धन्य है ऐसे शिक्षक-शिक्षक दिवस पर इन गुरुजनों का सम्मान

श्री दिनेश नायक एवं श्री शशिभूषण पाण्डेय

धीरज शिवहरे (कोरिया) ये दोनों वे शिक्षक है जिन्होंने शिक्षकीय कार्य को केवल अपना पेशा या जीवकोपार्जन का साधन नहीं माना बल्कि अल्प संसाधनों में अपने शासकीय विद्यालयो और वहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों को भी निजी विद्यालयो के जैसी सुविधाये अपने निजी प्रयासों और जनसहयोग से पूरा करने का प्रयास किया।

शासकीय प्राथमिक शाला महलपारा एवं सारा विद्यालय के इन शिक्षको ने जो शिक्षा एवं सुविधाये अपने विद्यालयो में बच्चों को मुहैया कराई है वह काबिले तारीफ़ है एवं अनुकरण योग्य है।

टाई, बेल्ट लगाकर अप टू डेट यहाँ कोई भी बच्चा बिना चप्पल बिना स्कूल बैग किताब कापी के नहीं मिलेगा सीसीटीवी की निगरानी में सुरक्षित बच्चे शायद यह छत्तीसगढ़ का एकमात्र शासकीय विद्यालय होगा।

जहाँ हर साल लोकतान्त्रिक तरीके से चुनाव होते है बच्चे स्वयं ही अपने मंत्रिमंडल का चुनाव करते है साल में सबसे अधिक उपस्थिति वाले बच्चों को पुरुष्कृत किया जाता है और रोज जिस विद्यार्थी का जन्मदिन हो उसका जन्मदिन मनाया जाता है।
होली हो, दीवाली हो, रक्षाबंधन हो, सरस्वती पूजा, गणेश पूजा या मातृ पितृ दिवस सारा त्यौहार बच्चे विद्यालय में ही बड़े धूमधाम से मनाते है।

खेल खेल में शिक्षा जिसे नवाचारी शिक्षा पद्धति कहा जाता है उसका इससे बेहतर उत्कृष्ट उदाहरण शायद ही कही और आपको मिल सकेगा।

इन शिक्षको ने विद्यायल में ही इन जरूरतमंदों बच्चों के लिए नवोदय एवं एकलव्य जैसे उत्कृष्ट विद्यालयो के लिये होने वाली चयन परीक्षा की निःशुल्क कोचिंग को प्रारंभ किया ताकि बच्चे इन अच्छे स्कूलो में प्रवेश पा सके।

ऐसे समय में जब शिक्षा का पूर्णतः व्यवसायीकरण हो चूका है और शिक्षकीय कार्य कर्तव्य ना होकर जीवन निर्वाह का एक साधन माना जाने लगा है।

इन शिक्षको के द्वारा किया जा रहा प्रयास प्रशंषा एवं सराहना योग्य है इन दोनों शिक्षक रत्नों एवं समस्त ऐसे शिक्षको जिन्होंने समाज के लिए ऐसे अनुकरणीय प्रयास किये है आज याद किये जाने और सम्मानित किये जाने की आवश्यकता है ताकि इस भारत माता की भूमि से आगे भी डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे इतिहास पुरुष भविष्य में भी जन्म लेते रहे।

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