत पोषण सोनी ने अपने ब्यान में कहा है कि वह. गीता बाई के साथ कोई संबंध नहीं है. और न ही मैं उसे भगा कर ले गया था. गीता बाई अपने पारिवारिक विवाद के चलते घर छोड़कर गई थी. बड़ा सवाल यह है कि. गीता बाई के कथन और पोषण सोनी का कथन बिल्कुल भिन्न है. जबकि पोषण सोनी कीg पत्नी त्रिवेणी बाई के अनुसार 11/4/2016को 12 बजे के बाद से अपने पति पोषण सोनी के गायब होने की जानकारी दी थी. जिसकी शिकायत किया गया था. जबकि पोषण सोनी ने ही गीता बाई को उप पत्नी बनाकर ओम प्रकाश शर्मा. संतोषी शर्मा के घर किराए पर लिया है. जिसकी जानकारी पूरे गांव वालों को है. पूरे मामले को गांव के कुछ छूटभैये नेता नुमा नारद साहू तीजू ठाकुर दूकाल राम जैसे लोग परेशान करने की नीयत से झूठ मूठ का सहारा लिया जाता है. मेरे द्वारा शिकायत करने के बाद भी बिना किसी जांच के जांच अधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से ना लेते हुए. मामले को नस्टिबद्ध किया गया है. और मान. न्यायलय के समक्ष पेश किया गया है. अगर प्रशासनिक अधिकारी के द्वारा जाच की जाती है. तो निश्चित ही दोषी व्यक्तियो के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. जिस तरह से मुझे और मेरे परिवार के खिलाफ षड़यंत्र रच कर मामले को तूल दिया गया है. वह गैर कानूनी है. निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. मुझे आदिवासी होने के कारण कई बार अपमानित करने की नीयत से नारद साहू .जैसे कई प्रकार के संबोधन कर अपमानित करते रहते हैं. मेरे द्वारा किए गए ईमानदारी पूर्वक कार्य को देख कर. गांव के कुछ लोगो को साथ लेकर   कूट रचना रच फंसाने का प्रयास किया जा सकता है.क्या मेरा आदिवासी होना. गलत है या फिर न्याय की गुहार लगाना गलत है मुझे न्याय दिलाई जाए|

 

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