कोरिया जिले में विधि विधान से मनाया गया हरषष्ठी पर्व

धीरज शिवहरे (कोरिया) वैसे तो हर माँ अपने संतान की दीर्घायु के लिये हमेशा ईश्वर से कामना करती है पर एक खास पावन पर्व हरछठ भी है जिसमे संतान की लंबी उम्र व अकासमिक मौत से उसकी रक्षा हेतु हरछठ का व्रत हर माँ किया करती है ताकि उसका लाडला स्वस्थ व सदा सुरक्षित रहे ऐसी मान्यता है कि प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की छठी तिथि को यह पर्व आता है जिसका पूरी विधि विधान से पालन कर माँ अपने लाडले के लिए व्रत रखती है मान्यता ये भी है कि इस दिन महिलाएं फसलों पर पैर नही रखती और ना ही पारणा करते समय अनाज व दूध दही खाती है।

जानें क्यों है खास यह पर्व

पूजा के मुख्य स्थान पर सर्वप्रथम भैंस के गोबर से लीपा जाता है फिर कांशा का पेढ व मिट्टी के बुक्कु में कई प्रकार के अनाज के साथ पूजा स्थान पर सजाया जाता है साथ ही भैंस की घी व दूध को इस पर्व में काफी शुभ माना जाता है इस दिन महिलाओं को गाय के दूध का सेवन करना वर्जित माना गया है।

तथा इस दिन महुए का दातुन किया जाता है और इस पर्व को पुत्रवती स्त्रियां करती हैं एवं निर्जला व्रत रखती हैं और अंतिम विधि में निर्जला व्रत रखने के बाद साम को स्त्रियां पसई का चावल व महुए का लाटा बनाकर इसे ग्रहण करती हैं l

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