छत्तीसगढ़ मे 44 करोड़ रूपए की लागत से स्थापित होगा जैव प्रौद्योगिकी पार्क

०० कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बनेगा बायोटेक इन्क्यूबेशन सेन्टर

०० इन्क्यूबेशन सेन्टर की स्थापना के लिए आज होगा त्रिपक्षीय समझौता

रायपुर| छत्तीसगढ़ में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से जैव प्रौद्योगिकी पार्क विकसित किया जा रहा है। कुल 44 करोड़ रूपये लागत की जैव प्रौद्योगिकी पार्क परियोजना के प्रथम चरण में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में 30 करोड़ रूपये की लागत से बायोटेक इन्क्यूबेशन सेन्टर स्थापित किया जाएगा। इस सेन्टर की स्थापना के लिए कल 4 सितम्बर को छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के समक्ष भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मध्य त्रिपक्षीय अनुबंध किया जाएगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सुनिल कुजूर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील तथा सचिव कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग श्री अनूप कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद रहेंगे।
छत्तीसगढ़ जैव प्रौद्योगिकी प्रौन्नत सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी पार्क परियोजना के तहत जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के साथ ही अनुसंधान कार्याें को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी आधारित नये उद्योगों की स्थापना से जहां रोजगार के अवसर सृजित होंगे वहीं कुशल मानव संसाधन विकास भी होगा। उन्होंने बताया कि इस पंचवर्षीय योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में होगा। प्रथम चरण के अंतर्गत इंदिरा गंाधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बायोटेक इन्क्यूबेशन सेन्टर की स्थापना की जा रही है। सेन्टर की स्थापना दो वर्ष की अवधि में पूर्ण कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि परियोजना की द्वितीय चरण में रायपुर जिले के आरंग तहसील के ग्राम मुनगी में 9.59 हेक्टेयर भूमि पर बिजनेस इन्टरप्राइज जोन की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ग्राम मुनगी में भूमि आबंटित कर दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बायोटेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना से छत्तीसगढ़ में जैव प्रौद्योगिकी के विकास की संभावनाओं के नये द्वार खुलेंगे।

 

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