पंडित दीनदयाल उपाध्याय को कांग्रेस के सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं : श्रीवास्तव

रायपुर। फिरंगियों के वैचारिक जूठन पर पलते रहने वाले कांग्रेसियों को कभी भारतीय राजनीति में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का योगदान समझ नही आयेगा। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि पाश्चात्य विचारों को भारत पर लाद देने वाले लोग, मैकाले के वंशज काले अंग्रेज जब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के योगदान के बारे में पूछते हैं, तो भाजपा तिलमिलाती नही है, बल्कि तरस खाती है और चाहती है कि माफ कर दिया जाए अंग्रेजियत के इन गुलामों को।
श्रीवास्तव ने कहा कि अंधे के हाथ में बटेर लगने की तरह जब नेहरू के हाथ सत्ता आयी, जब अपने ही भार से लदे अंग्रेज भारत से रूखसत हो रहे थे, तब उन्होंने नव साम्राज्यवादी, नेहरू को सत्ता सौंपकर देश को विभाजन के द्वारा कमजोर कर यहां से गये, महात्मा गांधी ने जिसे शैतानी सभ्यता कहा था, उसे लाद कर पंडित नेहरू ने देश की रीढ़ का सौदा अंग्रेजों के साथ कर दिया था। उन्होंने कहा कि उस वैचारिक दीवालियापन के खिलाफ भारत और भारतीयता का शंखनाद करने वाले, विशुध्द आर्थिक चिंतन देने का योगदान पंडित दीनदयाल उपाध्याय का है। आजादी के बाद अगर 70 वर्षों में भी भारत बुरी हालात में है तो इसका कारण यही है कि देश को फिरंगी विचारों के आधार पर हांकने की हरकत होती रही। श्रीवास्तव ने कहा कि भारत और भारतीयों के संचारक, रीढ़ विहीन कांग्रेसियों द्वारा शासित देश में स्वदेशी विचारों का शंखनाद, भारतीय सांस्कृतिक उन्नयन का अग्रदूत होना पंडित दीनदयाल उपाध्याय का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी भी इस वैचारिक योगदान को समझ नहीं सकता। सवाल तिलमिलाने का नही बल्कि कांग्रेस के विचारहीन लोगों पर दया करने का है।

 

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